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भूषण पावर की परिसंपत्ति मामले में ईडी और कॉरपोरेट मंत्रालय आपस में बनाएं सहमति: एनसीएलएटी

कॉरपोरेट मंत्रालय और ईडी के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बना हुआ है. ईडी का तर्क है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम क़ानून के तहत भूषण पावर की परिसंपत्तियां कुर्क कर सकता है. वहीं कॉरपोरेट मंत्रालय का कहना है कि निदेशालय ऐसा नहीं कर सकता, क्योंकि कंपनी अभी दिवाला प्रक्रिया से गुज़र रही है.

(फोटो साभार: फेसबुक)

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने बीते शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय से भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) की परिसंपत्तियां जब्त करने के मामले में बातचीत कर आम सहमति पर पहुंचने का निर्देश दिया.

मंत्रालय और निदेशालय के बीच इस मुद्दे पर मतभेद बना हुआ है. इस मामले में निदेशालय का तर्क है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत भूषण पावर की परिसंपत्तियां कुर्क कर सकता है. दूसरी ओर कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का कहना है कि निदेशालय ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि कंपनी अभी दिवाला प्रक्रिया से गुजर रही है.

इस मामले पर एनसीएलएटी में सुनवाई चल रही है. एनसीएलएटी के अध्यक्ष न्यायाधीश एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि इस मामले में कानून में संशोधन का कोई सवाल नहीं है, ऐसे में केंद्र सरकार के दोनों अंग (मंत्रालय और निदेशालय) को आपस में बातचीत करके इसका निपटान करना चाहिए.

हालांकि अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा कि निदेशालय अपने बकाये का दावा कर सकता है. दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत एक परिचालनात्मक ऋणदाता के रूप में वह ऐसा करने में सक्षम है.

पीठ ने कहा, ‘इसे बेचिए और ऋणदाताओं को दे दीजिए. जो भी आपका (निदेशालय) बकाया है, वह आपको मिलेगा. इसमें कानून संशोधन का कोई सवाल नहीं है.’

न्यायाधिकरण ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 18 नवंबर तय की है.

बता दें कि जेएसडब्ल्यू स्टील की याचिका पर एनसीएलएटी ने ईडी को भूषण पावर एंड स्टील लिमिटेड (बीपीएसएल) की कुर्क संपत्तियों को जारी करने का निर्देश दिया था.

बीपीएसएल के लिए सफल बोलीदाता के रूप में उभरी जेएसडब्ल्यू स्टील ने ईडी के कदम के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर की थी.

इस याचिका पर अपीलीय न्यायाधिकरण ने 14 अक्टूबर को कर्ज में डूबी कंपनी के समाधान पेशेवर के पक्ष में तत्काल कुर्की आदेश हटाने को कहा था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 14 अक्टूबर को न्यायाधिकरण ने ईडी कुर्क की गई संपत्ति वापस करने और बिना अनुमति के कोई अन्य संपत्ति कुर्क न करने का आदेश दिया था.

इसके अलावा न्यायाधिकरण ने जेएसडब्ल्यू स्टील द्वारा दिवालिया भूषण पावर के 19,700 करोड़ रुपये में अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी है.

मालूम हो कि कॉरपोरेट मंत्रालय और ईडी के बीच इस मुद्दे पर बने मतभेद को लेकर बीते 24 अक्टूबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि वह ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया के तहत एक कंपनी की संपत्तियों की कुर्की के मामले में कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय तथा प्रवर्तन निदेशालय के बीच मतभेदों को दूर करने का प्रयास कर रही है.

सीतारमण ने कहा था, ‘इस मामले में मेरी कुछ चर्चा हुई थी. मैं इस तथ्य को पूरी तरह सचेत हूं कि ईडी अपना कर्तव्य का निर्वहन करता है और जब पीएमएलए के तहत आने वाले व्यक्ति की संपत्ति की कुर्की का सवाल आता है, कुछ कंपनियों की संपत्ति कुर्क की जा रही हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मेरी राजस्व सचिव और कॉरपोरेट मामलों के सचिव के साथ बैठक हुई थी. हम इस मामले पर गौर कर रहे हैं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)