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व्यापमं घोटाले को लेकर सीबीआई का रवैया ढीला-ढाला, ‘बड़ी मछलियां’ अब भी आज़ाद: ह्विसिल ब्लोअर

ह्विसिल ब्लोअरों ने व्यापमं घोटाले को लेकर मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर असंतोष जताते हुए कहा है घोटाले से जुड़े करीब 50 लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के अधिकांश मामलों में सीबीआई की जांच से कोई खास बात सामने नहीं आई है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

इंदौर: मध्य प्रदेश में साल 2013 में सामने आए व्यापमं घोटाले को लेकर ह्विसिल ब्लोअरों ने सीबीआई की जांच और मध्य प्रदेश सरकार के रवैये पर गहरा असंतोष जताया है.

ह्विसिल ब्लोअरों का कहना है कि सरकारी प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली से जुड़े इस घोटाले को ठंडे बस्ते से बाहर निकालकर इसकी बारीकी से छानबीन कराई जानी चाहिए, क्योंकि मामले की कई ‘बड़ी मछलियां’ अब भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं.

व्यापमं घोटाले के ह्विसिल ब्लोअर आनंद राय ने बीते बुधवार को कहा, ‘व्यापमं घोटाले से किसी न किसी तरह जुड़े करीब 50 लोगों की बीते छह सालों में संदिग्ध हालात में मौत हो चुकी है. इन मौतों के अधिकांश मामलों में सीबीआई की जांच से कोई खास बात सामने नहीं आई है. लगता है कि सीबीआई जल्द से जल्द इन मामलों की जांच बंद करना चाहती है, जबकि कई बड़ी मछलियां अब भी आजाद हैं.’

उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही राज्य की एक विशेष अदालत ने मेडिकल छात्रा नम्रता डामोर की संदिग्ध हालात में मौत के बहुचर्चित मामले को खत्म करने की सीबीआई की अर्जी को खारिज कर दिया. साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसी को आदेश दिया है कि वह इस प्रकरण की दोबारा जांच कर अंतिम रिपोर्ट सौंपे.

एमबीबीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा नम्रता का शव उज्जैन जिले में रेलवे पटरी पर साल 2012 में मिला था और उसकी मौत को व्यापमं घोटाले से जोड़कर देखा जाता है.

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के साल 2015 में दिए गए आदेश के तहत व्यापमं घोटाले से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई कर रही है. हालांकि, ह्विसिल ब्लोअरों का दावा है कि इस घोटाले से जुड़ी कई शिकायतें प्रदेश सरकार के दफ्तरों में धूल खा रही हैं.

इस साल जनवरी में व्यापमं घोटाला मामले में सीबीआई ने मध्‍य प्रदेश के पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा समेत 8 आरोपियों को क्लीन चिट दे दी. शर्मा के अलावा अन्य आरोपियों में उनके विशेष अधिकारी (ओएसडी) रहे ओमप्रकाश शुक्ला, आईजी स्टाम्प इंद्रजीत कुमार जैन, तरंग शर्मा, भरत मिश्रा, मोहन सिंह ठाकुर, सुरेंद्र कुमार पटेल, संतोष सिंह उर्फ राजा तोमर शामिल हैं. सीबीआई ने कहा इन आठ आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं.

सीबीआई ने 26 आरोपियों के खिलाफ 78 पेज का आरोप-पत्र पेश किया. इनमें दो आरोपियों की पहले ही मौत हो चुकी है.

राय ने कहा, ‘प्रदेश में दिसंबर 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद हम (ह्विसिल ब्लोअर) गृहमंत्री बाला बच्चन से तीन बार मिल चुके हैं. लेकिन व्यापमं घोटाले से जुड़ी सैकड़ों शिकायतों पर लंबित जांच को लेकर अब तक कोई ठोस फैसला नहीं किया गया है.’

व्यापमं के एक अन्य ह्विसिल ब्लोअर आशीष चतुर्वेदी ने भी आरोप लगाया कि व्यापमं घोटाले की जांच को लेकर सीबीआई का रवैया ढीला-ढाला रहा है.

उन्होंने कहा, ‘सीबीआई ने व्यापमं घोटाले के मामलों की तह तक जाकर जांच नहीं की है.’

चतुर्वेदी ने व्यापमं घोटाले की जांच को लेकर प्रदेश सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार को व्यापमं घोटाले की अच्छी तरह जांच करानी ही चाहिए. कांग्रेस ने शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली तत्कालीन भाजपा सरकार के खिलाफ जिन मुद्दों के दम पर नवंबर 2018 का विधानसभा चुनाव जीता, उनमें व्यापमं घोटाले की गहराई से जांच कराने का वादा अहम था.’

चतुर्वेदी के मुताबिक व्यापमं घोटाले से जुड़ी सैकड़ों शिकायतें मध्य प्रदेश पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के पास लंबित हैं. इनका फौरन संज्ञान लेते हुए व्यापमं घोटाले में नई प्राथमिकियां दर्ज की जानी चाहिए.

मध्य प्रदेश के विधि एवं विधायी कार्य मंत्री पीसी शर्मा ने मंगलवार को एक बयान में कहा था कि राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल के व्यापमं घोटाले में यदि नए तथ्य सामने आते हैं, तो इस मामले की नए सिरे से दोबारा जांच कराई जाएगी. शर्मा ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह द्वारा 21 जुलाई को प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को व्यापमं घोटाले के बारे में लिखे पत्र के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही.

इस पत्र में दिग्विजय ने कहा है कि व्यापमं घोटाले के ‘मुख्य आरोपियों’ को कानून के दायरे में लाकर उन्हें सजा दिलाई जाए और निर्दोष छात्र-छात्राओं के साथ इंसाफ किया जाए.

मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल अथवा व्यापमं राज्य में कई प्रवेश परीक्षाओं के संचालन के लिए जिम्मेदार राज्य सरकार द्वारा गठित एक स्व-वित्तपोषित और स्वायत्त निकाय था. इसके द्वारा राज्य के शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश, सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं.

आरोप है कि बिचौलियों, उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं राजनेताओं की मिलीभगत से इन प्रवेश परीक्षाओं और नौकरियों में अपात्र परीक्षार्थियों और उम्मीदवारों से रिश्वत लेकर प्रवेश दिया गया या बड़े पैमाने पर अयोग्य लोगों की भर्तियां की गईं.

व्यापमं द्वारा आयोजित प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली सामने आने के बाद तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार ने इसका आधिकारिक नाम बदलकर मध्य प्रदेश प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड (एमपीपीईबी) कर दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)