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सोनभद्र नरसंहार: हिरासत में रखी गईं प्रियंका गांधी से पीड़ित आदिवासी परिवारों के 12 सदस्य मिले

सोनभद्र ज़िले के उभा गांव में 17 जुलाई को ज़मीन विवाद को लेकर हुई हिंसा में दस आदिवासियों की मौत हो गई थी और करीब 24 आदिवासी घायल हुए थे. शुक्रवार को पीड़ितों से मिलने जा रहीं प्रियंका गांधी को मिर्ज़ापुर में रोकने के बाद हिरासत में ले लिया गया था.

Mirzapur: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra consoles a family member of Sonbhadra massacre victim, who had travelled to Chunar Fort to meet her after the former was stopped from proceeding to Sonbhadra, in Mirzapur, Saturday, July 20, 2019. Aleast 10 people were killed in a shootout on Wednesday over a land dispute in Sonbhadra. (PTI Photo)(PTI7_20_2019_000039B)

बीते 17 जुलाई को उत्तर प्रदेश के सोनभद्र नरसंहार के पीड़ितों के परिजनों से मिलतीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

मिर्जापुर/लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के हत्याकांड के शिकार हुए पीड़ित परिवारों के 12 सदस्यों ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मिर्जापुर स्थित चुनार गेस्ट हाउस परिसर में मुलाकात की.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजय राय ने बताया कि पीड़ित परिवारों के 12 सदस्यों ने कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से चुनार गेस्ट हाउस के परिसर में मुलाकात की है.

प्रियंका गांधी ने पीड़ित आदिवासियों के परिजनों से मुलाकात का एक वीडियो ट्वीट किया है. इसमें वह शोकाकुल पीड़ित परिवार वालों से बात कर रही हैं.

वहीं, एक अन्य वीडियो में वह शोकाकुल पीड़ित परिवार वालों के आंसू पोंछते और पानी पिलाते दिखीं. वह लगातार उन्हें सांत्वना दे रही थीं.

पीड़ित परिवार के लोगों से मुलाकात के बाद प्रियंका गांधी ने कहा, ‘उनसे (सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों) मिलने का मेरा उद्देश्य पूरा हो गया है. मैं अभी भी हिरासत में हूं. देखते हैं प्रशासन क्या कहता है. कांग्रेस पार्टी मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये की मुआवजा राशि देगी.’

वहीं, प्रियंका से मुलाकात के बाद सोनभद्र हत्याकांड के एक पीड़ित के परिवार के एक सदस्य ने कहा, ‘हमें पता चला कि प्रियंका दीदी हमसे मिलने आई हैं लेकिन प्रशासन ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और ऐसी जगह ले गए हैं जहां कोई उनसे मुलाकात नहीं कर सकता है. इसलिए हमने खुद चुनार आकर उनसे मुलाकात करने का फैसला किया.’

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, पीड़ित आदिवासियों के परिजनों से मुलाकात कर चुकीं प्रियंका गांधी आज शाम को दर्शन करने के लिए वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर जाएंगी.

इससे पहले, पीड़ितों के परिवारों से मिलने जा रहे कुछ अन्य कांग्रेसी नेताओं दीपेंद्र सिंह हूडा, मुकुल वासनिक, राज बब्बर, रतनजीत प्रताप नारायण सिंह, जितिन प्रसाद और राजीव शुक्ला को भी पुलिस वाराणसी हवाईअड्डे पर रोक लिया. हालांकि, थोड़ी देरे बाद राजीव शुक्ला ने बताया कि पुलिस ने उन्हें चुनार तक जाने की इजाजत दे दी, जहां पर फिलहाल प्रियंका गांधी को हिरासत में रखा गया है.

हालांकि, इस बीच मिर्जापुर के जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने कहा, ‘प्रियंका गांधी वाड्रा को गिरफ्तार नहीं किया गया था. उन्हें केवल सोनभद्र जाने से रोका गया था. आज भी वह सोनभद्र छोड़कर कहीं भी जा सकती हैं.’

इससे पहले, प्रियंका ने रात चुनार गेस्ट हाउस में ही गुजारी. उन्होंने सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिले बिना लौटने के स्थानीय प्रशासन के अनुरोध को ठुकरा दिया था.

प्रियंका और अधिकारियों के बीच रात करीब 12:00 बजे से 1:15 बजे तक चली दूसरे दौर की बातचीत भी नाकाम रही और प्रियंका तथा उनके सैकड़ों समर्थक चुनार गेस्ट हाउस में ही डटे रहे.

