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बिहार के स्कूलों में सबसे खराब शिक्षक-छात्र अनुपातः एचआरडी मंत्रालय

बिहार में 38 छात्रों के मुकाबले एक शिक्षक है जबकि दूसरे स्थान पर दिल्ली है, यहां 35 छात्रों पर एक शिक्षक है. सबसे बेहतर स्थिति सिक्किम की है, जहां चार छात्रों पर एक शिक्षक है.

Allahabad: Children attend a class at a Government school on the occasion of 'World Literacy Day', in Allahabad, Saturday, Sept 8, 2018. (PTI Photo) (PTI9_8_2018_000090B)

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः बिहार में छात्र और शिक्षक अनुपात सबसे खराब है, जहां 38 छात्रों के मुकाबले एक शिक्षक है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यह अनुपात बिहार की अपेक्षा थोड़ा ठीक है और यहां 35 छात्रों के मुकाबले एक शिक्षक हैं, वहीं सिक्किम में यह अनुपात सबसे बेहतर है और यहां चार छात्रों पर एक शिक्षक है.

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की अनुसूची में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात निर्धारित किया गया है. इसके अनुसार प्रारंभिक कक्षा एक से पांच तक के कक्षा के लिए 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए.

उच्च प्राथमिक कक्षा 6 से 8 में न्यूनतम 35 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए. बिहार में कक्षा पांच तक 38 पर एक शिक्षक और उच्च प्राथमिक कक्षा में 39 छात्रों पर एक शिक्षक हैं.दिल्ली में उच्च प्राथमिक स्कूलों में 34 छात्रों पर एक शिक्षक हैं.

प्राथमिक स्तर पर पीटीआर का प्रावधान 30:1 और उच्च प्राथमिक स्तर पर यह अनुपात 35:1 का है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘उच्च प्राथमिक स्कूलों में बिहार में छात्र शिक्षक अनुपात 39 है जबकि दिल्ली में 34 है. प्राथमिक स्कूलों में यह आंकड़ा बिहार और दिल्ली में क्रमश: 38 और 35 है.’

अधिकारी ने बताया, ‘झारखंड में 50 फीसदी से अधिक प्राथमिक स्कूल एवं 64 प्रतिशत से अधिक उच्च प्राथमिक स्कूल हैं जहां छात्र शिक्षक अनुपात खराब है. कुल मिलाकर देश के 26.45 फीसदी प्राथमिक स्कूलों में और 31 फीसदी से अधिक उच्च प्राथमिक स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात उचित नहीं है.’

बिहार के स्कूलों में सबसे अधिक खराब छात्र-शिक्षक अनुपात हैं. इसके बाद झारखंड है.

अधिकारी ने बताया, बिहार के 67.94 प्राथमिक स्कूलों में खराब छात्र-शिक्षक अनुपात है जबकि 77.86 उच्च प्राथमिक स्कूलों में खराब छात्र-शिक्षक अनुपात है.

झारखंड में 50.28 फीसदी प्राथमिक स्कूल और 64.24 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं, जहां खराब छात्र-शिक्षक अनुपात है. कुल मिलाकर, देश में 26.45 फीसदी प्राथमिक स्कूल और 31.07 फीसदी उच्च प्राथमिक स्कूल हैं, जहां खराब छात्र-शिक्षक अनुपात है.

केंद्र सरकार ने सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) और शिक्षक शिक्षा (टीई) को समाप्त कर 2018-2019 में स्कूली शिक्षा के लिए समेकित योजना समग्र शिक्षा शुरू की थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)