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भारत और चीन कारोबार, निवेश, सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक तंत्र स्थापित करेंगे

विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही और अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में न तो कश्मीर मुद्दा उठा और न ही इस पर कोई चर्चा हुई.

तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (फोटो: पीआईबी)

तमिलनाडु के मामल्लापुरम में प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (फोटो: पीआईबी)

मामल्लापुरम: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शनिवार को कारोबार, निवेश और सेवा क्षेत्र से जुड़े विषयों पर एक नया तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की. चीनी राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन पर कदम उठाने सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.

विदेश सचिव विजय गोखले ने शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि समुद्र के किनारे भव्य मामल्लापुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच कुल मिलाकर छह घंटे आपसी चर्चा हुई.

गोखले ने यह भी बताया कि इस अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शी ने आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचार विमर्श किया जाएगा.

विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही और अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में न तो कश्मीर मुद्दा उठा और न ही इस पर कोई चर्चा हुई.

राष्ट्रपति शी ने दोनों देशों के बीच और अधिक सम्पर्क पर जोर दिया और खास तौर पर रक्षा क्षेत्र में सम्पर्क बढ़ाने का जिक्र किया.

विदेश सचिव ने बताया, ‘शी और मोदी दोनों ने ही कहा कि दोनों देशों को भविष्य की ओर देखने की जरूरत है. साथ ही दोनों नेताओं ने इस बात पर भी सहमति जताई कि दोनों देशों को आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए साथ काम करना चाहिए.’

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पिछले दो दिनों में कई सत्रों में हुई आमने-सामने की करीब छह घंटे की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि ‘चेन्नई संपर्क” के जरिए भारत और चीन के संबंधों में सहयोग का आज से एक नया युग शुरू होने जा रहा है.

गोखले ने यहां संवाददाताओं को बताया कि मोदी-शी की बातचीत मुख्यत: वुहान शिखर सम्मेलन के बाद की प्रगति पर केंद्रित रही.

शी मोदी के साथ शिखर वार्ता के लिए कल शुक्रवार को करीब 24 घंटे के भारत दौरे पर आए, जिसकी शुरुआत तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मामल्लापुरम में हुई. दोनों की इस प्रकार की पहली वार्ता पिछले साल वुहान में हुई थी.

गोखले के अनुसार, राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन व्यापार घाटा कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की खातिर तैयार है.

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि व्यापार और निवेश संबंधी मुद्दों के लिए एक नया तंत्र स्थापित किया जायेगा जो कारोबार, निवेश एवं सेवा क्षेत्र से जुड़ा होगा. चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री हु छुन ह्वा और भारत की तरफ से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसका नेतृत्व करेंगे.

गोखले ने कहा कि इसकी रूपरेखा राजनयिक चैनलों के जरिये तय हो जायेगी.

चीनी राष्ट्रपति ने आईटी और फार्मा क्षेत्र में भारत की ओर से चीन में निवेश का स्वागत किया. दोनों देशों ने इस प्रस्तावित तंत्र के जरिये विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.

गोखले ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति ने रक्षा सहयोग बढ़ाने की जरूरत के बारे में बात की और आश्वासन दिया कि क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर विचारविमर्श किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली के महत्व पर जोर दिया. साथ ही दोनों नेताओं ने महसूस किया कि दोनों देशों को महत्वपूर्ण क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग करना चाहिए.

दोनों देशों ने राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने पर 70 कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय किया है जिसमें 35 कार्यक्रम भारत में और 35 कार्यक्रम चीन में होंगे.

गोखले ने बताया कि इस तरह से प्रत्येक सप्ताह एक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. दोनों नेताओं ने इस तरह की अनौचारिक वार्ता को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की.

वार्ता के दौरान एक विषय व्यापार असंतुलन का रहा. गोखले ने बताया कि इस विषय पर प्रधानमंत्री की बात सुनने के बाद राष्ट्रपति शी ने कहा कि चीन इस दिशा में कदम उठाने को तैयार है कि किस प्रकार से इस असंतुलन को कम किया जाए.

क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत इसको लेकर आशान्वित है लेकिन इसमें संतुलन होना चाहिए. कारोबार, सेवा और निवेश में संतुलन होना चाहिए.

गोखले के अनुसार, इस पर राष्ट्रपति शी ने कहा कि इस विषय पर भारत की चिंताओं पर ध्यान दिया जायेगा. उल्लेखनीय है कि आरसीईपी 16 देशों का प्रस्तावित साझा कारोबार ब्लाक है.

दोनों नेताओं के बीच यह शिखर वार्ता ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले पर दो एशियाई देशों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ.

