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प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा का इस्तीफा, पीके सिन्हा पीएमओ में ओएसडी नियुक्त

नृपेंद्र मिश्रा 2009 में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष बने थे. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पिछली राजग सरकार द्वारा ट्राई क़ानून में संशोधन के बाद मिश्रा को साल 2014 में पीएमओ में नियुक्त किया गया. ट्राई कानून उसके अध्यक्ष और सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद सरकारी महकमों में काम करने पर रोक लगाता था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा. (फोटो साभार: पीआईबी)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने अपना पद छोड़ने की इच्छा जताते हुए बीते शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया. नृपेंद्र मिश्रा के अपने दायित्वों से मुक्त करने की इच्छा जाहिर करने के बाद प्रधानमंत्री ने उनसे दो हफ्ते तक पद पर बने रहने को कहा है.

सरकार के प्रधान प्रवक्ता सीतांशु कार ने कहा कि प्रधानमंत्री ने मिश्रा से दो सप्ताह तक पद पर बने रहने को कहा है.

इसके बाद शुक्रवार को कैबिनेट सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए उत्तर प्रदेश कैडर के 1977  बैच के आईएएस प्रदीप कुमार सिन्हा (पीके सिन्हा) को प्रधानमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) की जिम्मेदारी सौंपी गई है. प्रदीप सिन्हा के कैबिनेट सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह झारखंड कैडर के 1982 बैच के आईएएस अधिकारी राजीव गाबा को कैबिनेट सचिव नियुक्त किया गया है.

बहरहाल पद छोड़ने की इच्छा जताते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने एक बयान में कहा है, ‘यह सौभाग्य की बात है कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मातहत देश की सेवा की. यह अवसर देने और मुझ पर भरोसा करने के लिए मैं उनका आभारी हूं.’

मिश्रा ने कहा, ‘मैंने हर घंटे काम करने का आनंद लिया है और पांच साल से ज्यादा समय की यात्रा काफी संतोषजनक रही. अब मेरे लिए यह समय आगे बढ़ने का है. मैं आगे भी सार्वजनिक कार्यों और राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहूंगा.’

उन्होंने कहा, ‘मैं सरकार के भीतर और बाहर सभी सहकर्मियों, दोस्तों और अपने परिवार का इस समर्थन के लिए शुक्रिया अदा करता हूं. मैं कामना करता हूं कि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी हमारे देश को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाते हुए सफल हों.’

उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने पांच वर्षों से अधिक समय तक नरेंद्र मोदी के करीबी सहायक के तौर पर काम किया है.

मिश्रा भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार के सत्ता में आने और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद 2014 से ही पीएमओ में थे.

वह 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के सत्ता में लौटने के बाद फिर से प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नियुक्त किए गए. उन्हें कैबिनेट मंत्री की रैंक हासिल थीं.

सरकार में विभिन्न पदों में काम करने वाले मिश्रा 2009 में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अध्यक्ष बने थे.

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली पिछली राजग सरकार द्वारा ट्राई कानून में संशोधन करने के बाद नृपेंद्र मिश्रा को साल 2014 में पीएमओ में नियुक्त किया गया. दरअसल ट्राई का कानून उन्हें यह अहम पद हासिल करने से रोक रहा था.

ट्राई अधिनियम 1997 के धारा 5 (8) उसके अध्यक्ष और सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद केंद्र या राज्य सरकारों में कोई अन्य पद हासिल करने पर रोक लगाता था.

पीएमओ में शक्तिशाली अधिकारी मिश्रा मंत्रालयों के साथ समन्वय करने और सरकार के अहम नीतिगत फैसलों को लागू करने के लिए जिम्मेदार थे.

नृपेंद्र मिश्रा के पद से हटने का फैसला करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि जब 2014 में वह राष्ट्रीय राजधानी में नए थे तब उन्हें इन पूर्व नौकरशाह ने काफी चीजें सिखाईं.

प्रधानमंत्री ने मिश्रा को उनके जीवन के नए चरण के लिए शुभकामनाएं दीं.

मोदी ने ट्वीट किया, ‘श्री नृपेंद्र मिश्रा उत्कृष्ट अधिकारियों में से एक हैं जिनकी सार्वजनिक नीति एवं प्रशासन पर गहरी समझ है. जब 2014 में दिल्ली में नया था तब उन्होंने मुझे ढेर सारी चीजें सिखाईं और उनका मार्गदर्शन सदैव बहुमूल्य रहेगा.’

मोदी ने एक अन्य ट्वीट में कहा है, ‘अब श्री नृपेंद्र मिश्रा जी के सेवामुक्त होने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है. वे अपनी इच्छा के अनुरूप सितंबर के दूसरे हफ्ते से कार्यमुक्त हो जाएंगे. आगे के लिए उन्हें बहुत-बहुत शुभकामनाएं.’

उन्होंने कहा कि पांच सालों तक परिश्रमपूर्वक और कर्मठता से पीएमओ में अपनी सेवा देने तथा भारत की विकास गाथा में अमिट योगदान देने के बाद 74 वर्षीय मिश्रा अपने जीवन के नए चरण में कदम रख रहे है. उनके भावी कदमों के लिए मेरी शुभकामनाएं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)