दुनिया

कश्मीर में गिरफ़्तारियों को लेकर चिंतित, सरकार को जल्द से जल्द कराना चाहिए चुनाव: अमेरिका

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इस बयान पर भारत ने आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

A Kashmiri woman walks on a deserted road during restrictions, after scrapping of the special constitutional status for Kashmir by the Indian government, in Srinagar, August 25, 2019. Picture taken on August 25, 2019. REUTERS/Adnan Abidi

श्रीनगर की एक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक नेताओं को हिरासत में लेने और संचार प्रतिबंध लगाए जाने के एक महीने बाद, अमेरिका ने शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने पर चिंता व्यक्त करते हुए भारत से मानवाधिकारों का सम्मान करने का अनुरोध किया.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय अधिकारियों से राज्य के स्थानीय नेताओं से राजनीतिक बातचीत शुरू करने और जल्द से जल्द चुनाव कराने को भी कहा.

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने के बाद ट्रंप प्रशासन की ओर से यह अब तक का सबसे सख्त बयान है.

अमेरिका की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 26 अगस्त के उस बयान के बाद आया है जब उन्होंने कहा था कि उन्होंने 25 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी के साथ रात के खाने पर इस मुद्दे पर चर्चा की थी और कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी को वास्तव में लगता है कि स्थिति उनके नियंत्रण में है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इस बयान पर भारत ने आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

सवालों का जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टेगस ने कहा, ‘स्थानीय राजनीतिक और कारोबारी नेताओं सहित जम्मू कश्मीर में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने और क्षेत्र के निवासियों पर लगे प्रतिबंधों पर हम बहुत चिंतित हैं. हम उन रिपोर्टों को लेकर भी चिंतित हैं जो कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट और मोबाइल फोन की पहुंच को बाधित करने के बारे में बताती हैं.’

उन्होंने कहा, ‘हम अधिकारियों से मानवाधिकारों का सम्मान करने और इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क जैसी सेवाओं तक पहुंच बहाल करने का आग्रह करते हैं. हम स्थानीय नेताओं के साथ भारत सरकार के राजनीतिक जुड़ाव को फिर से शुरू करने और वादा किए गए चुनावों को  जल्द से जल्द कराने के पक्षधर हैं.’

दिल्ली में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी की गई ये टिप्पणियां इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि उनका यह नजरिया 6 अगस्त को अमेरिका की स्थिति से बहुत अलग है, जब उसने भारत से कश्मीर के हालात पर ध्यान देने को कहा था कि जबकि भारत सरकार ने इसे सख्ती से आंतरिक मामला बताया था.

पिछले महीने, फ्रांस में जी -7 की बैठक के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं. उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान 1947 से पहले एक साथ थे और मुझे पूरा विश्वास है कि हम अपनी समस्याओं पर चर्चा कर सकते हैं और उन्हें हल कर सकते हैं.

इस पर ट्रम्प ने कहा था, ‘हमने कल रात कश्मीर के बारे में बात की थी, प्रधानमंत्री को वास्तव में लगता है कि हालात उनके नियंत्रण में हैं. वे पाकिस्तान के साथ बात करते हैं और मुझे यकीन है कि वे कुछ ऐसा कर पाएंगे जो बहुत अच्छा होगा…दोनों सज्जनों (मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान) के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं और मैं यहां हूं. मुझे लगता है कि वे इसे (समस्या का समाधान) स्वयं कर सकते हैं.’

वहीं, विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा था कि मोदी और ट्रम्प के बीच बैठक में जम्मू-कश्मीर पर कोई चर्चा नहीं हुई थी.

बता दें कि 5 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और उसे दो भागों में बांटने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने बहुत ही सावधानीपूर्वक अपना बयान दिया है.

5 अगस्त को ऑर्टेगस ने कहा था, ‘हम लोगों को हिरासत में लिए जाने पर चिंतित हैं और लोगों की व्यक्तिगत आजादी का सम्मान करने के साथ प्रभावित समुदायों से बातचीत करने का अनुरोध करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने की अपील की थी.’

8 अगस्त को अमेरिका ने कहा था कि वह हालात को काफी करीब से देख रहा है. इसके साथ ही उसने इन घटनाक्रमों के व्यापक प्रभाव पड़ने का उल्लेख करते हुए संभावना जताई थी कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है. उसने भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत का समर्थन करते हुए शांति और संयम बरतने के लिए कहा था.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अनौपचारिक विचार-विमर्श के तीन दिन बाद 19 अगस्त को ट्रंप ने मोदी से बात करते हुए क्षेत्र में तनाव कम करने की महत्ता पर जोर दिया था.

20 अगस्त को अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी. एस्पर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात करते हुए जम्मू कश्मीर के भारत का आंतरिक मामला होने की भारत की स्थिति को स्वीकार किया था.