राजनीति

कर्नाटक सियासी संकट: दो और कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दिया, बागी विधायक सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

इससे पहले कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 14 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. कांग्रेस के बागी विधायक मुंबई के एक होटल में ठहरे हुए हैं. कर्नाटक सरकार के मंत्री और कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार बागी विधायकों से मिलने गए थे, तब मुंबई पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.

Bengaluru: JD(S) MLAs leave a hotel in Bengaluru, Monday, July 8, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI7_8_2019_000222B)

कर्नाटक विधानसभा से इस्तीफा देने वाले जेडीएस विधायक. (फोटो: पीटीआई)

मुंबई: मुंबई के जिस होटल में कर्नाटक के बागी विधायक ठहरे हुए हैं उसके बाहर बुधवार को जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री डीके शिवकुमार को होटल में प्रवेश करने से रोक दिया गया.

हालांकि कांग्रेस-जेडीएस सरकार को गिरने से रोकने की कवायद के तौर पर वह विधायकों से मुलाकात करने पर अड़े रहे. इस पर मुंबई पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करते हुए पवई में रिनेसन्स होटल के बाहर से शिवकुमार सहित अन्य कांग्रेस नेताओं को हिरासत में ले लिया.

इससे पहले, रिनेसन्स होटल के बाहर वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवकुमार ने कहा कि राजनीति संभावनाओं का क्षेत्र है और उन्हें उस कमरे में जाने दिया जाए जिसे उन्होंने पहले से बुक कराया था.

इस होटल के बाहर सुरक्षाकर्मी, कैमरा क्रू, मीडियाकर्मियों और राजनीतिक समर्थकों के बीच धक्कामुक्की हुई. एक अन्य समूह ने ‘शिवकुमार वापस जाओ’ जैसे नारे लगाए.

इस बीच कांग्रेस के दो विधायकों आवास मंत्री एमटीबी नागराज और के. सुधाकर ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया जिससे असंतुष्ट विधायकों की संख्या बढ़कर 16 हो गयी है.

अगर विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो सत्तारूढ़ गठबंधन को सदन में बहुमत खोने की आशंका है क्योंकि अभी 224 सदस्यीय सदन में उसके विधायकों की संख्या 116 है.

इन इस्तीफों के मिलने की पुष्टि करते हुए विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने पत्रकारों से कहा, ‘जी हां, सुधाकर और एमटीबी नागराज ने इस्तीफा दे दिया है.’

उन्होंने बताया कि विधायकों ने राज्य सचिवालय के विधान सौध में विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में अपना इस्तीफा सौंपा.

इस्तीफा सौंपने के बाद नागराज ने पत्रकारों से कहा कि वह राजनीति से ‘निराश’ हो चुके हैं और सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेना चाहते हैं. नागराज ने कहा, ‘मैं कोई मंत्री पद या कुछ नहीं चाहता. मैं राजनीति से निराश हो गया हूं.’

इससे पहले मुंबई स्थित होटल से मिले एक ईमेल में खुलासा हुआ कि शिवकुमार के ठहरने के लिए कमरा बुक कराया गया था लेकिन ‘कुछ आपात स्थिति’ के कारण बुकिंग रद्द कर दी गई.

ईमेल में कहा गया है, ‘हमारी बातचीत के अनुसार हम आपको सूचित करना चाहते हैं कि हमारे पास डीके शिवकुमार: आरईजेड775665डी2 के नाम से बुकिंग है. होटल में किसी आपात स्थिति के कारण हमें बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है. कोई शुल्क नहीं लगेगा.’

मंगलवार मध्यरात्रि को पवई के रिनेसन्स होटल में ठहरे हुए 12 में से 10 विधायकों ने मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर अपनी जान को खतरा बताया और कहा था कि शिवकुमार को होटल में नही आने दिया जाए. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘हमें बागी विधायकों से एक पत्र मिला है.’

इससे पहले वापस जाने से इनकार करते हुए कांग्रेस के संकटमोचक माने जाने वाले शिवकुमार ने कहा कि वह विधायकों से मिले बिना वापस नहीं जाएंगे. उनके साथ जेडीएस के वरिष्ठ विधायक भी आए. उन्होंने कहा, ‘मैं अपने मित्रों को अपने दिल की बात कहने आया हूं… राजनीति संभावनाओं का क्षेत्र है.’

