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‘दिवाला समाधान’ के सहारे भारत ने विश्व बैंक की कारोबार सुगमता सूची में 14 स्थान की छलांग लगाई

हालांकि भारत कॉन्ट्रैक्ट लागू करने और प्रॉपर्टी रजिस्टर करने जैसे क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर 163वें और 154वें स्थान पर है.

Workers walk in front of the construction site of a commercial complex on the outskirts of the western Indian city of Ahmedabad, in this April 22, 2013 file picture. While India has long suffered from a dearth of workers with vocational skills like plumbers and electricians, efforts to alleviate poverty in poor, rural areas have helped stifle what was once a flood of cheap, unskilled labour from India's poorest states. Struggling to cope with soaring food prices, this dwindling supply of migrant workers are demanding - and increasingly getting - rapid increases in pay and benefits. To match story INDIA-ECONOMY/INFLATION      REUTERS/Amit Dave/Files (INDIA - Tags: BUSINESS CONSTRUCTION EMPLOYMENT TPX IMAGES OF THE DAY)

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: विश्व बैंक की कारोबार सुगमता (इज ऑफ डूइंग बिजनेस) सूची में भारत ने 14 स्थान की छलांग लगाई है और अब वह दुनिया का 63वां ऐसा देश बन गया है जहां कारोबार करना आसान है. विश्व बैंक ने यह सूची बीते गुरुवार को जारी की.

भारत उन शीर्ष दस देशों में शामिल है जिन्होंने इस सूची में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है. यह तीसरी दफा है जब भारत अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों में शीर्ष दस में शामिल रहा है. इसकी प्रमुख वजह दिवाला तथा शोधन अक्षमता कोड (आईबीसी यानी कि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड) को सही तरीके से लागू करना बताया गया है.

भारत ने सबसे अच्छा प्रदर्शन ‘दिवालिएपन का समाधान’ की श्रेणी में किया है, जहां ये 56 स्थान का छलांग लगाते हुए 52वें स्थान पर पहुंच गया है.

आईबीसी लागू होने के बाद से, 2,000 से अधिक कंपनियों ने नए कानून का उपयोग किया है. इनमें से लगभग 470 ने परिसमापन यानी कि लिक्विडेशन शुरू कर दिया है और 120 से अधिक ने पुनर्गठन योजना को मंजूरी दे दी है, शेष मामले अभी भी लंबित हैं.

विश्व बैंक ने कहा, ‘इसकी वजह से एक डॉलर पर वसूली दर 27 सेंट्स से बढ़कर 72 सेंट्स हो गई है.’

वहीं ‘निर्माण के लिए अनुमति लेने’ की श्रेणी में भारत ने 129 स्थानों की बड़ी छलांग लगाई है. अब भारत व्यवसाय इकाई के निर्माण के लिए 27 वां सबसे आसान स्थान बन गया है.

देश का तीसरा सबसे अच्छा सुधार ‘बॉर्डर के पार व्यापार’ श्रेणी में हुआ है, जहां यह 12 पायदान चढ़कर 68 वें स्थान पर आ गया. भारत पिछले साल भी इन तीन श्रेणियों में शीर्ष-30 देशों में रहा था जिसमें बिजली प्राप्त करना, लोन हासिल करना और अल्पसंख्यक निवेशकों की रक्षा करना शामिल है.

इससे पिछली सूची में 190 देशों में भारत 77वें स्थान पर था. कारोबार सुगमता सूची में न्यूजीलैंड शीर्ष पर बना हुआ है. इसके बाद क्रमश: सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग का स्थान है. दक्षिण कोरिया सूची में पांचवे और अमेरिका छठे स्थान पर है.

भारत के लिए इस सूची में स्थान सुधरना एक राहत भरा मौका है. यह सूची ऐसे समय में आई है जब भारतीय रिजर्व बैंक, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने देश की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी की है.

कारोबार सुगमता सूची-2020 में विश्व बैंक ने भारत की अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए सरकार द्वारा किए गए सुधार प्रयासों की सराहना की है.

हालांकि, विश्व बैंक ने उल्लेख किया कि भारत को कॉन्ट्रैक्ट को लागू करने और संपत्ति दर्ज करने जैसे क्षेत्रों में और अधिक काम करने की आवश्यकता है जहां भारत वैश्विक स्तर पर 163वें और 154वें स्थान पर है. इसमें से सबसे बुनियादी ‘व्यवसाय शुरु करने में सुगमता’ श्रेणी में भारत सिर्फ एक पायदान ऊपर चढ़ा है.

विश्व बैंक में विकास अर्थशास्त्र के निदेशक सिमोन जानकोव ने कहा, ‘यह लगातार तीसरा साल है जब भारत ‘कारोबार सुगमता’ की दिशा में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शीर्ष दस देशों में शामिल रहा है. पिछले 20 साल में ऐसा करने में कुछ देश ही सफल रहे हैं. अविश्वसनीय रूप से ऐसा करने वाले अन्य देश जनसंख्या और आकार इत्यादि के मामले में बेहद छोटे (भारत के मुकाबले) हैं.’

उन्होंने कहा कि भारत ऐसा पहला देश है जिसने ऐसा कीर्तिमान हासिल किया है. इस साल उसकी रैंकिंग में 14 स्थान का सुधार हुआ है. सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले 10 शीर्ष देशों में चीन, बहरीन, सऊदी अरब, जॉर्डन, कुवैत, तोगो, तजाकिस्तान, पाकिस्तान और नाइजीरिया हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)