कैंपस

बीएचयू: विद्यार्थियों का आरोप, यौन शोषण के दोषी प्रोफेसर को बिना कार्रवाई बहाल किया गया

विशेष रिपोर्ट: बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के एक प्रोफेसर पर छात्र-छात्राओं ने छेड़खानी और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था. विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति ने इन्हें जांच में सही पाया और आरोपी प्रोफेसर पर कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की थी.

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (फोटो: पीटीआई)

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (फोटो: पीटीआई)

वाराणसी: छात्राओं से छेड़छाड़ को लेकर विगत सालों में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में कई विरोध-प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन इनके बावजूद ऐसे मामले के प्रति प्रशासन का उदासीन रवैया बदलता नहीं दिख रहा है.

हालिया मामला जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एसके चौबे से संबंधित है. प्रो. चौबे को छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें, अभद्रता और भद्दी टिप्पणियों का दोषी पाए जाने और जांच कमेटी द्वारा कठोरतम कार्रवाई के आग्रह के बावजूद बहाल कर दिया गया है.

ऐसा तब हुआ है जब छेड़खानी के मामले में ढुलमुल रवैया अपनाने के चलते पिछले कुलपति को जबरन छुट्टी पर भेजना पड़ा था और बीएचयू कैंपस को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने के लिए किया गया छात्राओं का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा था.

क्या था मामला

अक्टूबर 2018 में जंतु विज्ञान विभाग के बीएससी के पांचवे सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने कुलपति को पत्र लिख कर प्रो. चौबे पर एक शैक्षणिक यात्रा छात्राओं के साथ शारीरिक छेड़खानी और अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया था और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.

छात्र-छात्राओं का यह समूह 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2018 तक प्रो. चौबे के साथ भुवनेश्वर की शैक्षणिक यात्रा पर थे. इस यात्रा से लौटने के बाद 13 अक्टूबर को प्रो. चौबे के बर्ताव को लेकर यह सामूहिक शिकायत की गई थी.

शिकायत के अनुसार, विद्यार्थियों ने बताया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क जाकर जंतुओं के विषय में अध्ययन करना था, लेकिन प्रो. चौबे पार्क में बहुत कम समय देकर सभी को कोणार्क स्थित सूर्य मंदिर ले गए. वहां जाकर उन्होंने परिसर की प्रतिमाओं की यौन भावभंगिमाओं के बारे में बताना शुरू किया, जिससे सभी असहज हो गए.

BHU Zoology Department

बीएचयू का जंतु विज्ञान विभाग (फोटो: रिज़वाना तबस्सुम)

विद्यार्थियों का कहना है कि साथ ही उन्होंने समूह के साथ चल रहे गाइड को ‘मेन पॉइंट’ पर आने को बोला, जिससे उनका आशय यौन क्रियाओं के वर्णन से था. छात्र-छात्राओं के अनुसार प्रो. चौबे का यह कृत्य यौन प्रताड़ना जैसा था. छात्र-छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया था कि शिकायत करने की स्थिति में प्रोफेसर की तरफ से प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी भी दी जाती है.

छात्र-छात्राओं का कहना है कि प्रो. चौबे पर सालों से इस तरह के आरोप लगते आए थे. इस मामले को तूल पकड़ता देख तब कुलपति राकेश भटनागर ने इस शिकायत को विश्वविद्यालय की इंटरनल कम्प्लेंट्स कमेटी (आईसीसी) को जांच के लिए सौंप दिया था. कुलपति द्वारा यह आश्वासन भी दिया गया था कि दोष साबित होने पर आरोपी खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इसके बाद 25 अक्टूबर 2018 लेकर 30 नवंबर 2018 तक आईसीसी द्वारा इस मामले की जांच की गई, जहां कमेटी ने सभी पीड़ितों, गवाहों, आरोपी, विभागाध्यक्ष, पूर्व विभागाध्यक्षों और मामले से जुड़े हुए लोगों से बात की है.

डेढ़ दर्जन से ऊपर शिकायतकर्ताओं, गवाहों और दस पूर्व विभागाध्यक्षों, शिक्षकों, कर्मचारियों से बात करने के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी, जिसमें उसने प्रो. चौबे पर लगे आरोपों सिद्ध पाया. कमेटी की जांच में यह भी सामने आया कि प्रो. चौबे छात्राओं के साथ अश्लील हरकतों के आदी हैं और लंबे समय से ऐसा करते आ रहे हैं.

