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27 मंदिरों को ढहाकर बना कुतुब मीनार हमारी संस्कृति का उदाहरण है: केंद्रीय पर्यटन मंत्री

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि कुतुब मीनार हमारी संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह एक ऐसा स्मारक है, जो 27 मंदिरों को ढहाकर बना था और आजादी के बाद भी यह विश्व धरोहर है.

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कुतुब मीनार (फोटोः रॉयटर्स)

नई दिल्लीः केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि कुतुब मीनार हमारी संस्कृति का सबसे बड़ा उदाहरण है. यह एक ऐसा स्मारक है, जो 27 मंदिरों को ढहाकर बना था और आजादी के बाद भी यह विश्व धरोहर है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल ने शनिवार शाम दिल्ली के कुतुब मीनार में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही.

उन्होंने इस दौरान परिसर में मौजूद 24 फीट ऊंचे लोहे के स्तंभ का भी उल्लेख किया. उन्होंने  कहा, ‘यह लौहस्तंभ स्मारक से सदियों पुराना है. खुले आसमान में अस्तित्व के 1,600 साल बाद भी इसमें जंग नहीं लगा है.’

उन्होंने कहा की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को स्मारक के इतिहास और महत्व को ध्यान में रखते हुए इस पर तख्ती लगानी चाहिए.

महरौली में कुतुब मीनार के निर्माण से पहले मुगलों द्वारा मंदिरों को ध्वस्त करने के बारे में बताते हुए पटेल ने कहा, ‘जिस समय एएसआई ने कुतुब मीनार को अपने संरक्षण में लिया, उस समय योगमाया मंदिर अस्तित्व में था. हर किसी को हैरानी है कि उस विशेष मंदिर को एएसआई को क्यों नही सौंपा गया, हो सकता है कि वह दैनिक पूजा का स्थान था.’

कथा के मुताबिक, योगमाया मंदिर भगवान कृष्ण की बहन को समर्पित मंदिर है. स्थानीय पुजारियों के मुताबिक, यह मंदिर महमूद गज़नी और बाद में मामलूक द्वारा ध्वस्त किए गए 27 मंदिरों में से एक है और यह एकमात्र मंदिर है, जो पूर्व सल्तनात काल से जुड़ा हुआ है. हालांकि इसकी वास्तविक वास्तुकला (300-200 बीसी) को कभी दोबारा जैसा नहीं बनाया जा सका. इसका पुनर्निर्माणा बार-बार स्थानीय लोगों द्वारा ही किया गया.

पटेल ने कहा कि हाल ही में दक्षिण दिल्ली से भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने उनसे आग्रह किया कि मंत्रालय कुतुब मीनार और मंदिर के बीच ई-रिक्शा सेवा शुरू करे ताकि आगंतुकों को सुविधा हो सके.

उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार करेगा.