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शैक्षणिक कारणों का हवाला देते हुए प्रताप भानु मेहता ने अशोका विश्वविद्यालय से इस्तीफ़ा दिया

हरियाणा के सोनीपत स्थित अशोका विश्वविद्यालय के फैकल्टी और छात्रों को लिखे अपने पत्र में मशहूर समाजिक चिंतक प्रताप भानु मेहता ने कहा कि उनके इस्तीफ़ा देने के समय को लेकर सवाल उठेंगे लेकिन कम से कम व्यवधान के लिए वे सत्र की शुरुआत से पहले पद छोड़ना चाहते थे.

प्रताप भानु मेहता. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब)

प्रताप भानु मेहता. (फोटो साभार: यूट्यूब ग्रैब)

नई दिल्ली: मशहूर राजनीतिक विज्ञानी प्रताप भानु मेहता ने हरियाणा के सोनीपत स्थित अशोका विश्वविद्यालय के कुलपति के पद से इस्तीफा दे दिया है. विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों को भेजे गए अपने पत्र के अनुसार, वे पूर्ण रूप से अपने  शैक्षणिक जीवन में वापस लौटना चाहते हैं और उनका इस्तीफा 1 अगस्त से प्रभावी हो जाएगा.

पत्र में मेहता कहते हैं कि पठन-पाठन की रूचियों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का संतुलन बनाने में उन्हें परेशानी हो रही थी क्योंकि दोनों के बीच ‘तनाव’ था.

उन्होंने लिखा, ‘मेरे पास असीमित आजादी है लेकिन समय बहुत कम. यह समय एक बार फिर से पढ़ाई-लिखाई को देने का है. हमारे समय की व्यावहारिक और सैद्धांतिक चुनौतियों के खाली जगह को भरना चाहता हूं और कई अधूरे पड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए वापस लौटना चाहता हूं.’

उन्होंने कहा, ‘समकालीन दुनिया में हमारी कई राजनीतिक और मनोविज्ञानी अवधारणाएं अधूरी रह गई हैं और मैं महसूस करता हूं कि खुद को एक बार फिर से शैक्षणिक रूप से तैयार करूं. इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है.’

उन्होंने यह भी कहा कि वे एक शिक्षक की तरह अशोका विश्वविद्यालय से सहयोगी के रूप में जुड़े रहेंगे. उन्होंने स्वीकार किया कि उनके अचानक लिए गए इस फैसले से जरूर कुछ सवाल उठेंगे. हालांकि उन्होंने कहा कि वह इसकी बदलाव की घोषणा सत्र शुरू होने से पहले करना चाहते थे ताकि कम से कम व्यवधान पैदा हो.

मेहता साल 2017 में विश्वविद्यालय के कुलपति बनाए गए थे. इससे पहले वे सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अध्यक्ष और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ के प्रोफेसर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके थे.

वहीं, एक बयान जारी करते हुए अशोका विश्वविद्यालय ने मेहता के इस्तीफे के बाद अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर मालबिका सरकार को विश्वविद्यासलय की कुलपति नियुक्त करने की घोषणा की. फिलहाल वह अशोका विश्वविद्यालय मुख्य सलाहकार (शैक्षणिक) हैं. इससे पहले वे फैकल्टी एंड रिसर्च की डीन थीं. अब वह अगले चार साल तक विश्वविद्यालय से जुड़ी रहेंगी.

सरकार प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता की पूर्व कुलपति और अंग्रेजी साहित्य की प्रोफेसर हैं. इससे पहले, वह यादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता में अंग्रेजी विभाग की प्रमुख थीं और यादवपुर विश्वविद्यालय परिषद और विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक निकायों की सदस्य रह चुकी हैं.

मेहता से पहले विश्वविद्यालय के कुलपति रहे रूद्रांग्शु मुखर्जी ने कहा कि सरकार उस टीम का हिस्सा थीं जिसने विश्वविद्यालय को भारत की सर्वश्रेष्ठ उदार कला और विज्ञान विश्वविद्यालयों में से एक के रूप में आकार दिया है.

वहीं, अपनी नियुक्ति पर सरकार ने कहा, अशोक विश्वविद्यालय को आज अकादमिक उत्कृष्टता, वैश्विक दृष्टिकोण, शिक्षा में नवाचारों और विचार की कई धाराओं का संगम होने के कारण पहचाना और सम्मानित किया जाता है. मैं इस यात्रा का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रही हूं. मैं इसे विश्व स्तर का विश्वविद्यालय बनाने के लिए फैकल्टी और छात्रों के साथ काम करने को उत्साहित हूं.

(प्रताप भानु मेहता का पूरा पत्र पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)