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जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का निधन

रॉबर्ट मुगाबे 1980 से 1987 तक जिम्बाब्वे के प्रधानमंत्री और 1987 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे. उन्होंने 37 सालों तक जिम्बाब्वे का नेतृत्व किया. सैन्य तख्तापलट के कारण उन्हें 2017 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था.

जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे. (फोटो: रॉयटर्स)

जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे. (फोटो: रॉयटर्स)

हरारे: जिम्बाब्वे के पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का निधन हो गया है. वह 95 वर्ष के थे. अप्रैल महीने से उनका इलाज सिंगापुर के एक अस्पताल में चल रहा था.

बढ़ते उग्रवाद और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण रोडेशिया सरकार के वार्ता की मेज पर आने के लिए मजबूर होने के बाद 1980 के चुनावों में मुगाबे सत्ता में आए थे.

मुगाबे 1980 से 1987 तक देश के प्रधानमंत्री और 1987 से 2017 तक राष्ट्रपति रहे.

उन्होंने 37 सालों तक जिम्बाब्वे का नेतृत्व किया. सैन्य तख्तापलट के कारण उन्हें 2017 में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. 1980 से लेकर 2017 तक मुगाबे के शासनकाल को कठोर दौर माना जाता है.

मुगाबे ने जिम्बाब्वे की आर्थिक समस्याओं के लिए पश्चिमी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहराया था.

जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति एमर्सन नांगाग्वा ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ‘मैं बहुत दुख के साथ यह घोषणा कर रहा हूं कि जिम्बाब्वे के जनक और पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे का निधन हो गया है.’

उन्होंने कहा, ‘मुगाबे आजादी का प्रतीक थे. वह एक ऐसे अफ्रीकी नेता थे, जिन्होंने अपने लोगों की आजादी और सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया. हमारे देश और उपमहाद्वीप के इतिहास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.’

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बहुसंख्यक अश्वेत समुदाय के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए मुगाबे की तारीफ की जाती हैं. हालांकि उनके बाद के कार्यकाल को राजनीतिक विरोधियों के हिंसात्मक दमन और जिम्बाब्वे को आर्थिक तौर पर बर्बाद करने के लिए जाना जाता है.

रॉबर्ट मुगाबे का जन्म 21 फरवरी 1924 को रोडेशिया में हुआ था. रोडेशिया उस समय एक ब्रिटिश कॉलोनी थी, जिसे अल्पसंख्यक श्वेत लोग चलाते थे.

1964 में रोडेशिया की सरकार की आलोचना के चलते उन्हें बिना किसी सुनवाई के क़रीब एक दशक से ज्यादा समय के लिए जेल में रखा गया था.

साल 1973 में जब वह जेल में ही थे, तब उन्हें जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन-पेट्रिएट फ्रंट (जेडएएनयू-पीएफ) का अध्यक्ष चुना गया था. वह इस संगठन के संस्थापक सदस्य भी थे.

रिहा होने के बाद वह मोज़ाम्बिक चले गए थे और वहां से उन्होंने रोडेशिया सरकार के खिलाफ छापामार कार्रवाई का कुशल निर्देशन किया था. इस राजनीतिक संकट का ख़ात्मा स्वतंत्र जिम्बाब्वे गणराज्य के जन्म के साथ हुआ.

आज़ादी के लिए सफल आंदोलन चलाने की वजह से 1980 में हुए जिम्बाब्वे के पहले चुनाव में रॉबर्ट मुगाबे ने बड़ी जीत हासिल की थी. हालांकि कई दशकों तक सत्ता में बने रहने की वजह से उनके आलोचकों की संख्या बढ़ती गई थी और उनके शासनकाल के अंतिम दिनों में लोग उन्हें तानाशाह के तौर पर चित्रित करने लगे थे.

उनके शासनकाल के दौरान 90 के दशक में जिम्बाब्वे की आर्थिक हालत में लगातार गिरावट हो रही थी. इसके बाद के सालों में देश की स्थिति ख़राब होती चली गई.

इन हालातों के बीच 15 नवंबर 2017 को तकरीबन एक साल तक उनकी सरकार के खिलाफ लोगों के प्रदर्शन के बाद सैन्य तख्तापलट हो गया और रॉबर्ट मुगाबे को नजरबंद कर दिया गया.

19 नवंबर 2017 को जेएएनयू-पीएफ ने पार्टी नेता के तौर पर रॉबर्ट मुगाबे को बर्ख़ास्त कर दिया और उनकी जगह संगठन के पूर्व उपाध्यक्ष एमर्सन नांगाग्वा को चुना गया. 30 जुलाई 2018 को जिम्बाब्वे में आम चुनाव हुए और एमर्सन नांगाग्वा के नेतृत्व में जेएएनयू-पीएफ ने जीत दर्ज की. एमर्सन वर्तमान में जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)