राजनीति

राजस्थान में पार्टी चापलूसों का दरबार बनती जा रही है: भाजपा विधायक

सांगानेर विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने केंद्रीय अनुशासन समिति द्वारा जारी नोटिस के जवाब में दावा किया कि संघ से जुड़े सभी संगठन वसुंधरा सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है.

Collage Rajasthan

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और राजस्थान के वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी के बीच तनातनी जगजाहिर रही है. विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक मतों से जीतने के बावजूद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गई, जिसके बाद से वे मुख्यमंत्री पर कभी सीधे तो कभी परोक्ष रूप से हमले करते रहे हैं. कई बार वे विधानसभा में विपक्ष के साथ मिलकर सरकार के ख़िलाफ़ बोलते हुए भी नज़र आए.

हालांकि तिवाड़ी की वरिष्ठता के चलते उनके ख़िलाफ़ पार्टी में कभी कोई आवाज़ नहीं उठी पर पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने तिवाड़ी के ख़िलाफ़ केंद्रीय अनुशासन समिति में शिकायत की, जिसके बाद 6 मई को उनके ख़िलाफ़ एक नोटिस जारी करके 10 दिन के भीतर जवाब मांगा गया.

नोटिस का जवाब तिवाड़ी ने खरे-खरे शब्दों में देते हुए कहा कि इस तरह का नोटिस सच्ची निष्ठा का तिरस्कार है. उन्होंने लिखा, ‘आपका नोटिस अपमान कर रहा है राजस्थान के हर उस कार्यकर्ता का जिसने श्रेष्ठ-मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना के साथ अपना जीवन राजनीति में खपाया. आपका नोटिस राजस्थान के स्वाभिमान पर आघात है. और अगर आप यह सोचते हैं कि इस नोटिस से घबराकर राजस्थान के कार्यकर्ता इस भ्रष्ट और निकृष्ट नेतृत्व के सामने झुक जाएंगे तो मैं बतला दूं कि राजस्थान न झुका है, न झुकेगा, बल्कि एक नया इतिहास रचेगा.’

GhanshyamTiwadi notice

घनश्याम तिवाड़ी को भेजा गया नोटिस

इस नोटिस में उनसे सवाल किया गया था कि वे पार्टी मीटिंग में क्यों नहीं जाते हैं, जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘इसका प्रमुख कारण है कि मुझे वहां जान का ख़तरा है. राजस्थान में मुझ पर पांच बार हमला हो चुका है. इन हमलों से पहले वर्तमान भाजपा सरकार (जिसमें भाजपा का खाली नाम ही बचा है, बाकी सब तो लुट गया है) ने मुझे और मेरे परिवार को दी गई सुरक्षा हटा दी.’

उन्होंने दावा किया कि संघ से जुड़े सभी संगठन जैसे- मजदूर संघ, किसान संघ, शिक्षक संघ, विद्यार्थी परिषद, विहिप, बजरंग दल, यहां तक कि स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक तक सड़कों पर उतर कर इस सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर चुके है, लेकिन किसी की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही. केवल सामंतवाद के रंग-ढंग के आगे पार्टी नतमस्तक हो रही है.

उन्होंने पार्टी नेतृत्व से जान का ख़तरा होने आरोप लगाते हुए समिति से सवाल भी किया है, ‘जब तक वर्तमान नेतृत्व राजस्थान में है तब तक भाजपा की बैठकों में जाना मेरे लिए जीवन की सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है. आपने मुझे तो अनुशासनहीनता का प्रशस्ति पत्र भेजा है, लेकिन क्या आप इस विषय को देखकर मुझ पर हमला करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की क्षमता रखते हैं? अफ़सोस की बात यह है कि मुझ पर हमला किसी विरोधी दल के कार्यक्रम में नहीं भाजपा के कार्यक्रम में, भाजपा के वर्तमान नेतृत्व के गुर्गों द्वारा किया गया.’

तिवाड़ी प्रदेश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं और भैरों सिंह शेखावत के समय से प्रदेश में मंत्री थे. इस पत्र में उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी उन्हें पार्टी से दरकिनार करने के आरोप भी लगाए हैं,

उनका कहना है, ‘मुख्यमंत्री द्वारा दबाव बनवा कर मुझे पार्टी के केंद्र और प्रदेश के सभी दायित्वों से एक-एक कर हटवा दिया गया. क्या इस मुख्यमंत्री को आपने पार्टी गिरवी रख दी है? पार्टी की स्थापना के समय से ही मैं सभी राष्ट्रीय परिषदों का सदस्य रहा था. वर्तमान मुख्यमंत्री ने उस समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को धमकी देकर मुझे राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्यता से हटवा दिया.’

तिवाड़ी कहते हैं, पार्टी की स्थापना के समय से ही मैं प्रदेश की सभी चुनाव समितियों का सदस्य रहा. लेकिन इस बार 2013 के प्रदेश के चुनावों के समय राजस्थान की चुनाव समिति से मुझे हटा दिया गया. जयपुर में 2014 में जब मोदी जी की चुनाव सभा हुई तो मंच पर बैठने वालों में 29 लोगों के नाम थे उनमें भी मेरा नाम नहीं रखा गया.

वे आगे कहते हैं, ‘श्रीमान अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद मुझे राष्ट्रीय कार्यकारिणी में पुनः लेने का निर्णय हुआ और आमंत्रण का फोन भी आ गया, लेकिन रातों-रात दबाव डलवा कर उसे भी रुकवा दिया. मेरे स्थान पर राजस्थान से जिन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया है उनके नामों पर भी ज़रा ग़ौर कर लीजिए. आपको समझ में आ जाएगा कि राजस्थान में पार्टी समर्पण, निष्ठा और योग्यता को दरकिनार कर चापलूसों का दरबार और माफ़ियाओं का अड्डा बनती जा रही है.’

तिवाड़ी ने राष्ट्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. उनका कहना है कि नोटिस भेजने से पहले उन्हें बुलाकर भी बात की जा सकती थी. उन्होंने लिखा है, ‘बिना कोई बात किए मुझे सीधे नोटिस देकर सफाई मांगना और वह भी मीडिया के द्वारा सार्वजनिक रूप से- यह तो मात्र एक औपचारिकता है जो पूर्वाग्रह से ग्रसित मंतव्य को परिलक्षित करती है. अब ये स्पष्ट है कि सब काम उनके लिए किया जा रहा है जो भ्रष्ट है.’

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)