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गाजियाबाद: सीवर लाइन बनाने के दौरान दम घुटने से पांच मजदूरों की मौत

ठेकेदार ने मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में एक जल निकासी यानी कि सीवर परियोजना में काम करने वाले पांच लोगों की बीते गुरुवार को दम घुटने से मौत हो गई. उनके पास कथित तौर पर सुरक्षा उपकरण नहीं थे. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने बताया कि घरेलू सीवर लाइनों को शहर की मुख्य जल निकासी प्रणाली के साथ जोड़ने वाली एक परियोजना पर ये लोग काम कर रहे थे. इस परियोजना को गाजियाबाद नगर निगम ने मंजूरी दी है.

उन्होंने बताया कि एक निजी ठेकेदार ने इन लोगों को काम पर रखा था जो सिहानी गेट पुलिस थाना क्षेत्र में नंदग्राम क्षेत्र के निकट कृष्णा कॉलोनी में नगर निकाय के जल विभाग की ‘अमृत योजना’ के तहत परियोजना चला रहे हैं.

अधिकारी ने बताया कि दोपहर लगभग एक बजे इन लोगों में से एक सीवर लाइन के अंदर गया लेकिन वो बाहर नहीं आए. इसके बाद अन्य चार एक-एक करके सीवर के भीतर गए. जब उनमें से कोई नहीं आया तो एक अन्य व्यक्ति उसके अंदर गया और उसने देखा कि पांचों बेहोशी की हालत में पड़े हैं.

उन्होंने बताया कि ठेकेदार ने इन लोगों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए थे.

पांडे ने बताया कि इन लोगों को बाहर निकाला गया और मरियम अस्पताल ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

नगर निकाय ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराकर लापरवाही का आरोप लगाया है. इसके बाद ठेकेदार, ईएमएस इन्फ्राकॉन, और इसके तीन इंजीनियरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

पांडे ने बताया कि नगर निगम आयुक्त दिनेश शर्मा को दोषी लोगों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं.

मृतकों की पहचान दामोदर (40), होरली (35), संदीप (30), शिवकुमार (32) और विजय कुमार (40) के रूप में हुई है. ये सभी बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले थे.

पांडे ने बताया कि समस्तीपुर के कलेक्टर को इस घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है.

इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है. इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं.

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (शहर) और जल विभाग इस घटना की जांच करेंगे. पांडे ने बताया कि रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर सरकार को भेज दी जाएगी.