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उत्तराखंड: लोगों की आवाजाही के लिए ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला हुआ बंद

लक्ष्मण झूला पुल ऋषिकेश में गंगा नदी पर 1923 में बना था. विशेषज्ञों की एक टीम ने पाया है कि पुल के ज़्यादातार हिस्से बहुत कमजोर हो गए हैं या गिरने की स्थिति में हैं.

ऋषिकेश स्थित लक्ष्मण झूला. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

ऋषिकेश स्थित लक्ष्मण झूला. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

देहरादून: उत्तराखंड के ऋषिकेश शहर में गंगा नदी पर स्थित तकरीबन 100 साल पुराना ऐतिहासिक ‘लक्ष्मण झूला’ को शुक्रवार को बंद कर दिया गया. दरअसल, विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल और अधिक भार सहन नहीं कर सकता. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

अतिरिक्त मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि यह पुल विशेषज्ञों की एक टीम के सुझाव के बाद बंद कर दिया गया है. उन्होंने (विशेषज्ञों ने) पाया कि पुल के ज्यादातार हिस्से ‘बहुत कमजोर’ हो गए हैं, या ‘गिरने’ की स्थिति में हैं.

यह पुल ऋषिकेश में गंगा नदी पर 1923 में बना था. लक्ष्मण झूला ऋषिकेश आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का एक मुख्य केंद्र रहा है.

डिजाइन टेक स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट की ओर से दी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल का तमाम हिस्सा खराब और टूटने की स्थिति में है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पुल पर तत्काल प्रभाव लोगों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया जाना चाहिए.

ओम प्रकाश ने बताया कि विशेषज्ञों ने इस पुल को 12 जुलाई से लोगों की आवाजाही सहित सभी तरह के यातायात के लिए फौरन बंद करने का सुझाव दिया था क्योंकि और अधिक भार सहन करने की हालत में नहीं है.

उन्होंने बताया कि इस पुल पर हाल के समय में अप्रत्याशित तरीके से लोगों की आवाजाही बढ़ गई और यह अब एक तरफ झुका हुआ प्रतीत हो रहा है.

उन्होंने बताया कि इस पुल का इस्तेमाल किया जाना जोखिम भरा हो सकता है. इसे ध्यान में रख कर यह फैसला किया गया.

यह पुल टिहरी जिले में तपोवन गांव को नदी के पश्चिमी तट पर स्थित पौड़ी जिले के जोंक से जोड़ता है.

बताया जाता है कि महाकाव्य रामायण के एक महत्वपूर्ण पात्र लक्ष्मण ने इसी स्थान पर जूट की रस्सियों के सहारे नदी को पार किया था.

इस पुल पर ‘गंगा की सौगंध’, ‘ सन्यासी’ और लोकप्रिय जासूसी धारावाहिक ‘सीआईडी’ की शूटिंग भी हुई है.

लक्ष्मण झूला 450 फीट लंबा लोहे का सस्पेंशन ब्रिज है. यह पुल ऋषिकेश की पहचान में से एक है. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जहां पुल बना है उसी स्थान से भगवान राम के भाई लक्ष्मण ने जूट की रस्सी से पुल पार किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)