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सहारनपुर में जातीय संघर्ष के बाद तनाव बरक़रार, डीएम-एसएसपी हटाए गए

सहारनपुर में जातीय संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. बुधवार को भी एक व्यक्ति को गोली मार दी गई. प्रमोद पांडे सहारनपुर के नए डीएम और बबलू कुमार को जिले का नया एसएसपी बनाया गया है.

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(फाइल फोटो: पीटीआई)

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में राजपूत और दलितों के बीच हिंसा के बाद तनाव की स्थिति बनी हुई है. इसी बीच राज्य सरकार ने सहारनपुर के एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे और डीएम एनपी सिंह को सस्‍पेंड कर दिया है. शहर में हुई हालिया हिंसा के बाद यह कार्रवाई की गई है. अब प्रमोद पांडे सहारनपुर के नए डीएम होंगे, जबकि बबलू कुमार को जिले का नया एसएसपी बनाया गया है.

गौरतलब है कि सहारनपुर में जातीय संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. जिले में बुधवार को एक व्यक्ति को गोली मार दी गई है, जबकि मंगलवार को हुई हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि 20 अन्य लोग घायल हो गए थे. इस दौरान कुछ घरों में आग भी लगा दी गई थी. मंगलवार को हुई हिंसा के मामले में अभी तक 24 लोगों की गिरफ्तारी हुई है.

वहीं, हिंसा में मारे गये आशीष के परिजनों को राज्य सरकार ने 15 लाख और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

गौरतलब है कि मंगलवार को राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा प्रमुख मायावती ने सहारनपुर का दौरा किया था. ताजा हिंसा के लिए बीजेपी ने मायावती को जिम्मेदार ठहराया है.

इस बीच गृह सचिव आईजी एसटीएफ समेत कई बड़े अधिकारियों को सहारनपुर भेजा गया है. इस दल में गृह सचिव मणि प्रसाद मिश्रा, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था आदित्य मिश्रा, महानिरीक्षक एसटीएफ अमिताभ यश और डीजी सुरक्षा विजय भूषण शामिल हैं .

वहीं, यूपी के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने इस पर कहा कि सहारनपुर में अमन और शांति कायम हो गई थी. मायावती अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने गईं.

केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान ने कहा कि बसपा इस मसले का राजनीतिकरण कर रही है. उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

दूसरी ओर बसपा अध्यक्ष मायावती ने जातीय हिंसा और जान-माल के नुकसान के लिये राज्य की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जातिवादी तत्व सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करके माहौल बिगाड़ रहे हैं.

मायावती ने सहारनपुर के अपने दौरे से लौटने के बाद जारी एक बयान में कहा कि भाजपा तथा संघ के जातिवादी, शरारती तथा आपराधिक तत्वों ने पहले सांप्रदायिकता का ज़हर घोलकर अपने राजनीतिक तथा चुनावी स्वार्थ की पूर्ति की और अब सत्ता में आने के बाद जातिवादी हिंसा पर उतारू हो गये हैं.

उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि सहारनपुर में जातीय हिंसा तथा संघर्ष थम नहीं पा रहा है और शासन-प्रशासन की मिलीभगत से निर्दोष लोगों को हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है और उनकी हत्या भी की जा रही है.

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)