प्रियंका ने देर रात एक के बाद कई ट्वीट कर कहा, ‘उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी जोन के अपर पुलिस महानिदेशक बृजभूषण, वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल और पुलिस उप महानिरीक्षक को मुझसे यह कहने के लिए भेजा कि मैं यहां पीड़ितों से मिले बगैर वापस चली जाऊं . ना मुझे हिरासत में रखने का आधार बताया गया है और ना ही कोई कागज दिए गए.’

उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि मेरे वकीलों के मुताबिक मेरी गिरफ्तारी हर तरह से गैरकानूनी है. मैंने स्पष्ट कर दिया है कि मैं किसी धारा का उल्लंघन करने नहीं बल्कि पीड़ितों से मिलने आई हूं. मैंने सरकार के दूतों से कहा है कि मैं उनसे मिले बगैर वापस नहीं जाऊंगी.

प्रियंका ने एक वीडियो भी ट्वीट किया है जिसमें वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी रात करीब 1:15 बजे उनसे बैठक बेनतीजा खत्म होने के बाद वापस जाते दिख रहे हैं.

प्रियंका और अन्य समर्थकों के साथ चुनार गेस्ट हाउस में मौजूद कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने शनिवार को ‘भाषा’ को बताया कि सरकार बिजली और पानी की आपूर्ति बंद करके उन्हें गेस्ट हाउस छोड़ने पर मजबूर कर रही है लेकिन उनके कदम पीछे नहीं हटेंगे .

उन्होंने बताया कि पूरी रात बिजली नहीं आई. इस दौरान प्रियंका सुबह करीब 4:30 बजे तक कार्यकर्ताओं के साथ बैठी रहीं. सरकार ने गेस्ट हाउस में जलपान का कोई इंतजाम नहीं किया. स्थानीय नागरिक और पार्टी कार्यकर्ता ही कुछ प्रबंध कर रहे हैं.

मालूम हो कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को सोनभद्र में हुए सामूहिक हत्याकांड के पीड़ित परिवारों से मिलने जाने के दौरान शुक्रवार को मिर्जापुर के अदलहाट क्षेत्र में प्रशासन ने रोक कर अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 151 के तहत हिरासत में ले लिया था. बाद में उन्हें चुनार गेस्ट हाउस लाया गया था .

प्रशासन के आला अधिकारियों ने उन्हें सोनभद्र में दफा 144 लागू होने की बात कहते हुए वापस लौट जाने को कहा मगर प्रियंका ने उन्हें जवाब दिया कि वह अकेली ही सोनभद्र जाकर पीड़ितों से मिलने को तैयार हैं. ऐसे में निषेधाज्ञा का तनिक भी उल्लंघन नहीं होगा. उन्होंने साफ कहा कि वह उनसे मिले बगैर वापस नहीं जाएंगी.

इससे पहले प्रियंका ने ट्वीट कर कहा, ‘मैं नरसंहार का दंश झेल रहे गरीब आदिवासियों से मिलने, उनकी व्यथा-कथा जानने आयी हूँ. जनता का सेवक होने के नाते यह मेरा धर्म है और नैतिक अधिकार भी. उनसे मिलने का मेरा निर्णय अडिग है.’

उन्होंने दावा किया, ‘उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा मुझे पिछले 9 घंटे से गिरफ़्तार करके चुनार किले में रखा हुआ है. प्रशासन कह रहा है कि मुझे 50,000 की जमानत देनी है अन्यथा मुझे 14 दिन के लिए जेल की सज़ा दी जाएगी, मगर वे मुझे सोनभद्र नहीं जाने देंगे ऐसा उन्हें ‘ऊपर से ऑर्डर है’.’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘मैंने न कोई क़ानून तोड़ा है न कोई अपराध किया है. मैंने सुबह से स्पष्ट किया था कि प्रशासन चाहे तो मैं अकेली उनके साथ पीड़ित परिवारों से मिलने आदिवासियों के गाँव जाने को तैयार हूँ या प्रशासन जिस तरीके से भी मुझे उनसे मिलाना चाहता है मैं तैयार हूँ. इसके बावजूद उप्र सरकार ने यह तमाशा किया हुआ है. जनता सब देख रही है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं इस संदर्भ में जमानत को अनैतिक मानती हूँ और इसके लिए तैयार नहीं हूँ. मेरी साफ माँग है कि मुझे पीड़ित आदिवासियों से मिलने दिया जाय. सरकार को जो उचित लगे वह करे.’

प्रियंका ने यह भी कहा कि ‘अगर सरकार पीड़ितों से मिलने के अपराध के लिए मुझे जेल में डालना चाहें तो मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार हूँ.’

प्रियंका की गिरफ्तारी ‘असंवैधानिक’ है, लोकतंत्र को तानाशाही में न बदलें: वाड्रा

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में हिरासत में लिए जाने पर उनके पति रॉबर्ट वाड्रा ने शुक्रवार को राज्य सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि सरकार को तत्काल उन्हें रिहा करना चाहिए और लोकतंत्र को तानाशाही में नहीं बदलने देना चाहिए.

