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दिल्ली: हवा सीज़न के सबसे ख़राब स्तर पर पहुंची, 26 से 30 अक्टूबर तक निर्माण कार्य पर प्रतिबंध

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक नई दिल्ली के नेहरू नगर, अशोक विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी, वज़ीरपुर, बवाना, मुंडका और आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक क्रमश: 340, 335, 339, 349, 344, 363, 381 और 350 दर्ज किया गया.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: दीपावली से दो दिन पहले राष्ट्रीय राजधानी की वायु गुणवत्ता शुक्रवार को इस मौसम के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई. हवा की गति धीमी होने की वजह से प्रदूषकों का जमाव आसान हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकृत पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी तथा आस-पास के उपनगरीय शहरों में 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक शाम छह बजे से सुबह छह बजे तक भवन निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा.

दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) के अध्यक्ष भूरे लाल ने इस दौरान फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, सोनीपत और बहादुरगढ़ में कोयला आधारित उद्योगों, बिजली संयंत्रों को बंद करने का निर्देश जारी किया है.

यह प्रतिबंध केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव प्रशांत गार्गव के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रदूषण रोधी कार्य बल से मिली सिफारिश के आधार पर लगाया गया है.

ईपीसीए के अध्यक्ष ने निर्देश दिया, ‘दिल्ली में वैसे उद्योग जिन्होंने अब तक पाइप आधारित प्राकृतिक गैस को नहीं अपनाया है वे 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक बंद रहेंगे.’

उन्होंने सभी क्रियान्वयन एजेंसियों को पंजाब एवं हरियाणा में पराली जलाने पर रोक के लिए कड़ी कार्रवाई करने तथा पटाखों एवं प्रदूषणकारी वाहनों को चलते देखने पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है.

पत्र में उन्होंने कहा, ‘आम तौर पर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले हॉट-मिक्स संयंत्र, स्टोन क्रशर और खुदाई जैसी निर्माण गतिविधियों जिनसे धूल उड़ने की संभावना रहती है, वे दिल्ली एवं गुड़गांव, फरीदाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, सोनीपत और बहादुरगढ़ में 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक शाम छह बजे से सुबह छह बजे के बीच बंद रहेंगे.’

ईपीसीए ने दिल्ली यातायात पुलिस एवं पास के सभी इलाकों में एनसीआर शहरों में खासकर राष्ट्रीय राजधानी के बेहद व्यस्त यातायात वाले मार्गों में वाहनों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिये अतिरिक्त श्रमबल की नियुक्ति करने का आदेश दिया है.

इसमें दिल्ली-एनसीआर के जिला प्रशासनों को अवैध रूप से चलने वाले उद्योगों एवं अनधिकृत ईंधन का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कोई रियायत नहीं बरतने का निर्देश दिया गया है.

ये सभी कदम सीपीसीबी द्वारा बनाये गये ‘ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान’ का हिस्सा हैं जिन्हें स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण रोधी सख्त उपायों में सूचीबद्ध किया गया है.

शुक्रवार को सुबह साढ़े आठ बजे शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 315 रहा, जबकि बृहस्पतिवार शाम को यह 311 था.

राष्ट्रीय राजधानी के ज्यादातर स्थानों पर एक्यूआई ‘बहुत खराब’ की श्रेणी में दर्ज किया गया जबकि कुछ इलाकों में इसकी स्थिति ‘गंभीर’ की तरफ बढ़ रही है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक नेहरू नगर, अशोक विहार, जहांगीरपुरी, रोहिणी, वजीरपुर, बवाना, मुंडका और आनंद विहार में एक्यूआई क्रमश: 340, 335, 339, 349, 344, 363, 381 और 350 दर्ज किया गया.

पड़ोस के क्षेत्रों- बागपत, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव और नोएडा में एक्यूआई क्रमश: 312, 336, 311, 312 और 320 दर्ज किया गया.

शून्य से 50 के बीच के एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 से 100 को ‘संतोषजनक’, 101 से 200 को ‘मध्यम’, 201 से 300 को ‘खराब’, 301 से 400 को ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 को ‘गंभीर’ माना जाता है.

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता अनुमान एवं अनुसंधान सेवा- सफर ने बताया, ‘वायु गति कम होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ना शुरू हो गया है, जिससे वायु संचार के कारक बुरी तरह घटकर कणों के बिखराव को प्रभावित कर रहे हैं.’

सफर ने कहा है कि अगले दो दिनों तक धीमी सतही हवाएं चलती रहेंगी. नतीजन, एक्यूआई “बहुत खराब’’ के उच्च से मध्यम रेंज के बीच रह सकता है.

संस्था ने कहा है कि 28 अक्टूबर तक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) पश्चिमी हिमालय क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है. इसे देखते हुए इस बार की दिवाली पर स्थिति उतनी खराब नहीं होगी, जितनी पिछले साल हुई थी.