राजनीति

चौथी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने येदियुरप्पा

कर्नाटक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष येदियुरप्पा ने कहा कि वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से सलाह मशविरा करने के बाद कैबिनेट के सदस्यों पर फैसला करेंगे.

Bengaluru: BJP Karnataka President and Chief Minister-designate BS Yeddyurappa leaves after paying tribute to Kargil war martyrs on the 20th anniversary of Kargil Vijay Diwas, in Bengaluru, Friday, July 26, 2019. (PTI Photo/Shailendra Bhojak) (PTI7_26_2019_000094B)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा. (फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरु: भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार शाम कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. मुख्यमंत्री के रूप में यह उनका चौथा कार्यकाल होगा. राजभवन में राज्यपाल वजूभाई वाला ने 76 वर्षीय येदियुरप्पा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. येदियुरप्पा ने अभी अकेले ही शपथ ली है.

शुक्रवार की सुबह येदियुरप्पा ने राज्यपाल से मुलाकात करके सरकार का दावा पेश किया और उनसे उन्हें शुक्रवार को ही पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाने का अनुरोध किया. इसके बाद राज्यपाल ने उन्हें सरकार बनाने का न्योता दिया.

शपथ ग्रहण समारोह से पहले येदियुरप्पा ने कहा कि वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से सलाह मशविरा करने के बाद कैबिनेट के सदस्यों पर फैसला करेंगे.

येदियुरप्पा ने चौथी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है. पिछली बार वह मई 2018 विधानसभा चुनावों के बाद मुख्यमंत्री बने थे लेकिन वह पद पर तीन दिन ही टिक पाए.

दरअसल वह बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे थे. उन्होंने इस आधार पर सरकार बनाने का दावा किया था कि उनकी पार्टी 225 सदस्यीय विधानसभा में 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है.

कर्नाटक में उभरे सियासी संकट के बीच एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार बीते 23 जुलाई को गिरने के तीन दिन बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद शपथ ली.

दरअसल कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के 15 विधायकों के अचानक इस्तीफा देने के बाद कर्नाटक में सियासी संकट खड़ा हो गया था. इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा में विश्वास मत का प्रस्ताव पेश किया था, जिसमें गठबंधन सरकार को छह मतों से विश्वास मत हासिल करने में असफल साबित हुई थी.

विधानसभा में 99 विधायकों ने विश्वास मत प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया है, जबकि 105 सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ मत दिया था, जिसके बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिर गई थी.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने शुक्रवार को कहा कि उनके शासन के दौरान प्रतिशोध की राजनीति नहीं होगी और वह विपक्ष को साथ लेकर चलेंगे.

कांग्रेस और जेडीएस ने कहा, शपथ ग्रहण संविधान के ख़िलाफ़

इधर, कांग्रेस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना बहुमत के सरकार बनाने के येदियुरप्पा को मौका देने के लिए कर्नाटक के राज्यपाल पर सवाल उठाए हैं.

कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने आरोप लगाया, ‘भाजपा के 105 सदस्य हैं, जो 224 सदस्यों वाली विधानसभा में आधी से भी कम है. अगर संविधान का पालन किया जाए तो भाजपा सरकार नहीं बना सकती.’

फिलहाल भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है.

प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा है, ‘भ्रष्टाचार के प्रतीक और जेल में रह चुके बीएस येदियुरप्पा ने लोकतंत्र को नष्ट करने और सत्ता में आने के लिए (विधायकों की) खरीद-फरोख्त के अपने सर्वश्रेष्ठ कौशल का इस्तेमाल किया.’

ट्वीट में कहा गया है, ‘कर्नाटक के लोगों को 2008-2011 के बीच मुख्यमंत्री के तौर उनका विनाशकारी कार्यकाल याद है.’

कांग्रेस ने कहा है, ‘कर्नाटक भाजपा के लिए राज्य विधानसभा एक प्रयोगशाला बन गई है और भाजपा समर्थित राज्यपाल असंवैधानिक तरीकों से सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं. संविधान के किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल ऐसी पार्टी को सरकार बनाने की अनुमति दे सकते हैं जिसके पास बहुमत नहीं है?’

वहीं जेडीएस ने ट्वीट कर कहा है, ‘सदन के विधायकों की संख्या 222 है (तीन विधायकों के अयोग्य घोषित होने के बाद) और सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या 112 है. हालांकि बीएस येदियुरप्पा ने यह कहते हुए सरकार बनाने का दावा पेश किया कि उनके पास 105 विधायक हैं.’

पार्टी ने कहा कि येदियुरप्पा को शपथ लेने की मंजूरी देने का राज्यपाल का फैसला लोकतंत्र के विरुद्ध है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)