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रैनबैक्सी और फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर और मलविंदर सिंह धोखाधड़ी के मामले में गिरफ़्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड में धन की हेराफेरी के मामले में मलविंदर, शिविंदर सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ़्तार किया है. स्थानीय अदालत ने सभी आरोपियों की चार दिन की पुलिस रिमांड में भेजा.

Malvinder_Shivinder-Singh PTI

मलविंदर और शिविंदर सिंह. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) में धन की कथित तौर पर हेराफेरी के मामले रैनबैक्सी और फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर मलविंदर, शिविंदर सिंह और 3 अन्य आरोपियों की चार दिन की रिमांड को मंजूरी दी है.

दैनिक भास्कर के मुताबिक 2,397 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में सभी आरोपियों को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने शुक्रवार को साकेत कोर्ट में पेश किया, जहां पुलिस ने उनकी 6 दिन की रिमांड की मांग की थी.

मालूम हो कि दिल्ली पुलिस ने आरएफएल में धन की कथित तौर पर हेराफेरी कर 2,397 करोड़ रुपये का गबन करने के आरोप में मलविंदर सिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस की ईओडब्ल्यू द्वारा धन की कथित हेराफेरी कर उसे अन्य कंपनियों में निवेश करने के आरोप में मलविंदर के भाई शिविंदर मोहन सिंह, रेलिगेयर इंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरईएल) के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुनील गोधवानी (58), आरईएल और आरएफएल में महत्वपूर्ण पदों पर काबिज कवि अरोड़ा (48) और अनिल सक्सेना को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.

आरएफएल, आरईएल की सहायक कंपनी है. शिविंदर और उनके बड़े भाई मलविंदर पहले आरईएल के प्रमोटर थे. पुलिस ने कहा था कि मलविंदर के खिलाफ एक लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था क्योंकि वह फरार था.

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (ईओडब्ल्यू) ओपी मिश्रा ने बताया कि गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात उन्हें लुधियाना से हिरासत में लिया गया. ईओडब्ल्यू का एक दल उन्हें यहां लाया और उसके बाद शुक्रवार सुबह उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया.

ईओडब्ल्यू ने मार्च में शिविंदर, गोधवानी और अन्य के खिलाफ आरएफएल के मनप्रीत सिंह सूरी से शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी का प्रबंधन करते समय उन्होंने कर्ज लिया था लेकिन पैसा दूसरी कंपनियों में लगा दिया.

पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने कहा कि चारों का आरईएल और उसकी सहायक कंपनियों पर पूर्ण नियंत्रण था.

मिश्रा ने कहा, ‘उन्होंने अपने नियंत्रण वाली कंपनियों को कर्ज देकर आरएफएल को खराब वित्तीय स्थिति में डाल दिया. जिन कंपनियों को ऋण दिया गया था, उन्होंने जान-बूझकर उसका भुगतान नहीं किया. इससे आरएफएल को 2,397 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.’

वहीं मलविंदर ने यह एफआईआर रद्द करवाने के लिए शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. उनका कहना है कि यह मामला दिल्ली पुलिस के अधिकारक्षेत्र में नहीं आता. इस याचिका पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

इससे पहले बीते अगस्त में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून से जुड़े एक मामले में सिंह बंधुओं के परिसरों पर छापेमारी की थी. अधिकारियों ने बताया था कि मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद यह छापे मारे गए थे.

फोर्टिस विवाद में भी आरोपी हैं सिंह बंधु

1996 में शिविंदर और मलविंदर सिंह ने फोर्टिस हेल्थकेयर की शुरुआत की थी. साल 2018 उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने फोर्टिस के बोर्ड की अनुमति के बगैर 500 करोड़ रुपये निकाले. फंड डायवर्ट करने के आरोपों के बाद दोनों को बोर्ड से निकाल दिया गया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)