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दाभोलकर के शूटर ने कहा, दक्षिणपंथी समूह ने बंदूक चलाने और बम बनाने की ट्रेनिंग दी थी

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या मामले में गिरफ्तार शरद कालसकर ने 14 पेज के कबूलनामे में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पनसारे की हत्या में भी शामिल होने की बात स्वीकार की है.

सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर. (फोटो: पीटीआई)

सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या मामले में पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार शरद कालसकर ने तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं में भी शामिल होने की बात स्वीकार की है.

कालसकर का कहना है कि दाभोलकर पर गोली चलाने वाले दो लोगों में से एक वह खुद था.

एनडीटीवी के मुताबिक, कालसकर ने 14 पेजों के कबूलनामे में इन हत्याओं में शामिल होने का ब्योरा दिया है. दाभोलकर की अगस्त 2013 में पुणे में हत्या कर दी गई थी.

कालसकर का कहना है कि उसने दाभोलकर पर दो बार गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली उनके सिर में लगी जबकि दूसरी आंख में लगी. उसने यह भी कहा कि हत्या से कई महीनों पहले दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने उससे संपर्क किया था और बंदूकों का इस्तेमाल करने और बम बनाने का प्रशिक्षण दिया था.

कालसकर के मुताबिक, इस हत्या के मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह तावड़े (जिसे भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया है) ने कहा था कि हमें कुछ बुरे लोगों को खत्म करना है.

कालसकर के कबूलनामे के मुताबिक,  दाभोलकर के हत्यारों ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के लिए सितंबर 2017 में योजना बनाने में भी भूमिका निभाई थी और इसके लिए कई बार मीटिंग कर रणनीति तैयार की गई.

उन्होंने बताया, ‘अगस्त 2016 में बेलगाम में एक बैठक हुई थी, जहां हिंदूवाद के खिलाफ काम कर रहे लोगों के नाम प्रस्तुत गए. उसी बैठक में गौरी लंकेश का नाम भी आया और उन्हें मारने का फैसला लिया गया.’

उन्होंने कहा कि इसी तरह की एक और बैठक अगस्त 2017 में हुई थी, जिसमें हत्या की अंतिम योजना का फैसला किया गया. कालसकर और अन्य आरोपी ने एक पूरा दिन शूटिंग की प्रैक्टिस की थी.

दाभोलकर की हत्या में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

दक्षिणपंथी हिंदू चरमपंथी समूह सनातन संस्था का नाम भी दाभोलकर, पानसरे, एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं से जुड़ा हुआ है. लंकेश की हत्या में दर्ज की गई चार्जशीट में इन हत्याओं को सनातन संस्था द्वारा किया गया संगठित अपराध बताया गया है.

इस मामले में सनातन संस्था से संबद्ध जनाजागृति समिति के पुणे के पूर्व संयोजक अमोल काले को मुख्य आरोपी बताया गया है. कालसकर के कबूलनामे के मुताबिक, दाभोलकर की हत्या के बाद तावड़े ने ही उसे काले से मिलाया था.