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उत्तर प्रदेशः किसान की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, तहसीलदार को पद से हटाया गया

उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले का मामला. परिजनों का आरोप है कि जेल में किसान को प्रताड़ित किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई. कथित तौर पर बिजली चोरी का जुर्माना न चुका पाने पर किसान को जेल में डाल दिया गया था.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

 

लखनऊः उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले की सहसवान तहसील की जेल में किसान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के एक दिन बाद शुक्रवार को जिले के तहसीलदार को उनके पद से हटा दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार का कहना है कि किसान बृजपाल ने पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत की थी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.

हालांकि, किसान के परिवार का आरोप है कि उसे प्रताड़ित किया गया, जिससे उसकी मौत हुई.

रिपोर्ट के अनुसार, बृजपाल बीते 11 दिनों से जेल में थे. पिछले साल कथित रूप से बिजली चोरी के आरोप के बाद वह 81,947 रुपये का जुर्माना नहीं चुका पाए थे, जिसके बाद उन्हें जेल में डाल दिया गया था.

अगर वह अपनी हिरासत के 14 दिनों के भीतर जुर्माना नहीं चुका पाते तो प्रशासन को उन्हें रिहा कर देना चाहिए था और जुर्माने की राशि को उसकी संपत्ति जब्त करके हासिल की जा सकती थी.

तहसीलदार कुमार का कहना है कि बृजपाल बिजली विभाग को जुर्माना राशि नहीं दे पाया, जिस वजह से उसे हिरासत में ले लिया गया.

उन्होंने कहा, ‘बृजपाल के नाम से रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किया गया था. वह 23 सितंबर के बाद से जेल में था. गुरुवार रात को उसने बेचैनी और पेट में दर्द की शिकायत की और हम उसे सहसवान के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया.’

बृजपाल के भाई महेश ने आरोप लगाया है कि उनके भाई को गलती से रिकवरी सर्टिफिकेट भेजा गया.

उन्होंने कहा, ‘वह निर्दोष था. अधिकारियों का कहना है कि उसने जुर्माना राशि का भुगतान नहीं किया था, यह आरोप गलत है. रिकवरी सर्टिफिकेट में गलत नाम था. इसमें लिखा है कि ओमकार का बेटा बृजपाल जबकि हमारे पिता का नाम ओमपाल है. जिस शख्स ने असल में बिजली चोरी की थी, उसने गांव छोड़ दिया है और बिजली विभाग ने मेरे भाई पर जुर्माना लगा दिया.’

रिपोर्ट के अनुसार, महेश ने अपने भाई को प्रताड़ित करने के लिए तहसीलदार और उसके स्टाफ को आरोपी बताया है. महेश ने कहा कि वह आखिरी बार बृजपाल से बीते एक अक्टूबर को मिले थे. बृजपाल उस दिन ठीक थे. उन्होंने बताया था कि उनके साथ कुछ गलत हो सकता है.

जिला मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार सिंह का कहना है, ‘मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जो सदर एसडीएम प्रशांत मौर्य करेंगे. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार को जांच रिपोर्ट जमा होने तक पद से हटा दिया गया है. मैंने जांचकर्ता अधिकारी से जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा है.’

गलत आदमी के नाम रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने के आरोपों पर सहसवान एसडीएम संजय सिंह ने शुरुआत में कहा कि गलत नाम का इस्तेमाल किया गया था लेकिन बाद में इसे ओमपाल के बेटे बृजपाल कर सुधार किया गया.

उन्होंने कहा, ‘रिकवरी सर्टिफिकेट में सुधार किया गया, जिसके बाद बदायूं के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर ने इस पर हस्ताक्षर किए थे. बृजपाल ने ही जुर्माना राशि अदा नहीं की.’

चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. मंजीत सिंह ने कहा कि बृजपाल की ऑटोप्सी दो डॉक्टरों की एक टीम ने की थी. उनकी मौत के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका है.

उन्होंने कहा, ‘आगे की जांच में शायद उसकी मौत के सही कारण का पता लग सके.’