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सरकार मनरेगा को हमेशा चलाए रखने की पक्षधर नहीं: ग्रामीण विकास मंत्री

केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए है और मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबी को ख़त्म करना है. गरीबी दूर करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है.

केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश की मुरैना लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना एवं मनरेगा में बजटीय आवंटन में कमी के विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लिए आवंटन बढ़ाकर इसे ‘जनोपयोगी’ बनाया है.

हालांकि तोमर ने यह भी कहा कि वह हमेशा इसे चलाए रखने के पक्षधर नहीं हैं क्योंकि यह योजना गरीबों के लिए है और मोदी सरकार का लक्ष्य गरीबी को खत्म करना है.

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े स्वयं सहायता समूहों का जिक्र करते हुए कहा कि इन स्वयं सहायता समूहों को करीब दो लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं और इन स्वयं सहायता समूहों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) सिर्फ 2.7 फीसदी है, जिसमें महिलाएं हैं.

तोमर ने कहा कि सदन को बैंकों में बड़े लोगों से जुड़े एनपीए के बारे में मालूम है, जबकि इन स्वयं सहायता समूहों का एनपीए सिर्फ 2.7 प्रतिशत है.

लोकसभा में ‘वर्ष 2019-20 के लिए ग्रामीण विकास तथा कृषि और किसान कल्याण मंत्रालयों के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों’ पर चर्चा का जवाब देते हुए तोमर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना हो, मनरेगा हो, ग्रामीण आवास योजना हो, कहीं बजट में कटौती नहीं की गई है. अगर जरूरत पड़ी है तब अतिरिक्त राशि आवंटित की गई है.’

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तीसरे चरण को हाल ही में कैबिनेट की मंजूरी मिली है. इसके तहत देश में 1.25 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जाएगा जिस पर करीब 80 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है और इन सड़कों का निर्माण 2024-25 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है?

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सड़क परियोजना के दूसरे चरण में 29 हजार किलोमीटर सड़क बना दी गई है. कई क्षेत्रों में पहले और दूसरे चरण में सड़कें बना दी गई हैं.

मनरेगा का जिक्र करते हुए तोमर ने कहा कि यह बहुत लोकप्रिय योजना है. एक समय था जब मनरेगा की बात आती थी तो ‘अमानत में ख्यानत’ और खामियों की चर्चा होती है. लेकिन अब ऐसा नहीं है.

उन्होंने कहा कि मनरेगा के लिए एक तरफ आवंटन निरंतर बढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा को जनोपयोगी भी बनाया गया है. उन्होंने कहा कि आज मनरेगा मजदूरों को 99 प्रतिशत भुगतान उनके खाते में किया जा रहा है. इसके लिए 3.62 करोड़ संरचनाओं को जियो प्रौद्योगिकी से जोड़ा जा चुका है.

तोमर ने कहा कि मनरेगा कृषि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है, लेकिन उसकी कुछ सीमा है जिसके अंदर में हम मनरेगा का इस्तेमाल करते हैं.

उन्होंने कहा, मनरेगा हमेशा चलता रहे, मैं इसका पक्षधर नहीं हूं. मनरेगा गरीबों के लिए है और हमारा लक्ष्य है कि गरीबी मुक्त भारत का निर्माण हो. गरीबी दूर करने के लिए सरकार प्रयास कर रही है.

कुछ सदस्यों द्वारा मनरेगा के आवंटन में कमी का आरोप लगाए जाने पर ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि मनरेगा आवंटन को बजट दर बजट देखना चाहिए.

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि पिछले बजट में आवंटन 55 हजार करोड़ रुपये था तथा जरूरत आई तो और पैसे लिए गए. इस बार 60 हजार करोड़ रुपये के आवंटन का प्रस्ताव किया गया. मनरेगा में आवंटन कम करने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

उन्होंने कहा कि 2018-19 में हमने एक करोड़ मकान बनाने का लक्ष्य रखा था और 1.53 करोड़ आवास बनाए गए.

तोमर ने कहा कि 2021-22 में 1.95 करोड़ मकान और बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए बजट की व्यवस्था होगी. यह 2022 तक सभी को आवास उपलब्ध कराने की प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है.

मंत्री के जवाब के बाद आरएसपी के एनके प्रेमचंदन ने अपना कटौती प्रस्ताव वापस ले लिया और सदन ने मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों को ध्वनिमत से पारित कर दिया.