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चिन्मयानंद ने लगभग सभी आरोपों को स्वीकार किया: एसआईटी

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है. चिन्मयानंद पर क़ानून की एक छात्रा ने बलात्कार का आरोप लगाया है.

चिन्मयानंद. (फोटो: पीटीआई)

चिन्मयानंद. (फोटो: पीटीआई)

शाहजहांपुर/लखनऊ: कानून की छात्रा से बलात्कार के आरोपी पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता स्वामी चिन्मयानंद सहित चार लोगों को शुक्रवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गिरफ्तार किया है.

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार एसआईटी प्रमुख और पुलिस महानिरीक्षक नवीन अरोड़ा ने कहा, ‘स्वामी चिन्मयानंद ने खुद पर लगे लगभग सभी आरोप स्वीकार कर लिए हैं, जिसमें यौन वार्तालाप और मालिश के आरोप भी शामिल हैं. परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.’

अरोड़ा ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि चिन्मयानंद को मसाज (मालिश) की वीडियो क्लिपिंग भी दिखायी गई, जिस पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘जब आपको सब पता ही चल गया है तो मुझे कुछ नहीं कहना. मैं अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा हूं.’

अरोड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चिन्मयानंद को जेल भेज दिया गया है. उन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है.

अधिकारी ने बताया कि चिन्मयानंद को गिरफ्तार करने से पहले एक डॉक्टर से सलाह ली गई.

उन्होंने बताया कि एसआईटी ने मोबाइल कॉल डिटेल के डिजिटल रिकॉर्ड और टोल टैक्स प्लाजा के फुटेज हासिल किए और इस तरह एसआईटी कड़ी से कड़ी जोड़ कर इस मामले में यहां तक पहुंची है.

एनडीटीवी ने पीड़ित छात्रा के वकील के हवाले से बताया है कि 73 वर्षीय चिन्मयानंद पर बलात्कार का आरोप के तहत केस दर्ज नहीं कराया गया है. इसकी जगह उन पर शारीरिक संबंध बनाने के लिए अधिकारों का गलत इस्तेमाल से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

हालांकि पुलिस ने इस आरोप की पुष्टि नहीं की है. इसके अलावा चिन्मयानंद पर महिला का पीछा करने, आपराधिक धमकी और गलत तरीके से बंदी बनाने के आरोप के तहत केस दर्ज किया गया है.

दूसरी ओर बीते 19 सितंबर को छात्रा ने कहा था कि अगर एसआईटी चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार के आरोप के तहत केस दर्ज नहीं करती तो वह खुद को आग लगा लेगी.

गौरतलब है कि शाहजहांपुर स्थित स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की छात्रा ने 23 अगस्त को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण तथा कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने के आरोप लगाने के साथ ही उसे तथा उसके परिवार को जान का खतरा बताया था.

हालांकि छात्रा ने इस वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन छात्रा के पिता ने पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में कहा है कि वह चिन्यमानंद की ओर इशारा कर रही थी.

छात्रा के पिता ने अपनी शिकायत में कहा था कि उनकी बेटी का यौन शोषण किया गया. इसके बाद भाजपा के पूर्व सांसद के खिलाफ आईपीसी की धारा 364 और 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

चिन्मयानंद इस महाविद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं.

चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप में तीन लोग गिरफ़्तार

शुक्रवार सुबह चिन्मयानंद को शाहजहांपुर स्थित उनके आवास ‘दिव्य धाम’ से गिरफ्तार किया गया था. विशेष जांच दल ने उन्हें सीजेएम की अदालत में पेश किया था जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है.

वहीं चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप में तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, इनमें से एक छात्रा के साथ मिला था जबकि दो अन्य उसके साथी हैं.

लखनऊ में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘तीन अन्य लोगों को चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. उन्हें भी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है.’

उन्होंने बताया कि रंगदारी मांगने के आरोप में गिरफ्तार किए गए युवकों के नाम संजय सिंह, विक्रम उर्फ ब्रजेश तथा सचिन सेंगर हैं. इनके खिलाफ रंगदारी, साक्ष्य नष्ट करने और आईटी अधिनियम के दुरुपयोग के मामले दर्ज हैं. इन तीनों में से संजय चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली छात्रा के साथ राजस्थान में मिला था. विक्रम और सचिन संजय के दोस्त हैं.

मालूम हो कि चिन्मयानंद पर आरोप लगाने के बाद छात्रा कथित तौर पर लापता हो गई थी. काफी खोजबीन के बाद पुलिस को वह राजस्थान में मिली थी.

इसके बाद उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर उसे दिल्ली में शीर्ष अदालत के समक्ष पेश किया गया. शीर्ष अदालत ने एसआईटी को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है.

इस मामले में पीड़िता के पिता की शिकायत पर कोतवाली शाहजहांपुर में अपहरण और जान से मारने की धाराओं में चिन्मयानंद के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया था, लेकिन इससे एक दिन पहले स्वामी चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने पांच करोड़ रुपये रंगदारी मांगने का भी मुकदमा दर्ज करा दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)