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पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने कहा, कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने भारत के पक्ष में फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान से जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराने को कहा था. कुलभूषण जाधव जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.

कुलभूषण जाधव. (फोटो: पीटीआई)

कुलभूषण जाधव. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) के फैसले के बाद पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को लेकर पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने गुरुवार देर रात एक बयान जारी किया. बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान अपने देश के कानून के अनुसार भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा, इसके लिए कार्यप्रणाली पर काम हो रहा है.

मंत्रालय ने साथ ही कहा कि जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के तहत उनके अधिकारों से अवगत करा दिया गया है.

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘आईसीजे के फैसले के आधार पर कमांडर कुलभूषण जाधव को राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के अनुच्छेद 36 के पैराग्राफ 1(बी) के तहत उनके अधिकारों के बारे में सूचित कर दिया गया है.’

मंत्रालय ने कहा, ‘एक जिम्मेदार देश होने के नाते पाकिस्तान कमांडर कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान के कानूनों के अनुसार राजनयिक पहुंच मुहैया कराएगा, जिसके लिए कार्य प्रणालियों पर काम किया जा रहा है.’

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान को जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा पर प्रभावी तरीके से फिर से विचार करने और राजनयिक पहुंच प्रदान करने का बीते 17 जुलाई को आदेश दिया था. इसे भारत के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है.

गौरतलब है कि भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी जाधव (49) को 2016 में बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था और पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 2017 में जासूसी और आतंकवाद के आरोप में उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी.

गिरफ्तारी के बाद से अगले एक साल तक भारत ने जाधव के लिए इस्लामाबाद से राजनयिक पहुंच की अनुमति कई बार मांगी थी, जिन्हें पाकिस्तान ने अस्वीकार कर दिया.

इसके बाद भारत ने मई 2017 में आईसीजे का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद आईसीजे ने अंतिम फैसला आने तक जाधव की फांसी पर रोक लगा दी थी.

भारत ने जाधव को राजनयिक पहुंच नहीं देने के लिए पाकिस्तान पर वियना संधि और मानवाधिकार नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है.

अंतरराष्ट्रीय अदालत ने फरवरी में चार दिन की सुनवाई की थी जिसमें भारत और पाकिस्तान दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें रखी थीं.

भारत ने आईसीजे से जाधव की मौत की सज़ा को रद्द करने तथा उनकी तुरंत रिहाई का आदेश देने का अनुरोध किया था और कहा था कि पाकिस्तानी सैन्य अदालत का फैसला ‘हास्यास्पद सुनवाई’ पर आधारित है और वाजिब प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों तक को संतुष्ट नहीं कर पाता है.

भारत ने कहा कि जाधव को ईरान से अगवा किया गया था जहां उनके कारोबारी हित हैं.

अदालत के अध्यक्ष अब्दुलकावी अहमद यूसुफ की अगुवाई वाली 16 सदस्यीय पीठ ने एक के मुकाबले 15 मतों से कुलभूषण सुधीर जाधव को दोषी ठहराये जाने और उन्हें सुनाई गई सजा की प्रभावी समीक्षा करने और उस पर पुनर्विचार करने का आदेश दिया है.

कुलभूषण जाधव मामले का घटनाक्रम इस प्रकार हैं:

03 मार्च 2016: पाकिस्तान ने पूर्व भारतीय नौसैन्य अधिकारी कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया.

24 मार्च 2016: पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया कि जाधव ‘भारतीय जासूस’ हैं, जिन्हें बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया गया.

26 मार्च 2016: भारत सरकार ने दावा किया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ईरान में कार्गो कारोबार के मालिक जाधव को बलूचिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, जैसा कि पाकिस्तान ने दावा किया था.

29 मार्च 2016: नई दिल्ली ने जाधव के लिए इस्लामाबाद से राजनयिक पहुंच की अनुमति मांगी. अगले एक साल में उसने 16 ऐसे अनुरोध किए, जिन्हें पाकिस्तान ने अस्वीकार कर दिया.

10 अप्रैल 2017: एक पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने जाधव को ‘पाकिस्तान के खिलाफ जासूसी और विध्वंसक गतिविधियों’ में शामिल होने के लिए मौत की सजा सुनाई. भारत ने इस्लामाबाद को आगाह किया कि यह पूर्व-नियोजित हत्या का मामला है.

11 अप्रैल 2017: तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया कि जाधव को न्याय दिलाने के लिए भारत हर कदम उठाएगा.

14 अप्रैल 2017: भारत ने पाकिस्तान से आरोप-पत्र की प्रमाणित प्रति के साथ-साथ जाधव को मौत की सजा के फैसले की प्रति की मांग की और उनके लिए दूतावास संबंधी पहुंच देने की मांग की.

20 अप्रैल 2017: भारत ने आधिकारिक तौर पर कुलभूषण जाधव के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही के साथ-साथ मामले में अपील की प्रक्रिया का विवरण भी मांगा.

27 अप्रैल 2017: तत्कालीन विदेश मंत्री स्वराज ने पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज को पत्र लिखकर जाधव के परिवार के लिए वीजा का अनुरोध किया.

08 मई 2017: भारत ने पाकिस्तान सैन्य अदालतों के फैसले के खिलाफ हेग में अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाया.

09 मई 2017: आईसीजे ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी.

15 मई 2017: आईसीजे में जाधव के मामले पर भारत और पाकिस्तान में बहस हुई. नई दिल्ली ने मौत की सजा को तुरंत रद्द करने की मांग की और इस्लामाबाद पर आरोप लगाया कि वह गलत याचिका के जरिये विश्व निकाय के मंच का दुरुपयोग कर रहा है.

18 मई 2017: आईसीजे ने अपने अंतिम आदेश तक पाकिस्तान को सजा पर रोक लगाए रखने के लिए कहा.

26 दिसंबर 2017: पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार किए जाने और जासूसी का आरोप लगाए जाने के एक साल से अधिक समय बाद कुलभूषण जाधव अपनी पत्नी और मां से मिले.

17 अप्रैल 2018: भारत ने जाधव के मामले में आईसीजे में लिखित जवाब दायर किया.

17 जुलाई 2018: पाकिस्तान ने जाधव की दोषसिद्धि पर आईसीजे में अपना दूसरा प्रतिवाद दायर किया.

22 अगस्त 2018: जाधव के मामले की सुनवाई के लिए आईसीजे ने फरवरी 2019 का वक्त निर्धारित किया.

21 नवंबर 2018: तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कुलभूषण जाधव तक राजनयिक पहुंच देने की मांग की.

18 फरवरी 2019: कुलभूषण जाधव के मामले में चार दिन की सुनवाई हुई.

19 फरवरी 2019: भारत ने आईसीजे से आग्रह किया कि वह जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को रद्द करे और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दे.

20 फरवरी 2019: भारत ने पाकिस्तान की कुख्यात सैन्य अदालतों के कामकाज पर सवाल उठाए और आईसीजे से जाधव की मौत की सजा को निरस्त करने का आग्रह किया.

21 फरवरी 2019: पाकिस्तान ने आईसीजे से जाधव को राहत देने के लिए भारत के दावे को ‘खारिज या अस्वीकार्य’ घोषित करने के लिए कहा.

04 जुलाई 2019: आईसीजे ने घोषणा की कि वह 17 जुलाई को कुलभूषण जाधव मामले में फैसला सुनाएगा.

17 जुलाई 2019: भारत के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर आईसीजे ने फैसला दिया कि पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव के लिए मौत की सजा की समीक्षा करनी चाहिए और उसे राजनयिक पहुंच प्रदान करनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)