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गुजरात: स्कूल की परीक्षा में पूछा गया, गांधीजी ने आत्महत्या करने के लिए क्या किया?

इस सवाल को लेकर विवाद होने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है. हालांकि स्कूल प्रशासन ने महात्मा गांधी की आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ का हवाला देते हुए कहा है कि सवाल में कोई गलती नहीं है.

Mahatma Gandhi Photo Wikimedis commons

(फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

अहमदाबाद: बीते दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती देशभर में मनाई गई. इस दौरान अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं. कहीं पर लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए तो कहीं बापू की याद में समाजवादी नेता कैमरा देख इतना भावुक हो गए कि आंसू ही छलका दिए.

अब गुजरात में 9वीं कक्षा के इंटर्नल परीक्षा में पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. सवाल है, ‘गांधीजी ने आत्महत्या करने के लिए क्या किया?’ गांधीनगर के मानसा तालुका में सुफलाम शाला विकास संकुल समूह के स्कूल में ये सवाल पूछा गया.

सुफलाम शाला विकास संकुल कुछ स्ववित्तपोषित विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों का संगठन है, जिन्हें गांधीनगर में सरकारी अनुदान मिलता है.

स्कूल प्रशासन का कहना है कि सवाल में तथ्यात्मक रूप से कुछ भी गलत नहीं है लेकिन वाक्य थोड़ अस्पष्ट होने और कई जगहों पर खबरों में इस सवाल का गलत अनुवाद होने की वजह से सारी गलतफहमी पैदा हो रही है.

गुजराती में पूछे गए इस सवाल का ज्यादातर खबरों में अनुवाद किया गया- गांधीजी ने आत्महत्या कैसे की? इसकी वजह से इस सवाल को लेकर इतना हंगामा हो रहा है.

संकुल स्कूल के संयोजक एसपी पटेल ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘गांधीजी के मन में आत्महत्या का विचार आने के सवाल का संदर्भ गुजरात राज्य स्कूल पाठ्यपुस्तक बोर्ड (जीएसएसटीबी) की किताब में है. ये बात उनकी आत्मकथा सत्य के प्रयोग में भी है. इसलिए हमें नहीं लगता कि इस सवाल में कोई गलती है.’

इस सवाल को लेकर विवाद उठने के बाद अधिकारियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है. विवाद 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं से पूछे गए एक सवाल को लेकर भी है.

12वीं के छात्र-छात्राओं से पूछा गया है, ‘अपने इलाके में शराब की बिक्री बढ़ने एवं शराब तस्करों द्वारा पैदा की जाने वाली परेशानियों के बारे में शिकायत करते हुए जिला पुलिस प्रमुख को एक पत्र लिखें.’ बता दें कि गुजरात में शराब पर पूरी तरह से पाबंदी है.

 

गांधीनगर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने बताया, ‘स्ववित्तपोषित स्कूलों के एक समूह ने और अनुदान प्राप्त करने वाले स्कूलों ने ये दोनों सवाल शनिवार को हुई अपनी आंतरिक परीक्षाओं में शामिल किए थे. ये प्रश्न बहुत आपत्तिजनक हैं और हमने इसकी जांच शुरू कर दी है. रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी.’

उन्होंने बताया कि सुफलाम शाला विकास संकुल के बैनर तले संचालित होने वाले इन स्कूलों के प्रबंधन ने ये प्रश्न पत्र तैयार किए थे और इनका राज्य शिक्षा विभाग से कोई लेना-देना नहीं है.