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उत्तर प्रदेश में ख़बर छापने पर छह पत्रकारों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज, एक गिरफ़्तार

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में सरकारी स्‍कूल के अंदर बच्‍चों के झाड़ू लगाने का वीडियो बनाने वाले एक पत्रकार को पुलिस ने मामला दर्ज करके गिरफ़्तार कर लिया है. वहीं बिजनौर में सरकारी नल से एक दलित परिवार को पानी भरने से दबंगों द्वारा कथित तौर पर रोके जाने के चलते उनके पलायन करने की खबर छापने के बाद पांच पत्रकारों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड-डे मील के तहत बच्चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर करने के कारण प्रशासन द्वारा एक पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद छह अन्य पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है. इसमें से एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है.

आजमगढ़ जिले में सरकारी स्‍कूल के अंदर बच्‍चों के झाड़ू लगाने का वीडियो बनाने वाले एक पत्रकार को पुलिस ने मामला दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है, वहीं सरकारी नल से एक दलित परिवार को पानी भरने से दबंगों द्वारा कथित तौर पर रोके जाने के चलते उनके पलायन करने की खबर छापने के बाद पांच पत्रकारों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया है.

बच्चों द्वारा झाड़ू लगाने की फोटो खींचने वाले पत्रकार के साथी पत्रकार सुधीर सिंह ने आरोप लगाया है कि पत्रकार को सरकारी काम में बाधा डालने और रंगदारी मांगने के झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है. सुधीर सिंह ने अन्य पत्रकारों के साथ जिलाधिकारी एनपी सिंह से मुलाकात की और उन्हें अवैध गिरफ्तारी के बारे में जानकारी दी.

जिलाधिकारी ने कहा, ‘पत्रकारों के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा. हम मामले को देखेंगे.’ उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

सुधीर सिंह ने बताया कि स्थानीय पत्रकार संतोष जायसवाल को पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया. उन्होंने स्कूल में बच्चों के झाड़ू लगाने की फोटो खींच ली थी और स्कूल प्रशासन के ‘अवैध कृत्य’ की जानकारी देने के लिए पुलिस को फोन किया था.

सुधीर सिंह ने बताया कि जायसवाल की कॉल पर पुलिस स्कूल पहुंच गई और जायसवाल और उदयपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राधे श्याम यादव को थाने ले गई. सुधीर सिंह ने बताया कि फूलपुर थाने में प्रधानाध्यापक ने जायसवाल के खिलाफ तहरीर दी जिसके आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

पत्रकार के खिलाफ छह सितंबर को प्राथमिकी संख्या 237 दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि जायसवाल अक्सर स्कूल आते थे और पुरुष एवं महिला शिक्षकों से तथा छात्रों से बदसुलूकी करते थे और अपना अखबार सब्सक्राइब करने को कहते थे.

यादव ने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि घटना के दिन जायसवाल स्कूल आए और बच्चों को झाड़ू लगाने को कहा ताकि इसका फोटो खींचा जा सके. यादव ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस कृत्य का विरोध किया तो जायसवाल स्कूल परिसर से चले गए, लेकिन उनकी गाड़ी वहीं थी और बाद में उन्होंने उनसे धन मांगा.

दिल्ली की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के लिए स्ट्रिंगर के तौर पर काम करने वाले सुधीर सिंह ने पत्रकार के खिलाफ आरोपों का खंडन किया और कहा कि स्थानीय पुलिस उनके पीछे पड़ी थी.

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उन्होंने कहा कि जायसवाल ने गत 19 मई को उत्तर प्रदेश पुलिस के ट्विटर हैंडल पर फूलपुर के कोतवाल शिवशंकर सिंह की बिना नम्बर की और काली फिल्म लगी कार की फोटो पोस्ट की थी. इसके बाद पुलिस ने ट्वीट किया कि यह फोटो दो माह पहले की है जब वाहन खरीदा गया गया था. अब नम्बर प्लेट भी लग गई है.

