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भेल के लिए अधिग्रहित किसानों की ज़मीन आधी कीमत पर रामदेव को देगी महाराष्ट्र सरकार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने रामदेव को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया है. तीन साल पहले फड़णवीस सरकार ने रामदेव को नागपुर में पतंजलि फूड और हर्बल पार्क के लिए 230 एकड़ ज़मीन मुहैया कराई थी, जो अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है.

21 जून, 2019 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगगुरु बाबा रामदेव के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस. (फोटो साभार: ट्विटर)

21 जून, 2019 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर योगगुरु बाबा रामदेव के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस. (फोटो साभार: ट्विटर)

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने बाबा रामदेव को लातूर में सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के लिए मौजूदा बाजार रेट से आधी कीमत (50 फीसदी छूट) पर 400 एकड़ जमीन मुहैया कराने का प्रस्ताव दिया है. इसमें कई अन्य छूट भी शामिल हैं.

मुंबई मिरर के अनुसार, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने खुद रामदेव को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया है. नांदेड़ में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में रामदेव और फड़णवीस के मंच साझा करने के एक हफ्ते से कम वक्त के बाद यह प्रस्ताव दिया गया है.

फड़णवीस ने रामदेव को खत में लिखा है कि सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट से ना केवल किसानों को उनकी फसल की अच्छी कीमत मिलेगी, बल्कि इससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.

खत में कहा गया है कि यह प्रस्ताव राज्य सरकार की सूक्ष्म, छोटे और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को प्रोत्साहित करने की नई नीति का हिस्सा है.

जमीन पर 50 प्रतिशत की छूट के साथ ही फड़णवीस सरकार ने स्टैंप ड्यूटी हटाने, रामदेव द्वारा अदा की जाने वाली जीएसटी लौटाने के अलावा एक रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल का भुगतान जैसी सहूलियतों का प्रस्ताव रखा है.

बता दें कि, इससे तकरीबन तीन साल पहले फड़णवीस सरकार ने नागपुर में पतंजलि फूड और हर्बल पार्क के लिए रामदेव को मामूली कीमत पर 230 एकड़ जमीन मुहैया कराई थी. हालांकि नागपुर में जमीन दिए जाने के तीन साल बाद भी अब तक फूड पार्क मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं.

खास बात यह है कि लातूर के औसा तालुके में स्थित जो जमीन रामदेव को ऑफर की गई है, वह भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) फैक्ट्री के लिए 2013 में किसानों से अधिग्रहीत की गई थी.

फैक्ट्री शुरू होने के बाद किसानों से नौकरी का वादा किया गया था. हालांकि बाबा रामदेव की कंपनी को जमीन देने की सूरत में किसान इस वादे को लेकर आश्वस्त नहीं हैं.

2013 में अपनी जमीन देने वाले किसानों का कहना है कि उनके साथ धोखा हुआ है। किसानों के मुताबिक उन्हें साढ़े तीन लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से भुगतान किया गया, जबकि वर्तमान समय में जमीन की कीमत 45 लाख रुपये प्रति एकड़ है.

किसान श्रीमंत लांडगे का कहना है, ‘जमीन के पास से एक हाईवे निकल रहा है, जिससे कीमत में उछाल आया है. हमने मूंगफली के लिए अपनी जमीन बेची थी, हमें कोई नौकरी नहीं मिली और अब हमसे कहा जा रहा है कि भेल के बजाए बाबा रामदेव यहां एक फैक्ट्री लगाएंगे.’

श्रीमंत ने कहा, ‘एक राष्ट्रीय परियोजना के लिए किसानों ने अपनी जमीन छोड़ी थी. अगर हमारी जमीन का इस्तेमाल निजी परियोजना के लिए होने जा रहा है तो हमें बाजार दर के आधार पर मुआवजा मिलना चाहिए.’

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि जमीन अधिग्रहण के बाद अगर कोई परियोजना अंतिम रूप नहीं ले पाती है, तो जमीन को दोबारा किसी और को मुहैया कराने का प्रावधान है.

स्थानीय कांग्रेस विधायक अमित देशमुख का कहना है, ‘हमारी पार्टी भेल के अलावा किसी कारोबारी को जमीन का इस्तेमाल नहीं करने देगी. रामदेव की परियोजना का पूरी ताकत के साथ विरोध किया जाएगा.’