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सरकार दूसरे चरण में 20-25 हवाई अड्डों का निजीकरण करेगी: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया चेयरमैन

सरकारी-निजी भागीदारी के तहत इस साल फरवरी ने सबसे ऊंची बोली लगाकर अडानी समूह ने लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी के हवाई अड्डों को ठेका लिया था.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के चेयरमैन गुरु प्रसाद महापात्र ने बीते शुक्रवार को कहा कि इस साल फरवरी में छह प्रमुख हवाई अड्डों के निजीकरण के बाद सरकार दूसरे चरण में देश के 20-25 और हवाई अड्डों का निजीकरण करेगी.

उन्होंने उम्मीद जताई कि इन हवाई अड्डों के प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी हवाई अड्डों के दिलचस्पी लेने की भी उम्मीद है.

पिछले साल नवंबर में केंद्र की मोदी सरकार ने सरकारी-निजी भागीदारी के तहत परिचालन, प्रबंधन और विकास के लिए लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर, मंगलुरु, तिरुवनंतपुरम और गुवाहाटी के हवाई अड्डों के निजीकरण का फैसला किया गया था.

फरवरी में अडानी समूह ने सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सभी छह हवाई अड्डों को विकसित और उनका प्रबंधन करने का ठेका हासिल किया था.

महापात्र ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘हमने छह हवाई अड्डों का निजीकरण किया है; अगले चरण में 20- 25 और हवाई अड्डों के निजीकरण की योजना है.’

उन्होंने कहा कि एएआई सालाना 15 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही वाले इन हवाई अड्डों के नामों पर फैसला करेगी और अपनी सिफारिश जल्द ही नागर विमानन मंत्रालय को भेजेगी. महापात्र ने कहा, ‘वे ही अंतिम निर्णय करेंगे.’

उल्लेखनीय है कि हाल में महापात्र का तबादला वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले उद्योग संवर्धन एवं आतंरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) में हो गया है.

महापात्र ने कहा कि वह डीपीआईआईटी के सचिव का कार्यभार एक अगस्त को संभालेंगे.

निजीकरण के दूसरे दौर की योजना का विवरण देते हुए उन्होंने कहा, ‘हमने निजी क्षेत्र के निवेश के लिहाज से आकर्षक हवाई अड्डों का आकलन करने के लिए एक परामर्शदाता की नियुक्ति की है.’

उन्होंने कहा, ‘कोई भी बोली लगा सकता है. अपार संभावनाएं हैं. (पहले दौर की सफलता के साथ) मैं आश्वस्त हूं कि अगले दौर की निजीकरण प्रक्रिया के दौरान कई विदेशी हवाई अड्डे हिस्सा लेंगे.’

मालूम हो कि इससे पहले अहमदाबाद, तिरुवनंतपुरम, लखनऊ, मेंगलुरु, जयपुर और गुवाहाटी हवाई अड्डों के परिचालन के लिए अडानी समूह ने सबसे ऊंची बोली लगाई.

समूह को यह ठेका 50 साल तक के लिए मिला है. उसने सबसे ऊंची बोली लगाई थी. एएआई ने विजेता का चुनाव ‘मासिक प्रति यात्री शुल्क’ के आधार पर किया था.

तब एएआई ने बताया था कि प्रति यात्री शुल्क के आधार पर अडाणी समूह ने अहमदाबाद के लिए 177 रुपये, जयपुर के लिए 174 रुपये, लखनऊ के लिए 171 रुपये, तिरुवनंतपुरम के लिए 168 रुपये, मेंगलुरु के लिए 115 रुपये और गुवाहाटी के लिए 160 रुपये की बोली लगाई. यह राशि अडाणी समूह इन हवाई अड्डों का परिचालन मिलने पर एएआई को देगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)