शिवकुमार ने कहा, ‘मैं कैसे विधायकों के लिए खतरा हो सकता हूं. हम दोस्त हैं. अगर भाजपा शामिल नहीं है तो क्यों कई पुलिसकर्मी यहां हैं. मेरे पास दिल है और कोई हथियार नहीं है.’

कर्नाटक विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद शनिवार से ही कांग्रेस के सात, जेडीएस के तीन और दो निर्दलीय समेत 12 विधायक मुंबई के रिनेसन्स होटल में ठहरे हुए हैं. उन्होंने कर्नाटक की गठबंधन सरकार से समर्थन भी वापस ले लिया है.

विधायकों ने अपने पत्र में कहा कि वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी या शिवकुमार से मुलाकात नहीं करना चाहते और उन्होंने शहर की पुलिस से उन्हें होटल में आने की अनुमति नहीं देने का भी अनुरोध किया था.

पत्र में शिवराम हेब्बार, प्रताप गौड़ा पाटिल, बीसी पाटिल, बायरती बासवराज, एसटी सोमशेखर, रमेश जारकीहोली, गोपालैया, एच. विश्वनाथ, नारायण गौड़ा और महेश कुमारतली के नाम एवं हस्ताक्षर हैं.

मालूम हो कि बीते छह जुलाई को कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 14 विधायकों द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने से राज्य में 13 माह पुरानी मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली सरकार खतरे में पड़ गई है.

इस्तीफा देने वाले 14 विधायकों में एसटी सोमशेखर, मुनिरत्न, बीए बसवराज, प्रताप गौडा पाटिल, बीसी पाटिल, रमेश जारकिहोली, ए. शिवराम हेब्बार, महेश कुमाथल्ली, रामलिंग रेड्डी, आनंद सिंह और रोशन बेग (सभी कांग्रेस) और गोपालैया, नारायण गौडा, अडगुर एच. विश्वनाथ (सभी जेडीएस) शामिल हैं.

बुधवार को दो और कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा देने के बाद इस्तीफा देने वाले 16 विधायकों में से 13 कांग्रेस से और तीन जदएस से हैं.

सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार से इनके अलावा दो निर्दलीय विधायकों ने भी सोमवार को मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने वाले इन निर्दलीय विधायकों के समर्थन से अब भाजपा के पास 224 सदस्यीय विधानसभा में 107 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिये 113 का आंकड़ा चाहिए.

अगर इन 16 विधायकों का इस्तीफा स्वीकृत कर लिया जाता है तो गठबंधन का आंकड़ा घटकर 100 हो जाएगा.

विधानसभा अध्यक्ष को छोड़कर गठबंधन विधायकों की कुल संख्या 116 (कांग्रेस-78, जेडीएस-37 और बसपा-1) है. कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 12 जुलाई से शुरू होगा.

कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायक पहुंचे उच्चतम न्यायालय

कर्नाटक का राजनीतिक संकट उच्चतम न्यायालय भी पहुंच गया है. कांग्रेस और जेडीएस के दस बागी विधायकों ने एक याचिका दायर कर आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार जान-बूझकर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे हैं.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बागी विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी की दलीलों पर गौर किया और उन्हें आश्वस्त किया कि वह देखेगा कि क्या उनकी याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए कल सूचीबद्ध किया जा सकता है.

राज्य विधानसभा के अध्यक्ष ने मंगलवार को कहा था कि 14 बागी विधायकों में से नौ के इस्तीफे सही नहीं थे. कांग्रेस ने इस मामले में अध्यक्ष केआर रमेश कुमार से हस्तक्षेप करने और इन विधायकों को अयोग्य करार देने का अनुरोध किया है. कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह उसके सदस्यों को धन का प्रलोभन दे रही है. हालांकि भाजपा ने इस तरह के आरोपों से इंकार किया है.

