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हरियाणा: एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड भूमि आवंटन मामले में आरोप-पत्र दायर, वोरा और हुड्डा नामज़द

एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पंचकूला में भूमि आवंटन के मामले में ईडी ने सोमवार को अपना पहला आरोप पत्र दायर किया. गांधी परिवार व वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के नियंत्रण वाला एजेएल समूह नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र चलाता है.

कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोरा. (फोटो: पीटीआई)

कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मोतीलाल वोरा. (फोटो: पीटीआई)

नयी दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कांग्रेस प्रवर्तित एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकूला में भूमि आवंटन में कथित अनियमितता के मामले में सोमवार को अपना पहला आरोप पत्र दायर किया और इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नामजद किया है.

केंद्रीय जांच एजेंसी ने कहा कि चंडीगढ़ के नजदीक पंचकूला स्थित एक विशेष पीएमएलए अदालत में एक अभियोजन शिकायत दायर की.

एजेंसी ने मामले में दायर अपने पहले आरोप पत्र में वोरा, हुड्डा और एजेएल को नामजद किया है और आरोप लगाया है कि वे अपराध से हासिल धन की प्राप्ति और उसे रखने आदि प्रक्रिया और गतिविधियों में सीधे तौर पर शामिल थे.

वोरा राज्यसभा सदस्य के साथ ही कांग्रेस पार्टी के महासचिव भी हैं. हुड्डा ने हाल में चेतावनी दी थी कि वह नया राजनीतिक रास्ता अख्तियार कर सकते हैं.

हुड्डा ने हाल में आयोजित एक रैली में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की आलोचना की थी और कहा था कि ‘वह रास्ता भटक गई है’ और वह पार्टी नहीं रह गई है जो पहले हुआ करती थी.

धनशोधन मामला तत्कालीन सरकार द्वारा 1992 में पंचकूला के सेक्टर 6 में सी..17 स्थित एक प्लॉट का आवंटन एजेएल को करने में कथित अनियमितताओं और धनशोधन के आरोपों से संबंधित है.

एजेएल का नियंत्रण गांधी परिवार सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के हाथ में है. समूह नेशनल हेराल्ड समाचारपत्र चलाता है.

ईडी प्लॉट को पहले ही कुर्क कर चुका है जिसका मूल्य 64.93 करोड़ रुपये आंका गया है और यह एजेंसी द्वारा मामले में दायर किया गया पहला आरोप पत्र है.

ईडी ने एक बयान में कहा, ‘हुड्डा ने एजेएल का की मदद करते हुए उसे उपरोक्त प्लॉट पर निर्माण के लिए मई 2008-10 मई 2012 के बीच तीन बार अनुचित विस्तार दिये जब तक कि एजेएल ने वर्ष 2014 में निर्माण पूरा नहीं कर लिया.’

एजेंसी ने आरोप लगाया कि हुड्डा ने एजेएल को प्लॉट का आवंटन ‘अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए किया.’

उसने आरोप लगाया कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने उक्त भूखंड को बेईमानी से मूल दरों पर ब्याज के साथ एजेएल को पुन: आवंटन की आड़ में आवंटित किया और ऐसा हुडा (हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण) की ओर से रखी गई आवश्यक शर्तों और नीति का उल्लंघन करके किया गया.

ईडी ने मामले में सीबीआई की प्राथमिकी और हरियाणा सतर्कता ब्यूरो द्वारा दर्ज आपराधिक प्राथमिकियों के आधार पर 2016 में धनशोधन की एक आपराधिक शिकायत दर्ज की थी.

सीबीआई ने मामले की जांच हरियाणा की भाजपा सरकार के अनुरोध पर अपने हाथ में ली थी. सीबीआई ने हुड्डा और अन्य के खिलाफ मामले में पहले ही आरोपपत्र दायर कर दिया है.

प्लाट का आवंटन एजेएल को पहली बार 1982 में किया गया था. ईडी ने कहा कि यद्यपि आवंटन को हुडा के इस्टेट अधिकारी द्वारा अक्टूबर 1992 में एक आदेश द्वारा रद्द कर दिया गया था क्योंकि एजेएल आवंटन पत्र की शर्तों का अनुपालन नहीं करता था. एजेंसी ने मामले में दोनों कांग्रेस नेताओं से गत वर्ष पूछताछ की थी.

हरियाणा कांग्रेस विधायक बिश्नोई और उनके भाई का 150 करोड़ रुपये का ‘बेनामी’ होटल जब्त

आयकर विभाग ने हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप बिश्नोई और उनके भाई का गुड़गांव में स्थित 150 करोड़ रुपये का एक होटल ‘बेनामी’ सम्पत्ति के तौर पर जब्त कर लिया है. आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि विभाग की दिल्ली बेनामी निषेध इकाई ने होटल सम्पत्ति को जब्त करने के आदेश जारी किए थे. उन्होंने बताया कि बेनामी संपत्ति लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 की धारा 24(3) के तहत आदेश जारी किए गए थे.

आज तक के अनुसार, विभाग ने बिश्नोई और उनके परिवार के खिलाफ कर चोरी के आरोपों के चलते इस साल जुलाई में व्यापक स्तर पर बिश्नोई के हरियाणा के हिसार, मंडी आदमपुर और गुड़गांव समेत कुल 13 स्थानों पर 23 जुलाई को छापेमारी की थी.

इसमें कई बेनामी संपत्तियों सहित करोड़ों रुपये के लेनदेन, चल-अचल संपत्तियों से संबंधित डील के बारे में जानकारी और सबूत मिले थे. आयकर विभाग को यूएई और पनामा में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी के शेयर की जानकारी और दस्तावेज मिले थे.

छापेमारी के दौरान आयकर अधिकारियों ने कहा था कि वित्तीय लेनदेन के साथ दस्तावेज और बैंक खाता नंबर और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. इसके अलावा सर्च ऑपरेशन में अधिकारियों ने बिश्नोई के कंप्यूटर और लैपटॉप को भी जब्त किया था.

इस जांच में आयकर विभाग को कई ऐसे सबूत हाथ लगे थे, जिससे कंपनी के स्वामित्व पर शक हुआ था. ब्रिस्टल होटल के स्वामित्व को लेकर आयकर विभाग ने अनियमितता पाई थी. इसके बाद कार्रवाई करते हुए बेनामी संपत्ति को जब्त कर लिया.

आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई संपत्ति का स्वामित्व ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसमें 34 फीसदी शेयर अन्य कंपनी के नाम है जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड (बीवीआई) में रजिस्टर्ड है. यह कंपनी संयुक्त अरब अमीरात से संचालित होती है.

ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के कथित बेनामी शेयरधारक बिश्नोई परिवार के बेहद करीबी हैं. इस संपत्ति के बारे में फैसले लेने का मालिकाना हक बिश्नोई परिवार के पास ही है. ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड में शेयरों के अधिग्रहण के लिए भुगतान का अंतिम निर्णय भी बिश्नोई परिवार द्वारा ही किया गया था और वे भारत और विदेशों में स्थित अपने सहयोगियों के माध्यम से इन पर नियंत्रण रखते थे.

हरियाणा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं, जबकि उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी राज्य विधानसभा में हांसी सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं.

दोनों पति-पत्नी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवारों के रूप में जीत हासिल की थी. बाद में 2016 में पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया था. उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हाल ही में कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर हिसार संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)