छात्राओं के आरोप

आईसीसी रिपोर्ट के अनुसार छात्राओं की आपबीती प्रो. चौबे के व्यवहार पर सवालिया निशान खड़े करती है. रिपोर्ट में एक पहली शिकायतकर्ता ने बताया, ‘प्रो. चौबे अक्सर शारीरिक बनावट को लेकर कमेंट करते थे और क्लास में महिलाओं के रिप्रोडक्टिव सिस्टम और जननांगों को लेकर बातें करते थे. उक्त विषय प्रो. चौबे का न होने के बावजूद भी वे जानबूझकर ऐसी चर्चा करते थे, जो हम लोगों को अत्यंत असहज करता था.’

एक अन्य शिकायतकर्ता ने बताया, ‘प्रो. चौबे की निगाह हमेशा लड़कियों के वक्षस्थल पर होती थी, जो काफी असहज करने वाला होता है. टूर के दौरान उन्होंने मुझसे कहा कि अभी तुम इतनी मोटी हो, तुम्हें समझ नहीं आ रहा है कि मम्मी-पापा को कितनी दिक्कत फेस करनी पड़ेगी, जब वो तुम्हारी शादी के बारे में सोचेंगे.’

इस छात्रा ने आगे बताया, ‘टूर के दौरान पहले दिन शाम को डिनर के बाद कुछ छात्र डांस कर रहे थे. उसी दौरान प्रो. चौबे वहां आए और कुछ अश्लील गाने बजाने को कहा और वल्गर स्टेप्स करने लगे. साथ ही अपनी छाती को अश्लील तरीके से उचकाकर कुछ भद्दे स्टेप्स दिखाते हुए मुझसे उसी तरह डांस करने को कहने लगे.’

एक और छात्रा ने बताया है, ‘टूर के दूसरे दिन हम लोग समुद्र तट पर गए थे. मैंने जैकेट और केप्री पहना हुआ था और एक कम गहराई वाली जगह पर अकेली नहा रही थी. तभी प्रो. चौबे अचानक से पास आए और मुझे पीछे से कमर से पकड़ लिया. इसके बाद अपने हाथ ऊपर ले जाते से मेरे शरीर के ऊपरी हिस्से को छूते हुए अपने हाथ को मेरे कपड़े के अंदर ले गए. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारा तो वो सब कुछ दिखा गया, जो नहीं दिखना चाहिए था और फिर मेरे कपड़े को ठीक करने लगे.

एक शिकायतकर्ता ने यह भी बताया है कि एक बार क्लास में पढ़ाते हुए प्रो. चौबे ने एक छात्रा से दरवाजा बंद करने के लिए कहा, लेकिन जब वह दरवाजा ठीक से बंद नहींकर सकी, तो उन्होंने इस बारे में अभद्र टिप्पणी की.

एक और शिकायतकर्ता कहती हैं, ‘ट्रेन में बैठते ही प्रो. चौबे अजीब नज़र से देखने लगते, उनकी नजरें केवल लड़कियों के बॉडी पार्ट्स पर होतीं. टूर के दौरान एक बार मैं आइसक्रीम खा रही थी तो वे कहने लगे कि तुम आइसक्रीम खा रही हो इसलिए ऐसी (मोटी) हो, तुम्हारे मां-बाप को तुम्हारी शादी की चिंता होगी और वो परेशानी में पड़ जाएंगे.

एक और शिकायतकर्ता ने बताया, ‘टूर के दौरान नंदनकानन पार्क में अंधेरा होने की वजह से हम सब छात्र- छात्राएं एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए थे, तो वे बोले लड़कियों अपना ‘सामान’ बचाकर रखना, यहां अंधेरा है.’

टूर पर गई एक अन्य छात्रा ने बताया, ‘टूर से पहले जब क्लास में उससे संबंधित चर्चा चल रही थी तो प्रो. चौबे ने कपड़ों को लेकर ऐसी बातें कही, जो काफी शर्मनाक थीं. वे हमें बता रहे थे कि समुद्र तट पर किस तरह के कपड़े और किस तरह के अंडरगारमेंट्स पहनने चाहिए.’

इन सभी के अलावा कई अन्य छात्राओं ने प्रो. चौबे पर अभद्रता के आरोप लगाए हैं. एक लड़की ने अपने बयान में कहा, ‘टूर के दौरान जब हम लोग बोटिंग के लिए जा रहे थे, तो सभी लोग छोटे-छोटे समूह में अलग-अलग नाव में थे. मैं प्रो. चौबे वाली बोट में थी, जहां मेरे अलावा बाकी लड़के थे. बोट पर केवल एक लड़की को देखकर उन्होंने कमेंट किया कि मेरी बोट में केवल एक ही लड़की क्यों है.’

