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मोदी सरकार ने मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाई, मिलती रहेगी ‘जेड प्लस’ सुरक्षा

एसपीजी संरक्षण देश में दिया जाने वाला सर्वोच्च सुरक्षा कवच है. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब यह सुरक्षा कवर केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को ही प्राप्त है.

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नयी दिल्ली: सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को प्राप्त एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे सिंह को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिलती रहेगी.

एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद लिया गया है. ‘जेड प्लस’ सुरक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) द्वारा दी जाने वाली उच्चतम सुरक्षाओं में से एक है.

गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘वर्तमान सुरक्षा कवर समीक्षा खतरे की आशंका पर आधारित एक आवधिक और पेशेवर अभ्यास है जो विशुद्ध रूप से सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पेशेवर मूल्यांकन किए जाने पर आधारित है. डॉक्टर मनमोहन सिंह को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिलती रहेगी.’

विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा वापस लेने का निर्णय कैबिनेट सचिवालय और गृह मंत्रालय की विभिन्न खुफिया एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार सहित तीन महीने तक समीक्षा किए जाने के बाद लिया गया.

विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) संरक्षण देश में दिया जाने वाला सर्वोच्च सुरक्षा कवच है. सिंह की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के बाद अब यह सुरक्षा कवर केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उनके पुत्र राहुल गांधी और पुत्री प्रियंका गांधी को ही प्राप्त है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, एसपीजी अधिनियम, 1988 के अनुसार, साल 2014 में प्रधानमंत्री का पद छोड़ने के बाद सिंह एक साल के लिए एसपीजी कवर के हकदार थे. उनकी एसपीजी सुरक्षा कवर उनके और उनकी पत्नी गुरशरण कौर पर खतरों को देखते हुए हर साल समीक्षा के बाद बढ़ा दिया जाता था. सिंह की बेटी को एसपीजी सुरक्षा मिली हुई थी लेकिन साल 2014 में उन्होंने स्वेच्छा से उसे छोड़ दिया था.

साल 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद एसपीजी अधिनियम में संशोधन कर कम से कम 10 साल के लिए सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवारों के लिए किए जाने की व्यवस्था की गई थी.

हालांकि, अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एसपीजी की कार्यप्रणाली एक समीक्षा की थी और पूर्व प्रधानमंत्रियों पीवी नरसिम्हा राव, एचडी देवगौड़ा और आईके गुजराल की एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी.

साल 2003 में वायपेयी सरकार ने एक बार फिर से एसपीजी अधिनियम की समीक्षा की और उसमें संशोधन किया. इसके तहत पूर्व प्रधानमंत्रियों को 10 साल के लिए मिलने वाली सुरक्षा को घटाकर एक साल कर दिया गया. वहीं, सालाना समीक्षा के आधार पर सुरक्षा कवर बढ़ाने का प्रावधान किया गया.

हालांकि, साल 2004 में पद छोड़ने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को साल 2018 में उनके निधन तक एसपीजी सुरक्षा मिलती रही थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)