मोदी ने कहा, मतभेदों को विवाद नहीं बनने देंगे भारत और चीन

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ पिछले दो दिन में कई सत्रों में हुई आमने-सामने की बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि हमने मतभेदों को विवेकपूर्ण ढंग से सुलझाने, एक दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशीन रहने और उन्हें विवाद का रूप नहीं लेने देने का निर्णय किया है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि चेन्नई संपर्क के जरिए भारत और चीन के संबंधों में सहयोग का आज से एक नया युग शुरू होने जा रहा है.

अनौपचारिक शिखर वार्ता के दूसरे एवं अंतिम दिन मामल्लापुरम के एक लक्जरी रिजॉर्ट में शी के साथ शिष्टमंडल स्तर पर हुई अपनी बातचीत में मोदी ने ध्यान दिलाया कि ‘‘ भारत और चीन पिछले 2,000 साल में ज्यादातर समय वैश्विक आर्थिक शक्तियां रहें हैं और धीरे-धीरे उस चरण की तरफ लौट रहे हैं.’

मोदी ने कहा, ‘हमने मतभेदों को विवेकपूर्ण ढंग से सुलझाने और उन्हें विवाद का रूप नहीं लेने देने का निर्णय किया है. हमने तय किया है कि हम एक-दूसरे की चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहेंगे.”

मोदी ने पिछले साल चीनी शहर वुहान में शी के साथ अपनी पहली अनौपचारिक शिखर वार्ता के परिणामों का जिक्र करते हुए कहा, ‘वुहान की भावना ने हमारे संबंधों को नयी गति एवं विश्वास प्रदान किया. ‘चेन्नई संपर्क’ के जरिए आज से सहयोग का नया युग शुरू होगा.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वुहान में पहली अनौपचारिक वार्ता के बाद से दोनों देश के बीच रणनीतिक संचार बढ़ा है.

विदेश मंत्रालय के अनुसार, शिष्टमंडल स्तर की वार्ताओं से पहले, शी और मोदी के बीच फिशरमैन कोव रिजॉर्ट में आमने-सामने की करीब एक घंटे बातचीत हुई जिसमें द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए संबंधों को नये सिरे से निखारने की मंशा का स्पष्ट संकेत दिया गया.

दोनों नेताओं को समुद्र तट के पास चहलकदमी करने के दौरान भी बातचीत करते देखा गया. इससे पहले मोदी और शी एक गोल्फ गाड़ी में सवार होकर साथ में रिजॉर्ट पहुंचे.

भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस ले लेने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद दोनों देश के बीच तनाव बढ़ने के बीच शी शुक्रवार को यहां पहुंचे थे.

शुक्रवार को मोदी और शी ने रात्रिभोज के दौरान करीब ढाई घंटे बातचीत की थी. उन्होंने आतंकवाद तथा कट्टरवाद से मिलकर निपटने और द्विपक्षीय संबंधों को नए आयाम देने की प्रतिबद्धता जताई थी.

अधिकारियों ने बताया कि इस तटीय शहर में समुद्र के किनारे भव्य मामल्लापुरम मंदिर परिसर में स्थित एक रंगबिरंगे खेमे में कल हुई बैठक तय समय से काफी लंबी चली. इस दौरान दोनों नेताओं ने तमिलनाडु के स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेते हुए जटिल मामलों समेत कई विषयों पर बातचीत की.

इससे पहले शुक्रवार की दोपहर तमिलनाडु की पारपंरिक वेशभूषा ‘वेष्टि’ (धोती), सफेद कमीज और अंगवस्त्रम पहने मोदी ने अच्छे मेजबान की भूमिका निभाते हुए शी को इस प्राचीन शहर की विश्व प्रसिद्ध धरोहरों ‘अर्जुन तपस्या स्मारक’, ‘नवनीत पिंड’ (कृष्णाज बटरबॉल), ‘पंच रथ’ और ‘मामल्लापुरम मंदिर’ के दर्शन कराए.

इस बीच भारत ने चीनी यात्रियों के लिए बहु प्रवेश केंद्र के साथ पांच साल का पर्यटक ई-वीजा देने की घोषणा की. यह घोषणा राष्ट्रपति शी के दौरे के दौरान की गई.

बीजिंग में भारतीय दूतावास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, ‘ ऐसा अनुमान है कि चीनी नागरिकों के लिए ई-टूरिस्ट वीजा में दी गई यह एकतरफा ढील दोनों देश के बीच आपसी संपर्क को बढ़ाएगा और चीनी पर्यटकों को पर्यटन के लिए भारत को चुनने के लिए प्रोत्साहित करेगा.”

चीन की सरकारी संवाद समिति शिन्हुआ ने खबर दी कि शी और मोदी ने शुक्रवार को अपनी मुलाकात के दौरान संयुक्त विकास एवं समृद्धि हासिल करने के लिए दोनों देश के बीच आपसी संपर्क एवं परस्पर शिक्षा को बढ़ावा देने पर सहमति जताई.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)