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जम्मू कश्मीर: सीआरपीएफ की हेल्पलाइन सेवा पर आए बड़ी संख्या में देश-विदेश से फोन

राज्य में फोन और इंटरनेट सेवा बंद होने के चलते रविवार को सीआरपीएफ द्वारा हेल्पलाइन सेवा ‘मददगार’ शुरू की गई है, जिस पर दो दिनों में 870 से ज़्यादा कॉल आए हैं, जिनमें बड़ी संख्या घाटी में तैनात सुरक्षा बलों के परिजनों की भी है.

Jammu: A Rapid Action Force (RAF) personnel stand guard during restrictions in Jammu, Friday, Aug 9, 2019. Restrictions have been imposed in several districts of Jammu and Kashmir as a precautionary measure after the state lost its special status and was bifurcated on Tuesday as Parliament approved a resolution scrapping Article 370 of the Constitution and passed a bill to split the state into two Union Territories. (PTI Photo)(PTI8_9_2019_000056A)(PTI8_9_2019_000161B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: श्रीनगर में सीआरपीएफ की हेल्पलाइन सेवा ‘मददगार’ पर बीते रविवार की रात से काफी संख्या में फोन आ रहे हैं. देश-दुनिया से तमाम कश्मीरी अपने परिजनों और घर के आसपास के इलाकों के हालात जानने के लिए लगातार वहां फोन कर रहे हैं.

अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि मददगार हेल्पलाइन नंबर ‘14411’ पर रविवार और सोमवार, दो दिन में 870 से ज्यादा कॉल आए हैं और 55 प्रतिशत से ज्यादा लोग अपने परिवार का कुशल-क्षेम जानना चाहते थे.

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान निरस्त किए जाने के बाद राज्य में संचार संपर्क पर अंकुश होने के कारण कई दिन ठप रहने के बाद ‘मददगार’ हेल्पलाइन रविवार रात को शुरू की गई.

सोमवार शाम तक के आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, हेल्पलाइन पर देश के अन्य हिस्सों और विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों के 470 से ज्यादा फोन कॉल आए हैं. वे सभी अपने माता-पिता, परिजन, रिश्तेदार और अपने घरों की हालत जानने के लिए बेचैन थे.

अधिकारियों ने बताया कि उनमें से बहुतों ने अपने परिवारवालों से बात करने की इच्छा जताई और हेल्पलाइन पर मौजूद सीआरपीएफ कर्मियों से इसके लिए मदद मांगी.

आंकड़ों के अनुसार, हेल्पलाइन पर यूएई से 17, सऊदी अरब से 11, अमेरिका और रूस से तीन-तीन, इजराइल से पांच, सिंगापुर से चार, फ्रांस से दो, ऑस्ट्रेलिया, कुवैत, बेल्जियम से एक-एक फोन कॉल आए थे.

ब्रिटेन और कनाडा सहित अन्य देशों से भी फोन कॉल आए थे. कश्मीर घाटी में तैनात सुरक्षा बलों के परिजनों के भी करीब 200 फोन कॉल आए थे.

इस हेल्पलाइन को फिर से शुरू करने का मकसद है कि जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के केंद्र के फैसले के बाद पैदा हुए हालात के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे लोगों और उनके परिवारों की मदद की जा सके.

अधिकारियों ने बताया कि ‘मददगार’ हेल्पलाइन के पांच अंकों वाले लैंडलाइन नंबर को फिर से चालू कर दिया गया है. कश्मीर घाटी में संचार व्यवस्था पर लगाई गई बंदिशों के कारण इसे बंद कर दिया गया था.

एक आधिकारिक ट्वीट में सीआरपीएफ ने कहा, ‘14411 फिर से चालू कर दिया गया है. कश्मीरी छात्र और कश्मीर या बाहर रह रहे आम लोग त्वरित सहायता के लिए चौबीसों घंटे नि:शुल्क नंबर 14411 पर सीआरपीएफ मददगार से संपर्क साध सकते हैं.’

सीआरपीएफ ने यह भी कहा कि उसके आधिकारिक ट्विटर हैंडल ‘सीआरपीएफ मददगार’ के जरिए भी मदद मांगी जा सकती है. सीआरपीएफ ने ‘मददगार’ हेल्पलाइन की शुरुआत जून 2017 में की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)