वाड्रा ने ट्वीट किया, ‘जिस तरह से मेरी पत्नी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को गिरफ्तार किया गया, वह पूरी तरह से असंवैधानिक है. गिरफ्तारी के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया.’ उ‍न्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी तरह से कानून का दुरुपयोग है.

वाड्रा ने कहा, ‘क्या मृतक के परिवार से मिलने जाना अपराध है.’ उन्होंने कहा, ‘क्या यह सरकार सच के साथ खड़ी सभी आवाज को दबाना चाहती है. सरकार को तत्काल उन्हें रिहा करना चाहिए और लोकतंत्र को लोकतंत्र ही बने रहने देना चाहिए न कि इसे तानाशाही में बदलना चाहिए.’

विफलता छिपाने के लिए किसी को सोनभद्र नहीं जाने दे रही यूपी सरकार : मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार अपनी विफलता को छिपाने के लिए धारा 144 का सहारा लेकर किसी को सोनभद्र नहीं जाने दे रही है.

मायावती ने ट्वीट किया, ‘यूपी सरकार जान-माल की सुरक्षा व जनहित के मामले में अपनी विफलता को छिपाने के लिए धारा 144 का सहारा लेकर किसी को सोनभद्र जाने नहीं दे रही है.’

उन्होंने कहा, ‘फिर भी उचित समय पर वहां जाकर पीड़ितों की यथासंभव मदद कराने का बसपा विधानमण्डल दल को निर्देश दिया गया है. इस नरसंहार का मुख्य कारण सरकारी लापरवाही है.’

मायावती ने कहा कि सोनभद्र में आदिवासी समाज का उत्पीड़न व शोषण, उनकी जमीन से बेदखली व अब नरसंहार उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था के मामले में विफल होने का पक्का प्रमाण है.

उन्होंने कहा, ‘यूपी ही नहीं, देश की जनता भी इन सबसे अतिचिंतित है जबकि बसपा की सरकार में एसटी तबके के हितों का खास ख्याल रखा गया.’

सोनभद्र जा रहे तृणमूल प्रतिनिधिमंडल को वाराणसी हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया

उत्तरप्रदेश के सोनभद्र में हुए नरसंहार के पीडि़त परिवारों से मिलने जा रहे तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को शनिवार सुबह वाराणसी हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया.

तृणमूल नेता डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट कर बताया कि पार्टी के संसदीय प्रतिनिधिमंडल को वाराणसी हवाई अड्डे पर हिरासत में ले लिया गया है.

उन्होंने बताया कि एडीएम और एसपी ने हमें नहीं बताया कि किस धारा के तहत हमें हिरासत में लिया गया है. हमने प्रशासन से कहा कि हम सहयोग करेंगे लेकिन हम घायलों से मिलना चाहते हैं और उसके बाद सोनभद्र जाकर पीडित परिवार वालों से मिलना चाहते हैं ताकि हम शोकाकुल परिवार वालों को ढाढस बंधा सकें. तृणमूल प्रतिनिधिमंडल सुबह ही वाराणसी पहुंचा.

मुख्य आरोपी का रिश्तेदार गिरफ्तार

पुलिस ने इस सामूहिक हत्याकांड के मामले में 29 लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों को पकड़ने के लिए छापेमारी की जा रही है. इस मामले में 61 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, जिसमें 50 अज्ञात हैं.

एक स्थानीय व्यक्ति लल्लू सिंह की याचिका पर गांव के मुखिया यज्ञदूत व उसके भाई और अन्य पर भी एससी/एसटी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि यह घटना सुदूर घोरावल के उभा गांव की है. गांव के प्रधान ने दो साल पहले 90 बीघा जमीन खरीदी थी. वह अपने कुछ सहयोगियों के साथ जमीन पर कब्जा करने गया था. इसका गांव वालों ने विरोध किया था. परिणामस्वरूप, प्रधान के लोगों ने फायरिंग कर दी जिसमें तीन महिलाओं सहित दस गांव वालों की मौत हो गई.

पुलिस अधीक्षक सलमान ताज पाटिल ने शनिवार को बताया कि यज्ञदत्त के निकट के रिश्तेदार कोमल को गिरफ्तार किया गया है. पाटिल ने बताया कि कोमल को वाराणसी में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. वह भदोही रेलवे स्टेशन का अधीक्षक है.

उन्होंने कहा कि पीड़ितों ने बताया था कि हत्याकांड के समय कोमल घटनास्थल पर मौजूद था और मुख्य आरोपी की तरफ से उसने भी गोली चलाई थी.