छात्रा ने आगे बताया, ‘इसके बाद वे मेरे पास आकर बैठ गए और लड़के-लड़कियों के संबंधों के बारे में बातें करने लगे. वे यह भी बोले कि हम लोग बोट में जा रहे हैं, किसी को टॉयलेट जाना हो तो? यूरीन रिटेंशन लड़कियों में ज्यादा होता है, लड़के नहीं कर पाते. जब मैं उनकी ऐसी अश्लील बातों को अनसुना कर देती तो वे जबरन पूछते कि क्या तुमने सुना? जब मैं न कहती, तो उस बात को दोहराते जो मेरे लिए काफी शर्मनाक था.’

प्रो. चौबे के बारे में शिकायत सिर्फ लड़कियों ने नहीं की है. उनके व्यवहार के बारे में छात्रों ने भी आईसीसी के सामने अपनी शिकायत दर्ज करवाई है.

एक छात्र ने आईसीसी को बताया, ‘वे अच्छे टीचर नहीं है. हमेशा शादी, प्यार, लड़कियों के बॉडी पार्ट्स और डबल मीनिंग बातें करते हैं. किसी में भी सर को कुछ कहने की हिम्मत नहीं थी, लेकिन जब हमारी क्लासमेट के साथ समुद्र तट पर हुई घटना के बारे में पता चला, तो बहुत बुरा लगा. बाद में अन्य छात्राओं ने भी उनके व्यवहार के बारे में बताया और हम सबने फैसला किया कि इसके खिलाफ रिपोर्ट करेंगे.’

BHU Science Department

बीएचयू परिसर (फोटो: रिज़वाना तबस्सुम)

प्रो. चौबे का आरोपों से इनकार

आईसीसी ने छात्राओं के आरोपों के बारे में आरोपी प्रो. चौबे से भी बात की, जहां उन्होंने आरोपों से साफ इनकार किया. उन्होंने बताया कि वे 2007 से बीएचयू से जुड़े हुए हैं और 2013 से मैमेलियन फिजियोलॉजी के प्रोफेसर हैं, जहां वे प्रैक्टिकल क्लास और लैबोरेट्री के काम में भी जुड़े रहते हैं.

इस टूर के विषय में प्रो. चौबे का कहना था कि यह विभागाध्यक्ष का फैसला था जिसमें भुवनेश्वर, पुरी, चिल्का लेक और नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क जाना था, जहां उनके अलावा दो पुरुष प्रोफेसर और एक महिला प्रोफेसर का जाना तय हुआ था.

उन्होंने कहा कि इसकी तैयारी करने के लिए विद्यार्थियों की एक कमेटी बनाई गई, जिसने टूर संबंधी बुकिंग आदि किए. हालांकि कमेटी के सदस्य और टूर की मॉनिटरिंग कर रहे एक छात्र ने प्रो. चौबे के कथन को पूरी तरह खारिज किया.

छात्र ने कहा, ‘भले ही हम लोगों की कमेटी बनी हो लेकिन सारे फैसले वे ही कर रहे थे. वे न सिर्फ हमारी बातों की उपेक्षा कर रहे थे, बल्कि हमें उनके मुताबिक चलने के लिए ऑर्डर भी कर रहे थे.

एक छात्रा द्वारा टूर के दौरान अभद्र डांस स्टेप्स करने की शिकायत पर उनका कहना था कि उन्होंने उस लड़की को वहां डांस करने से मना किया था क्योंकि किसी स्टूडेंट द्वारा वीडियो बनाया जा रहा था.

समुद्र तट पर एक अन्य छात्रा के साथ हुई अश्लील हरकत की शिकायत पर प्रो. चौबे ने कहा, ‘समुद्र से बड़ी-बड़ी लहरें आ रही थीं इसलिए मैंने उसे सचेत रहने के लिए कहा था.’

आइसक्रीम खाने को लेकर एक छात्रा द्वारा की गई भद्दी टिप्पणी की शिकायत पर प्रो. चौबे का कहना था, ‘मैंने सिर्फ इतना कहा कि आइसक्रीम स्वास्थ्यवर्धक नहीं है, इसके बाद वो रोने लगी. मैंने उससे माफी भी मांगी, लेकिन उसने मेरा मूड खराब कर दिया.’

