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भारत में राजनीतिक शरण लेने आए मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति को स्वदेश वापस भेजा गया

तमिलनाडु की तूतीकोरिन पुलिस ने बताया था कि मालदीव के नेता अहमद अदीब अब्दुल गफूर को भारत में प्रवेश की इसलिए इजाजत नहीं दी गई, क्योंकि उनके पास वैध दस्तावेज़ भी नहीं था.

मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब अब्दुल गफूर. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब अब्दुल गफूर. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

तूतीकोरिन/नई दिल्ली: भारत में राजनीतिक शरण के लिए मालवाहक जहाज से बीते एक अगस्त को भारत पहुंचे मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति अहमद अदीब अब्दुल गफूर को उनके देश वापस भेज दिया गया है. वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण अधिकारियों ने उन्हें जहाज से उतरने की अनुमति नहीं दी.

तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘मालदीव के नेता आधी रात को तूतीकोरिन से रवाना हो गए.’

अदीब बीते एक अगस्त को एक मालवाहक जहाज से चालक दल के नौ सदस्यों के साथ तूतीकोरीन पहुंचे थे, लेकिन उन्हें जहाज से उतरने की इजाजत नहीं दी गई.

पुलिस ने बताया कि अदीब उसी जहाज से स्वदेश लौट गए. तटरक्षक कर्मियों ने जहाज को भारतीय समुद्री क्षेत्र से जाते हुए देखा था.

उन्होंने बताया कि विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों ने जहाज पर ही उनसे पूछताछ की.

अदीब का प्रतिनिधित्व कर रहे ब्रिटेन के एक वकील ने बताया कि मालदीव के नेता ने भारत में राजनीतिक शरण मांगी थी क्योंकि उन्हें अपने देश में जान का खतरा है.

नई दिल्ली स्थित आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मालदीव के नेता को भारत में प्रवेश की इसलिए इजाजत नहीं दी गयी क्योंकि वह निर्धारित प्रवेश बिंदु से प्रवेश नहीं कर रहे थे और उनके पास वैध दस्तावेज भी नहीं था.

उन्होंने बताया कि उन्हें निर्वासित किए जाने से संबंधित खबरें गलत हैं.

सूत्र ने कहा, ‘चूंकि वह भारत में नहीं हैं इसलिए एक बार फिर हम यही कहना चाहेंगे कि उन्हें हिरासत में लिए जाने या भारत में गिरफ्तार किए जाने संबंधित खबरें गलत हैं.’

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2015 में मालदीव के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन की हत्या की साजिश के आरोप में पूर्व उप राष्ट्रपति अहमद अदीब अब्दुल गफूर को उनके पद से हटाकर गिरफ्तार कर लिया गया था.

साल 2016 में इस आरोप को लेकर मालदीव की अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए 15 साल की सजा सुनाई थी. हालांकि मई 2019 में उनकी सजा माफ कर दी गई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)