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तमिलनाडु: लापता पर्यावरण कार्यकर्ता मुगिलन मिले, गुमशुदगी के संबंध में जांच शुरू

स्टरलाइट विरोधी आंदोलन में हुई गोलीबारी में तूतीकोरिन पुलिस के शामिल होने पर एक पत्रकार वार्ता करने के बाद 15 फरवरी से पर्यावरण कार्यकर्ता एस. मुगिलन लापता हो गए थे. लापता होने से कुछ घंटों पहले वे एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज़ को लेकर पत्रकारों से मिले थे.

तमिलनाडु के पर्यावरण कार्यकर्ता एस. मुलिगन. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब)

तमिलनाडु के पर्यावरण कार्यकर्ता एस. मुगिलन. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब)

चेन्नई: कुछ महीने पहले चेन्नई से मदुरै जा रही ट्रेन में सवार होने के बाद कथित रूप से लापता हुए पर्यावरण कार्यकर्ता मुगिलन के तिरुपति में मिलने के बाद सीबी-सीआईडी ने उन्हें हिरासत में ले लिया. अदालत के निर्देश पर मामले की जांच सीबी-सीआईडी को सौंप दी गई है.

स्टरलाइट विरोधी आंदोलन में हुई गोलीबारी में तूतीकोरिन पुलिस के शामिल होने पर एक पत्रकार वार्ता करने के बाद 15 फरवरी से पर्यावरण कार्यकर्ता एस. मुगिलन लापता हो गए थे. लापता होने से कुछ घंटों पहले वे एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करने को लेकर पत्रकारों से मिले थे.

मुगिलन तिरुनेलवेली जिले में परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पुदुकोट्टई जिले में हाइड्रोकार्बन परियोजना और तूतीकोरिन जिले में स्टरलाइट विरोधी आंदोलनों में कथित रूप से शामिल रहे थे.

तमिलनाडु के मत्स्य पालन मंत्री डी. जयकुमार ने रविवार को पत्रकारों को बताया, ‘मुगिलन को तिरुपति से चेन्नई लाया गया. अब, अदालत के आदेश पर सीबी-सीआईडी इस मामले (गुमशुदगी) की जांच कर रही है.’

जयकुमार से जब पूछा गया कि क्या मुगिलन का अपहरण किया गया था, तो उन्होंने कहा जांच पूरी होने बाद ही इस बात का पता लग सकेगा.

गैर-सरकारी संगठन ‘पीपुल्स वॉच’ के कार्यकारी निदेशक हेनरी तिफांगे ने कहा कि उनके मित्र मुगिलन शनिवार रात तिरुपति रेलवे स्टेशन पर पाए गए.

इस बीच, मुगिलन का 44 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में ‘अवे फ्रॉम रिएक्टर’ (एफआरएम) की स्थापना के विरोध में नारे लगाते दिख रहे हैं.

राज्य की पुलिस ने फरवरी में इस संबंध में गुमशुदगी का एक मामला दर्ज किया था.

इससे पहले द वायर  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कुछ वीडियो के अनुसार, तूतीकोरिन पुलिस ने 22 मई, 2018 को स्टरलाइट विरोधी आंदोलनकारियों पर गोलीबारी की योजना तैयार की थी.

विभिन्न वीडियो क्लिपिंग को जोड़ते हुए मुगिलन ने दावा किया था कि गोलीबारी की योजना सुनियोजित थी और उन्हें दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर यह योजना बनाने का आरोप लगाया था.

पीपुल्स वॉच के कार्यकारी निदेशक हेनरी तिफांगे ने कहा, ‘मैं उन्हें जिंदा देखकर खुश हूं. हालांकि, अभी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं.’ बता दें कि तिफांगे ने मुगिलन का पता लगाने के लिए हीबियस कॉर्पस याचिका लगाई थी.

तिफांगे ने कहा, ‘मुगिलन बहुत ही बुरी तरह से मनोवैज्ञानिक दबाव में लग रहे थे. वीडियो में दिख रहे मुगिलन, वे नहीं हैं जिन्हें हम जानते हैं. उनके नारों से यह भी साफ नहीं हो पा रहा था कि उन्हें किसने हिरासत में रखा था.’

इस बीच, तमिल समाचार चैनल को दिए एक इंटरव्यू में मुगिलन को तिरुपति रेलवे स्टेशन पर हिरासत में लेने वाले इंस्पेक्टर ने आरोप लगाया कि वे ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जान देने की कोशिश कर रहे थे.

इंस्पेक्टर ने कहा कि मुगिलन को एक सहयात्री की शिकायत पर हिरासत में लिया गया जिसने उनके असामान्य व्यवहार की शिकायत की थी.

उन्होंने कहा, ‘पुलिस को देखते ही उन्होंने केंद्र, राज्य, कुडनकुलम पावर प्लांट, स्टरलाइट व अन्य के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए और ट्रेन से कूदने की कोशिश करने लगे. हमने उन्हें रोका और स्टेशन लेकर आए.’

सीबी-सीआईडी के सूत्रों ने बताया कि वे अभी मामले का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

बता दें कि गुमशुदगी के बाद मुगिलन पर एक बलात्कार का मुकदमा भी दर्ज हुआ था. इसके साथ ही तूतीकोरिन में स्टरलाइट के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के बाद सितंबर, 2017 में कुडनकुलम विरोधी संघर्ष से संबंधित 13 मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया था.

हालांकि, सभी मामलों में जमानत मिलने के बाद उन्हें सितंबर, 2018 में रिहा कर दिया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)