‘जो शिकायत विद्यार्थियों ने अब की, इसे बहुत पहले हो जाना चाहिए था’

आईसीसी ने छात्राओं के आरोपों के बारे में जंतु विज्ञान विभाग के अन्य अध्यापकों से भी बात की है. रिपोर्ट के अनुसार एक अन्य प्रोफेसर ने प्रो. चौबे के बारे में कहा, ‘मेरी बेटी भी उनसे पढ़ चुकी है. उसने बताया था कि प्रो. चौबे बहुत जल्दी अपने विषय से भटक जाते हैं और अपनी अनर्गल बातों से बच्चों को असहज कर देते हैं.’

टूर पर गई महिला प्रोफेसर ने स्वीकारा कि छात्राओं ने प्रो. चौबे के व्यवहार के बारे में उन्हें बताया था. उन्होंने कहा, ‘बच्चों ने वहीं पर कहा था कि इनकी निगाहें अच्छी नहीं है, डीन से कह दीजिए हमारी क्लास में चौबे सर को न लगाएं.’

छात्राओं के आरोप की तस्दीक करते हुए उन्होंने बताया कि नंदनकानन पार्क में प्रो. चौबे द्वारा अभद्र टिप्पणी की गई थी. उन्होंने यह भी बताया कि टूर के दौरान एक दिन प्रो. चौबे देर रात कुछ बिल साइन कराने के लिए होटल में उनके कमरे आ गए थे, जो उन्हें ठीक नहीं लगा था.

महिला प्रोफेसर ने यह भी बताया कि इससे पहले भी प्रो. चौबे के खिलाफ शिकायत आई थी. उनकी हरकतों के चलते एक छात्रा, जिसके वो सुपरवाइज़र थे, ने अपना सुपरवाइज़र बदल दिया था.

आईसीसी की रिपोर्ट के अनुसार जंतु विज्ञान विभाग के वर्तमान विभागाध्यक्ष ने अपने बयान में आरोपी प्रो. चौबे को अकादमिक रूप से कमजोर और बहुत अधिक बोलने वाला व्यक्ति बताया. उनके अनुसार आरोपी के बारे में पूर्व विभागाध्यक्षों की राय भी अच्छी नहीं है. पहले भी उनके खिलाफ कई शिकायतें आई हैं लेकिन वे लिखित शिकायत नहीं थीं.

उन्होंने यह भी बताया है कि टूर से आने के बाद इस शिकायत के पहले प्रो. चौबे ने उनसे कई बार पूछा कि क्या उनके खिलाफ कोई शिकायत आई है. वर्तमान विभागध्यक्ष ने प्रो. चौबे द्वारा छात्रों के नंबर काटने की धमकी दिए जाने की बात भी मानी. उन्होंने कहा है ‘छात्रों ने बताया है कि प्रो. चौबे उन्हें धमका रहे हैं कि वे उन्हें इस सेमेस्टर में नहीं तो अगले सेमेस्टर तो पढ़ाएंगे ही, और अगर छात्रों ने शिकायत की तो वे उनके नंबर काट लेंगे.’

विभाग की एक पूर्व विभागाध्यक्ष ने आईसीसी को बताया, ‘इससे पहले भी टूर पर गई नौ लड़कियों ने प्रो. चौबे के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन लिखित शिकायत नहीं थी, जिसकी वजह से उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी. बच्चों द्वारा ये शिकायत जो आज की गई है, उसे बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था.’

आईसीसी रिपोर्ट के मुताबिक इन लोगों के अलावा अन्य लोगों ने भी प्रो. चौबे पर लगे आरोपों से सहमति जताते हुए छात्र-छात्राओं के आरोपों का समर्थन किया था. उनका कहना है कि आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ पहले से काफी शिकायतें हैं, लेकिन उनके मौखिक होने के कारण कभी कोई कार्रवाई नहीं हो पायी.

कमेटी की रिपोर्ट का निष्कर्ष

इस पूरी घटना पर आईसीसी सदस्यों की चिंता जाहिर करते हुए कमेटी ने लिखा है कि यह अत्यंत दुखद और घोर चिंता का विषय है कि ‘सम्मानित शिक्षक’ का चोला ओढ़े एक व्यक्ति अपनी वरिष्ठता और मूल्यांकन व नंबर देने की ताकत का इस्तेमाल गलत कामों के लिए कर रहा है.

कमेटी ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ पहले की गई शिकायतों को पूर्व पदाधिकारियों द्वारा मौखिक प्रकृति का बताते हुए कार्रवाई न करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि ऐसा न होने के चलते ही आरोपी प्रोफेसर की हिम्मत बढ़ी और उन्होंने छात्राओं के साथ अपना गलत व्यवहार जारी रखा. अगर पहले ही कोई कार्रवाई हुई होती, तब ऐसा नहीं होता.

