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बैंक कर्मचारी संघों ने कहा- विलय समझ से परे, अर्थव्यवस्था होगी अस्थिर, कई शहरों में प्रदर्शन

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की थी. इस विलय के बाद सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह जाएगी.

Kolkata: Bank Employees raise slogans against Central Government to protest against centre's decision for merger of different banks, in Kolkata, Saturday, Aug 31, 2019. (PTI Photo/Swapan Mahapatra)(PTI8_31_2019_000076B)

शनिवार को कोलकाता में बैंकों के विलय के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया. (फोटो: पीटीआई)

चेन्नई: अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के सदस्यों ने 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाए जाने के केंद्र सरकार के निर्णय का विरोध किया है. सरकार के फैसले पर विरोध प्रदर्शन के लिए सरकारी और निजी बैंकों काम कर रहे इस संगठन के सदस्य यहां शनिवार को कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांध कर काम कर रहे थे.

संघ के महासचिव सी. एच. वेंकटचालम ने कहा कि सरकार ने यह निर्णय गलत समय पर लिया है और इसकी समीक्षा की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके विरोध में एक रैली की भी योजना है. उन्होंने कहा कि कि इस विलय का मतलब छह बैंकों का बंद होना है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की.

विलय की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बैंकों के विलय का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत बैंकों का निर्माण करना है, ताकि देश को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जा सके.

सरकार ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी), केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक में कुछ दूसरे सरकारी बैंकों का विलय कर के चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है.

इसमें पीएनबी में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और युनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का, केनरा बैंक में सिंडिकेट बैंक का, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का एवं इंडियन बैंक में इलाहाबाद बैंक का विलय किया जाएगा.

पीएनबी विलय के बाद देश का दूसरा और केनरा बैंक चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा.

विलय के बाद कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 रह जाएगी. पीएनबी के बाद बैंक आफ बड़ौदा तीसरा बड़ा बैंक होगा. वेंकटचालम ने कहा कि सरकार इसे विलय कह सकती है लेकिन इससे छह बैंक बैंकिंग क्षेत्र से गायब हो जाएंगे जिन्हें बनने में सालों लगे हैं. उन्होंने कहा कि हड़ताल पर जाने को लेकर दिल्ली में 11 सितंबर को संघ की बैठक होगी.

वहीं, बैंकिंग सेक्टर की ट्रेड यूनियनों की अंब्रेला बॉडी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने दिल्ली सहित देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किया. वे सरकार से इस कदम को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

बता दें कि, यूएफबीयू ने शुक्रवार को सरकार द्वारा घोषित बैंकों के विलय की योजना के विरोध में शनिवार को देश भर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन करने का ऐलान किया था.

बरेली में कर्मचारियों ने काली पट्टी बांध किया काम

पिछले कई सालों से बैंकों के विलय का विरोध करने के बावजूद शुक्रवार को 10 बैंकों का चार बैंकों में विलय करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ बरेली में बैंक कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर अपना आक्रोश जताया.

हिंदुस्तान के अनुसार, बैंकों के विलय से नाराज कर्मचारी आज काली पट्टी बांध कर काम कर रहे हैं. कर्मचारी-अधिकारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं. उनका मानना है कि अब बड़े स्तर पर शाखाएं और दफ्तर बंद होंगे. स्थानांतरण और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की संख्या बढ़ जाएगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)