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ब्लड टेस्ट रिपोर्ट को हवाला लेन-देन समझ बैठी एनआईए, प्रतिष्ठित हृदय रोग डॉक्टर से पूछताछ

पद्मश्री से सम्मानित कॉर्डियोलॉजिस्ट उपेंद्र कौल कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक के डॉक्टर हैं और उन्होंने मलिक को उनकी ब्लड रिपोर्ट के संबंध में कुछ टेक्स्ट मैसेज किए थे.

Upendra-Kaul-Facebook

कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर उपेंद्र कौल (फोटो साभारः फेसबुक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एआईए) ने पद्मश्री से सम्मानित एक हृदय रोग विशेषज्ञ को शुक्रवार को उस समय समन किया, जब उन्होंने अलगाववादी नेता यासीन  मलिक की ब्लड रिपोर्ट में उपयोग किए गए एक तकनीकी शब्द को हवाला कोड समझ लिया.

द टेलीग्राफ के अनुसार, दिल्ली स्थित हृदय रोग विशेषज्ञ और कश्मीरी पंडित उपेंद्र कौल और यासीन मलिक ने एक-दूसरे को कुछ टेक्स्ट मैसेज किए थे, जिसमें आईएनआर 2.78 का जिक्र था.

बता दें कि आईएनआर का उपयोग भारतीय रुपये के संबंध में भी किया जाता है, जिससे संभवतः एनआईए को लगा कि इसका उपयोग हवाला लेन-देन के लिए हुआ है. कुछ कश्मीरी नेताओं पर अक्सर हवाला लेन-देन का आरोप लगाया जाता है.

हालांकि, मेडिकल साइंस में आईएनआर का मतलब इंटरनेशनल नॉर्मलाइज्ड रेश्यो होता है, जो खून के थक्के जमने के समय को दर्शाने का पैमाना है.

कलकत्ता के एक हृदय रोग विशेषज्ञ ने कहा कि डॉक्टर्स आईएनआर की मदद से किसी मरीज के खून के थक्कों को एंटी क्लोटिंग दवाओं से सोखते हैं. यह विशेष रूप से उनके लिए जरूरी है जो खून को पतला करने की दवाइयां लेते हैं.

एनआईए ने गुरुवार को कौल को समन जारी कर उन्हें शुक्रवार सुबह 10.30 बजे पेश होने को कहा. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कौल को तलब करने के कारणों पर कोई टिप्पणी नहीं की.

कौल ने शुक्रवार शाम को नई दिल्ली के लोदी रोड पर एनआईए के मुख्यालय में अपने अनुभवों को याद करते हुए कहा, ‘जांच के दौरान मुझे लगा कि एनआईए ने आईएनआर का मतलब भारतीय रुपया समझ लिया. मैंने उन्हें स्पष्ट किया कि मेडिकल भाषा में आईएनआर का मतलब इंटरनेशनल नॉर्मलाइज्ड रेश्यो है और यह उनके अनुरूप सोचे जा रहे भारतीय रुपये से कोई ताल्लुक नहीं है.

कौल ने कहा, ‘जांचकर्ता शायद इसमें उलझ गए थे लेकिन मैंने उनकी गलतफहमी ठीक कर दी. मैंने उन्हें बता दिया कि एक डॉक्टर होने के होने नाते कोई भी मेरा मरीज हो सकता है, मैं मलिक से जुड़ा हुआ नहीं हूं. एक डॉक्टर होने के नाते मैं मरीजों का इलाज करता हूं लेकिन उनकी विचारधारा से मेरा कोई ताल्लुक नहीं है. मैंने देशभर के कई लोगों का इलाज किया है, जिसमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हैं.

कौल ने कहा, ‘मैंने जांचकर्ताओं को बता दिया कि मलिक को 1995-1996 में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) एक वरिष्ठ अधिकारी ही इलाज के लिए मेरे पास लेकर आए थे.’

गौरतलब है कि कौल को स्पष्टीकरण के बाद एनआईए के मुख्यालय से जाने दिया गया.

कौल मौजूदा समय में बत्रा हार्ट सेंटर के चेयरमैन हैं. उन्होंने एम्स सहित सरकारी और निजी क्षेत्र में कई अस्पतालों में कार्डियोलॉजी यूनिट स्थापित की हैं.

बता दें कि कौल पांच अगस्त को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना कर चुके हैं.