राजनीति

क्या ज़ोर जबरदस्ती आधारित राष्ट्रवाद से किसी समस्या का समाधान हुआ है: पी. चिदंबरम

जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने के फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने कहा कि अगर पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल इस फैसले को विश्वासघात बता रहे हैं तो कल्पना कीजिए जम्मू कश्मीर के लाखों आम लोग क्या सोचते होंगे.

पी. चिदंबरम. (फोटो: रॉयटर्स)

पी. चिदंबरम. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर पर सरकार के कदम पर पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल के एक बयान का हवाला देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने बृहस्पतिवार को सवाल किया कि क्या दुनिया में कहीं भी ज़ोर जबरदस्ती आधारित राष्ट्रवाद से किसी समस्या का समाधान निकला है.

पूर्व गृह मंत्री चिदंबरम ने ट्वीट किया, ‘शाह फैसल सिविल सेवा परीक्षा में पहले स्थान पर आए और भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े. उन्होंने जम्मू कश्मीर पर सरकार के कदम को सबसे बड़ा विश्वासघात बताया है.’

उन्होंने कहा, ‘अगर शाह फैसल ऐसा सोचते हैं तो कल्पना कीजिये जम्मू कश्मीर के लाखों आम लोग क्या सोचते होंगे.’ चिदंबरम ने सवाल किया, ‘क्या बाहुबल वाले राष्ट्रवाद से दुनिया में किसी मुद्दे का हल निकला है?’

गौरतलब है कि संसद ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा संबंधी अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प और जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने की बुधवार को घोषणा की.

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने संबंधी राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस याचिका पर सुनवाई उचित समय पर होगी.

जम्मू कश्मीर से ही जुड़ा हुआ एक अन्य याचिका कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की है, जिसमें उन्होंने मांग की है कि कर्फ्यू/प्रतिबंध वापस लेने के साथ ही फोन लाइन, इंटरनेट और समाचार चैनलों को बंद किए जाने जैसे फैसले वापस लिए जाए.

पूनावाला ने राज्य की जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन करने और उमर अब्दुल्ला तथा महबूबा मुफ्ती जैसे नेताओं को रिहा करने की भी मांग की है.

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एनवी रमना के सामने जब इस मामले का उल्लेख किया तो उन्होंने कहा कि ये मामला मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने रखा जाएगा और वो उचित आदेश जारी करेंगे.

संचार माध्यम बंद करने के अलावा जम्मू कश्मीर के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया है. हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 500 से भी अधिक है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)