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बांग्लादेश की अदालत ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को गिरफ़्तारी वारंट जारी किया

बांग्लादेश की कंपनी ग्रामीण कम्यूनिकेशंस से बर्ख़ास्त किए गए तीन कर्मचारियों ने प्रबंधन के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा दायर किया है. उनकी शिकायत है कि कंपनी में ट्रेड यूनियन के गठन की वजह से उन्हें निकाल दिया गया. मोहम्मद यूनुस इस कंपनी के अध्यक्ष हैं.

मोहम्मद यूनुस. (फोटो: रॉयटर्स)

मोहम्मद यूनुस. (फोटो: रॉयटर्स)

ढाका: बांग्लादेश के अर्थशास्त्री और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को उनकी कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों की बर्खास्त करने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में पेश होने में विफल रहने के बाद गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है.

अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. ढाका की एक अदालत के एक न्यायाधीश ने बुधवार को यह आदेश जारी किया.

अदालत के क्लर्क एम. नूरुज्जमां ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि ‘ग्रामीण कम्युनिकेशंस’ (जीसी) के बर्खास्त कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें कंपनी से निकाल दिया गया क्योंकि उन्होंने एक ट्रेड यूनियन की स्थापना की.

नूरुज्जमां ने बताया कि जीसी के अध्यक्ष यूनुस सुनवाई के दौरान अदालत में पेश नहीं हुए क्योंकि वह विदेश में थे. कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एक वरिष्ठ प्रबंधक अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई.

यूनुस के वकील काजी इरशादुल आलम ने एएफपी को बताया, ‘वह (यूनुस) अदालत में पेश होने के लिए कोई भी सम्मन मिलने से पहले ही बांग्लादेश से बाहर चले गए थे. जैसे ही वह लौटते हैं, उचित कानूनी कदम उठाया जाएगा.’

ढाका के एक लेबर कोर्ट ने बीते 10 जुलाई को ग्रामीण कम्युनिकेशंस के तीन कर्मचारियों को बर्खास्त करने के मामले में मोहम्मद यूनुस और दो वरिष्ठ अधिकारियों को आठ अक्टूबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था.

ग्रामीण कम्युनिकेशंस, ग्रामीण बैंक की आईटी इकाई है.

बीते जून में ग्रामीण कम्युनिकेशंस से बर्खास्त किए जाने के बाद कंपनी के तीन पूर्व कर्मचारियों ने प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था. आरोप है कि कार्यस्थल पर ट्रेड यूनियन के गठन की वजह से इन्हें बर्खास्त किया गया था.

इन तीनों पूर्व कर्मचारियों ने उत्पीड़न, धमकी देने और ट्रेड यूनियन बनाने की वजह से बर्खास्त करने का आरोप लगाते हुए तीन अलग-अलग मुकदमे दायर किए हैं.

मालूम हो कि मोहम्मद यूनुस साल 2015 में भी विवादों में आए थे, जब बांग्लादेश के राजस्व अधिकारियों ने 1.51 मिलियन डॉलर का टैक्स न चुका पाने की वजह उन्हें पेश होने का आदेश दिया था.

साल 2007 से 79 वर्षीय अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना से टकराव की स्थिति रही है, जब उन्होंने देश की हिंसक और ध्रुवीकृत राजनीति को लेकर हसीना के परिवार और उनकी प्रतिद्वंद्वी ख़ालिदा ज़िया को लेकर टिप्पणी की थी.

साल 2011 में यूनुस को ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उन्होंने इस बैंक की स्थापना की थी. पद से हटाने के इस कदम के पीछे कथित तौर पर शेख़ हसीना का हाथ होने की बात कही जाती है.

यूनुस ने साल 1983 में ग्रामीण बैंक की स्थापना की थी. यह बैंक ग्रामीण इलाकों और अधिकांश तौर पर महिला उद्यमियों को बिना कुछ गिरवी रखे छोटे कर्ज मुहैया कराता है. इसकी वजह से बांग्लादेश में गरीबी कम होती देखी गई थी.

इस वजह से मोहम्मद यूनुस को वैश्विक प्रसिद्धि मिली थी और साल 2006 में उन्हें इस काम की वजह से शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया था.

हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, शेख हसीना ने उन पर गरीबों का खून चूसने का आरोप लगाया है. साल 2013 में सरकार ने नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना कर में छूट पाने, शक्ति का दुरुपयोग और विदेशी यात्रा नियमों का उल्लंघन करने को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)