 

हालांकि, कुछ ही देर बाद एक अन्य युवक ने ट्वीट कर दावा किया कि कोतवाल ने जो रजिस्ट्रेशन नम्बर दिया है वह कार का नहीं बल्कि मोटरसाइकिल का है. इसके बाद जायसवाल ने फूलपुर कोतवाल के इस कारनामे की खबर छाप दी. तभी से ही कोतवाल उनके पीछे पड़े थे और साजिश के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया गया.

पवन जायसवाल के संतोष जायसवाल के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई पर प्रदेश के पत्रकार संगठनों ने सवाल उठाया.

लखनऊ मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने ट्वीट कर लिखा, ‘यूपी पुलिस पत्रकारों के खिलाफ दादागिरी पर उतर गई है. मामले को उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय और यूपी डीजीपी के संज्ञान में लाते हुए उन्होंने कहा, पवन के बाद अब आजमगढ़ पुलिस ने खबर छापने से नाराज होकर पत्रकार संतोष जायसवाल को जेल भेज दिया. उन्होंने इंस्पेक्टर फूलपुर के अवैध स्कॉर्पियो गाड़ी रखने की छबर छापी थी.’

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आजमगढ़ पुलिस ने ट्वीट किया, ‘उक्त प्रकरण में अभियुक्त संतोष कुमार जायसवाल द्वारा शिक्षकों व बच्चों के साथ अभद्र व्यवहार करने, गाली गुप्ता देने तथा धमकी देने के संबंध में वादी श्री राधेश्याम यादव प्रधानाचार्य द्वारा थाना फूलपुर पर अभियोग पंजीकृत कराया गया है.’

वहीं, सरकारी नल से एक दलित परिवार को पानी भरने से दबंगों द्वारा कथित तौर पर रोके जाने के चलते उनके पलायन करने की खबर छापने के बाद पांच पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किया गया मामला जिला प्रशासन ने वापस लेने का आश्वासन दिया है.

हालांकि, पत्रकारों ने एक संघर्ष समिति का गठन कर शनिवार को जिला प्रशासन से बात की. पत्रकारों के खिलाफ मामला दर्ज किये जाने पर समिति के विरोध दर्ज कराने पर जिला प्रशासन ने उन्हें मामला वापस लेने का आश्वासन दिया.

संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्य ज्योतिलाल शर्मा ने बताया कि जिलाधिकारी रमाकांत पांडेय और पुलिस अधीक्षक संजीव त्यागी ने मामला वापस लेने का आश्वासन दिया है.

वहीं, क्षेत्राधिकारी (सीओ) महेश कुमार के मुताबिक मंडावर थाना क्षेत्र के तहत बसी गांव में एक विधवा दलित महिला ने अगस्त माह के अंत में थाने में एक तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पड़ोस के कुछ दबंग लोगों ने सरकारी नल से पानी भरने गयी उनकी बेटी को पानी नहीं भरने दिया और उसके साथ मारपीट की.

पुलिस ने इस प्रकरण में दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया था. पीड़िता ने इसके बाद फिर से पानी नहीं भरने देने और धमकाने का आरोप लगाते हुए अपने मकान पर बिकाऊ है का पोस्टर चिपका दिया.

इस घटना की खबर प्रकाशित होने पर दो नामजद -पत्रकार शकील अहमद और पत्रकार आशीष तोमर- के अलावा तीन अन्य पत्रकारों के खिलाफ मंडावर थाना में सात सितंबर को एक रिपोर्ट दर्ज की गई.

इसमें पुलिस की छवि धूमिल करने,सामाजिक समरसता नष्ट करने, जातिगत तनाव पैदा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए थे.

बता दें कि पिछले दिनों मिर्जापुर जिले में मिड-डे मील के नाम पर बच्‍चों को नमक-रोटी बांटने का वीडियो बनाकर खुलासा करने वाले स्‍थानीय पत्रकार पवन जायसवाल पर जिला प्रशासन ने कई आपराधिक मामले दर्ज करवा दिए थे.

पवन जायसवाल का आरोप है कि जिला प्रशासन ने अपनी बदनामी होते देख उनके ऊपर ये मुकदमे दर्ज करवाए हैं. पवन ने कहा कि वह तो केवल खबर के लिए स्कूल गए थे जो कि उनका काम था. जाने से पहले उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) बृजेश सिंह को फोन करके सूचना भी दी थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)