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साहिर लुधियानवी की हस्तलिखित नज़्में, डायरियां और तस्वीरें कबाड़ की दुकान पर मिलीं

फिल्म हैरिटेज फाउंडेशन नाम के संगठन के निदेशक ने बताया कि इन डायरियों में गीतकार साहिर लुधियानवी के रोज़ाना के कार्यक्रम और अन्य निजी बातें दर्ज हैं. उस दौर के संगीतकार रवि, उनके दोस्त और कवि हरबंस द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र भी मिले हैं.

(फोटो साभार: फेसबुक/@filmheritagefoundation)

(फोटो साभार: फेसबुक/@filmheritagefoundation)

मुंबई: मशहूर शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी के ढेर सारे बेशकीमती हस्तलिखित पत्र, डायरियां, नज्में और उनकी श्याम-श्वेत तस्वीरें मुम्बई में कबाड़ की एक दुकान से मिलीं. एक गैर लाभकारी संगठन ने इन चीजों का संरक्षण करने के लिए इन्हें महज 3,000 रुपये में खरीदा है.

मुंबई के गैर लाभकारी संगठन फिल्म हैरिटेज फाउंडेशन को हाल ही में जुहू में कबाड़ की एक दुकान में अखबारों और पत्रिकाओं की ढेर में ये चीजें मिलीं और अब उसकी योजना उनके संरक्षण और अभिलेखों की प्रदर्शन की है.

संस्था के संस्थापक निदेशक शिवेंद्र सिंह डुंगरपुर ने कहा, ‘इन डायरियों में उनके रोजाना के कार्यक्रम जैसे गाने की रिकार्डिंग के लिए वे कहां जाएंगे और अन्य निजी बातें आदि हैं. कई नज़्में और नोट भी हैं. इन नोटों का संबंध उनके प्रकाशन संगठन ‘पार्चियां’ से है.’

उन्होंने बताया, ‘इन चीजों में उस दौर के संगीतकार रवि, उनके दोस्त और कवि हरबंस द्वारा उन्हें लिखे गए पत्र भी हैं. कुछ पत्र अंग्रेजी और कुछ उर्दू में हैं. बाकी कृतियां उर्दू में हैं.’

उन्होंने कहा कि साहिर की कुछ निजी तस्वीरें, कुछ तस्वीरें उनकी बहनों और दोस्तों के साथ तथा कुछ पंजाब में उनके घर के हैं.

फाउंडेशन के विशेषज्ञ उन नज़्मों का अध्ययन कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि उनमें से कौन प्रकाशित नहीं हुईं.

डुंगरपुर ने कहा, ‘यह घटना गुरु दत्त की फिल्म प्यासा के दृश्य की याद दिलाती है, जिसमें उनकी नज़्में और कृतियां कबाड़ की दुकान पर मिली थीं.’

उन्होंने कहा कि फाउंडेशन ने साहिर से जुड़ी ये सारी चीजें 3,000 रुपये में खरीदी हैं.

गीतकार साहिर लुधियानवी (1921-1980) को उनके सदाबहार गीतों के लिए जाना जाता था, जिन्हें आज भी भुलाया नहीं जा सका है. वह हिंदी और उर्दू में लिखा करते थे. 1921 में उनका जन्म पंजाब के लुधियाना शहर में हुआ था.

उन्होंने गुरुदत्त की प्यासा (1957), राज कपूर की फिल्म फिर सुबह होगी (1958), अशोक कुमार की फिल्म गुमराह (1963) और अमिताभ बच्चन की फिल्म कभी कभी (1976) के लिए गीत लिखे थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)