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विकास परियोजनाओं में देरी से करदाताओं का पैसा बर्बाद हो रहा है: हाईकोर्ट

अदालत ने कहा, परियोजना कछुए की चाल से भी नहीं बढ़ रही और भाजपा नगर निगम पर दस साल से अधिक समय से शासन कर रही है फिर भी परियोजनाएं पूरी नहीं हुई हैं.

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(फोटो: पीटीआई)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि विकास परियोजनाओं में देरी कर अधिकारी करदाताओं का पैसा बर्बाद कर रहे हैं, जो एक बेहद ख़राब स्थिति है.

उच्च न्यायालय की एक पीठ ने दिल्ली के कार्यकर्ता संदीप कुमार द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.

सुनवाई के दौरान पीठ से कहा गया कि पश्चिम दिल्ली में वर्ष 2008 में परियोजनाओं का उद्घाटन किए जाने के बावजूद भाजपा द्वारा संचालित दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) नांगलोई में रेल लाइन पर एक पैदल पार पथ (एफओबी) और सुल्तानपुरी में एक भूमिगत मार्ग का निर्माण कार्य पूरा करने में अब तक नाकाम रही है.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा की पीठ ने कहा, इस अदालत में मौजूद हर व्यक्ति कर का भुगतान करता है. इस तरह के मामले देखकर हमारा न्यायिक विवेक आहत होता है. अधिकारी करदाताओं के पैसे बर्बाद कर रहे हैं जो कि बेहद ख़राब स्थिति है.

अदालत ने इस बात का संज्ञान करते हुए कि परियोजनाएं पूरी करने की समयसीमा साल 2014 तक बढ़ायी गई थी और एमसीडी उसे भी पूरा करने में नाकाम रही, कहा, अधिकारी करदाताओं के पैसों का दुरुपयोग करना हर कीमत पर बंद करें. हमारे पैसों का कैसे इस्तेमाल किया जाए, इसका निर्धारण करने का उनके पास एकाधिकार है.

पीठ ने कहा कि परियोजना कछुए की चाल से भी नहीं बढ़ रही और लगातार तीसरी बार एमसीडी चुनाव जीतने वाली भाजपा नगर निगम पर अब दस साल से अधिक समय से शासन कर रही है फिर भी परियोजनाएं पूरी नहीं हुई हैं.

पीठ ने कहा कि बार-बार समयसीमा ख़त्म होने के कारण परियोजनाओं की लागत काफी बढ़ गई है और अधिकारी, चाहे वह नगर निगम हो या सरकार, समझ नहीं रहे कि इन परियोजनाओं में हमारा पैसा लगता है. हमारे पैसे का दुरुपयोग हो रहा है और वह बर्बाद किया जा रहा है.

सुनवाई के दौरान नगर निगम अदालत को परियोजनाओं की बढ़ी लागत के बारे में बता नहीं पाया.

अदालत ने नगर निगम से कहा कि वह 25 जुलाई तक एक स्थिति रिपोर्ट सौंपकर बताए कि वह कब तक परियोजनाएं पूरी कर लेगा.