लोकसभा-राज्यसभा में लगातार तीसरे दिन हंगामा, कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का वॉकआउट

मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा छाया रहा. लोकसभा में कांग्रेस ने बुधवार को लगातार तीसरे दिन कर्नाटक के सियासी घटनाक्रम का मुद्दा उठाया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कर्नाटक में जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन सरकार को सत्ता से हटाने की ‘साजिश रचने’ तथा महाराष्ट्र में ‘मार्शल लॉ’ लागू होने का आरोप लगाया.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कर्नाटक के सिंचाई मंत्री डीके शिवकुमार को मुंबई में असंतुष्ट विधायकों से मिलने से रोके जाने एवं विधायकों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया. इस मामले में सरकार के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, राकांपा सहित विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट किया.

संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों को साथ रखने में विफल रहने के कारण ऐसे आरोप लगा रही है.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले विधायकों ने डीके शिवकुमार से खतरा होने के बारे में मुंबई के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा था और इस शिकायत के आधार पर इन विधायकों को पुलिस सुरक्षा प्रदान कर रही है.

जोशी ने कहा कि मुंबई में जिन विधायकों के होटल में रुकने की बात की गई है, वे कांग्रेस से विधायक हैं. उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दिया है. उन्होंने मुंबई के पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा कि उन्हें डीके शिवकुमार से खतरा है. ऐसे में पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रही है तो क्या गलत है.

उन्होंने कहा कि जहां तक विधायकों के इस्तीफे की बात है, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि राहुल गांधी ने इस्तीफे का जो सिलसिला शुरू किया, उसी कड़ी में इन विधायकों ने इस्तीफा दिया है.

इसके बाद कांग्रेस सदस्य नारेबाजी करने लगे. वे ‘वी वॉन्ट जस्टिस’ (हमें न्याय चाहिए) के नारे लगा रहे थे. कुछ देर बाद कांग्रेस सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आकर नारेबाजी करने लगे.

कांग्रेस सदस्य सोमवार से ही संसद में कर्नाटक में विधायकों के इस्तीफे का कारण बनी राजनीतिक अस्थिरता का मुद्दा उठा रहे हैं और भाजपा नीत केंद्र सरकार पर विपक्षी पार्टी के सदस्यों को प्रलोभन देकर दल बदल कराने का आरोप लगा रहे हैं.

उधर, विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं चल पाया और भोजनावकाश के बाद उच्च सदन को दिनभर के लिए स्थगित करना पड़ा.

कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक बुधवार को भी बाधित रही और कार्यवाही एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.

Bengaluru: Karnataka BJP State President B S Yeduyurappa with his party MLAs sits in front Gandhi statue for a protest to demand the resignation of Karnataka Chief Minister H D Kumaraswamy at Vidhana Soudha, in Bengaluru, Wednesday, July 10, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak)(PTI7_10_2019_000057B)

कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने पार्टी के विधायकों के साथ बेंगलुरु स्थित विधान सौध में बुधवार को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से इस्तीफा देने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई)

कर्नाटक में भाजपा ने दिया धरना, मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगा

कर्नाटक में भाजपा ने बुधवार को विधान सौध में बुधवार को धरना देते हुए मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी का इस्तीफा मांगा. उन्होंने दावा किया कि सत्तारूढ़ कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के 14 विधायकों के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री ने सदन में बहुमत खो दिया है.

पूर्व उपमुख्यमंत्री के एस ईश्वरप्पा समेत राज्य के कई भाजपा नेताओं ने विधान सौध में (महात्मा) गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदेश अध्यक्ष बीएस येद्दयुरप्पा के नेतृत्व में प्रदर्शन में भाग लिया.

प्रदर्शनकारियों ने ‘बहुमत खोने वाली सरकार मुर्दाबाद, कुर्सी पर चिपके रहने वाला मुख्यमंत्री मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए.

वहीं, राज्य में भाजपा प्रमुख बीएस येदियुरप्पा ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात कर उनसे कहा कि वह विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल कोई कदम उठाने को कहें. उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उनके पास संख्याबल नहीं है.

भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के अध्यक्ष रमेश कुमार से भी मुलाकात करने की संभावना है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)