कमेटी ने रिपोर्ट में कमेटी ने सक्षम अधिकारियों को सलाह भी दी है कि कोई भी शिकायत हो, भले ही मौखिक हो लेकिन उसका संज्ञान लेकर कार्रवाई करें, ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें. इस मामले के मद्देनजर कमेटी द्वारा अनुशंसा की गई कि-

– आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करते समय यह तथ्य ध्यान में रखा जाना चाहिए कि कमेटी ने आरोपी को सभी आरोपों में दोषी पाया है. इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि आरोपी ने शिकायतकर्ताओं को धमकाकर न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है. कमेटी का यह भी मानना है कि उसके सामने आई जानकारी के आधार पर, आरोपी का यह दावा कि उसके खिलाफ साजिश हुई है, गलत है और कमेटी उन पर लगे आरोपों को सच मानती है.

– गलत आचरण की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम (CCS Rules) के तहत सबसे सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013 के उद्देश्यों की पूर्ति हो क्योंकि तभी असल न्याय हो सकेगा.

विद्यार्थियों का आरोप, नहीं हुई उचित कार्रवाई

आरोप है कि विद्यार्थियों छात्रों को न्याय दिलाने का आश्वासन फौरी तौर पर गुस्सा शांत कराने का एक हथकंडा मात्र निकला और सभी आरोपों में दोषी पाए गए आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए प्रो. चौबे को विश्वविद्यालय आने की अनुमति दे दी गई.

अक्टूबर 2018 में आईसीसी को जांच सौंपे जाने के बाद से प्रो. चौबे को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन द्वारा उन पर क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.

बीएचयू के कुलपति राकेश भटनागर (फोटो साभार: bhu.ac.in)

बीएचयू के कुलपति राकेश भटनागर (फोटो साभार: bhu.ac.in)

दिसंबर 2018 में रिपोर्ट विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल की जनवरी 2019 में हुई एक बैठक में यह रिपोर्ट पेश हुई थी, लेकिन प्रो. चौबे के बारे में कोई फैसला नहीं किया गया. हालांकि इसके बाद जून 2019 में काउंसिल की एक और बैठक हुई.

सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में प्रो. चौबे को जुलाई से बहाल करने का निर्णय लिया गया. इसके बाद बीते अगस्त से प्रो. चौबे ने अपने शैक्षणिक दायित्व संभाल लिए.

इस बारे में बीएचयू के कुलपति राकेश भटनागर से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, ‘उनको मेजर सजा दी गई है, उन्हें सेंसर कर दिया है, कड़ी चेतावनी भी दी गई है. उनके सर्विस रिकॉर्ड में ये बात जुड़ गई है कि वो सेंसर हैं. इस सजा के बाद वो किसी यूनिवर्सिटी के वीसी नहीं बन पाएंगे.’

कुलपति बीएचयू एक्जीक्यूटिव काउंसिल के अध्यक्ष भी हैं. जब उनसे आईसीसी की रिपोर्ट के बाबत पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट पढ़ी है. उन्होंने यह भी कहा कि एक्जीक्यूटिव काउंसिल ने पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद ही ये फैसला लिया है.

काउंसिल की बैठक के मिनट्स के अनुसार, काउंसिल ने प्रो. चौबे के कृत्यों की निंदा की और कहा कि आगे से उन्हें इस तरह की कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी, साथ ही स्टाफ/विद्यार्थियों/शिक्षकों के आचरण के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाएंगे.

कुलपति के अनुसार प्रो. चौबे पर नियमों के तहत कार्रवाई की गई है, हालांकि जब उनसे पूछा गया कि यह कार्रवाई क्या थी, तब वे कोई ठोस उत्तर नहीं दे सके.

प्रशासन के इस रवैये पर छात्र-छात्राओं में खासा रोष है. शिकायत करने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि जब प्रो. चौबे पर क्लास, लैब, शैक्षणिक टूर एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान यौन शोषण और अश्लील हरकतें करने के आरोप सिद्ध हुए हैं, ऐसे में उन्हें फिर से शैक्षणिक दायित्व दिया जाना कौन-सी सजा है?

छात्र-छात्राओं ने यह भी कहा, ‘अब यह तय है कि प्रो. चौबे अपनी ताकत का उपयोग करके आने वाली छात्राओं का फिर से यौन शोषण करेंगें, लेकिन इस केस का हश्र देखकर अब कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराएगा. जब पूरी की पूरी कक्षा को न्याय नहीं मिला तो अकेला इंसान कैसे लड़ाई लड़ेगा?

(रिज़वाना तबस्सुम स्वतंत्र पत्रकार हैं.)