नॉर्थ ईस्ट

नगा शांति वार्ता: अलग संविधान और अलग झंडे को लेकर गतिरोध बरक़रार

पूर्वोत्तर के प्रमुख उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम नगाओं के लिए अलग झंडा और संविधान की अपनी मांग पर अड़ा हुआ है. केंद्र अलग झंडा और अलग संविधान जैसी मांगों को पहले ही ख़ारिज कर चुका है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/कोहिमा: नगालैंड में सात दशक पुरानी उग्रवाद समस्या के अंतिम समाधान निकालने के लिए बीते मंगलवार को लगातार दूसरे दिन की नगा शांति वार्ता में गतिरोध बरकरार रहा. केंद्र के वार्ताकार और राज्यपाल आरएन रवि ने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड-इसाक मुइवाह (एनएससीएन-आईएम) और सात संगठनों के शीर्ष संगठन के साथ अलग-अलग बातचीत की. अधिकारियों ने इस बारे में बताया.

नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स (एनएनपीजी) के साथ बातचीत निष्कर्ष की ओर आगे बढ़ रही है, जबकि पूर्वोत्तर में बड़े उग्रवादी समूह एनएससीएन-आईएम नगाओं के लिए अलग झंडा और संविधान की अपनी मांग पर अड़ा हुआ है.

घटनाक्रम से परिचित एक अधिकारी ने कहा, ‘वार्ताकार ने सुबह में एनएनपीजी और दोपहर में एनएससीएन-आईएम के साथ चर्चा की. जल्द ही फिर वार्ता होने की संभावना है.’

मतभेद दूर करने, खासकर एनएससीएल-आईएम की मांग के संबंध में अड़चन दूर करने के लिए दिल्ली में बैठक बुलाई गई थी. हालांकि केंद्र अलग झंडा और अलग संविधान जैसी मांगों को पहले ही खारिज कर चुका है.

पिछले सप्ताह रवि ने कहा कि आपसी सहमति से सभी महत्वपूर्ण मुद्दों सहित एक समग्र मसौदा समझौता अंतिम रूप देने के लिए तैयार है.

इससे पहले सोमवार को भी केंद्र के प्रतिनिधियों ने एनएससीएन-आईएम और सात संगठनों के शीर्ष संगठन से बातचीत की थी.

संगठन के महासचिव थुइंगालेंग मुइवा के नेतृत्व में एनएससीएन-आईएम की एक टीम और केंद्र के वार्ताकार तथा नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि ने नगा लोगों के लिए अलग झंडे और संविधान के मसले का सम्मानीय हल तलाशने के संभावित तरीकों पर चर्चा की गई थी.

इस घटनाक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया था, ‘सोमवार को चार घंटे से अधिक समय तक चली बातचीत किसी निर्णय पर नहीं पहुंची और दोनों पक्ष जल्द ही बैठक करने पर राजी हुए. हालांकि एनएससीएन-आईएम और सरकार के बीच अंतिम समझौता 31 अक्टूबर तक होने की संभावना नहीं है.’

रवि ने पिछले सप्ताह एक बयान में कहा था कि परस्पर सहमति से बना एक समझौते का मसौदा हस्ताक्षर के लिए तैयार है.

गौरतलब है कि 18 अगस्त को रवि ने कहा था कि केंद्र सरकार नगा शांति प्रक्रिया बगैर देर किए संपन्न करने के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने यह भी कहा था कि बंदूक के साये में अंतहीन वार्ता स्वीकार्य नहीं है.

एनएनपीजी ने एक बयान में कहा है कि नगालैंड के निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस मुद्दे पर तटस्थ रुख नहीं रखना चाहिए. खास तौर से तब जब सरकार इस मुद्दे को सुलझाना चाहती है.

इसमें कहा गया है, ‘अनसुलझे मसलों पर राजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिये फैसला होना चाहिए. नगालैंड के निर्वाचित प्रतिनिधियों का रुख उदासीन नहीं रह सकता.’

एनएनपीजी ने कहा, ‘यह वक्त नगालैंड के राजनीतिक दलों के लिए नगा लोगों के हित में अपना रुख स्पष्ट करने का है. अगर नगालैंड के राजनीतिक दल अपने संवैधानिक कर्तव्यों तथा दायित्वों में विफल रह जाते हैं तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए तथा भारत के निर्वाचन आयोग को उन दलों की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए.’

न्यूज 18 रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर पूर्व के सभी उग्रवादी संगठनों का अगुवा माने जाने वाला एनएससीएन-आईएम अनाधिकारिक तौर पर सरकार से साल 1994 से बात कर रहा है.

सरकार और संगठन के बीच औपचारिक वार्ता वर्ष 1997 से शुरू हुई. नई दिल्ली और नगालैंड में बातचीत शुरू होने से पहले दुनिया के अलग-अलग देशों में दोनों के बीच बैठकें हुई थीं.

अगस्त 2015 में भारत सरकार ने एनएससीएन-आईएम के साथ अंतिम समाधान की तलाश के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए.

दो साल पहले केंद्र ने एक समझौते (डीड ऑफ कमिटमेंट) पर हस्ताक्षर कर आधिकारिक रूप से छह नगा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (एनएनपीजी) के साथ बातचीत का दायरा बढ़ाया था.

सत्तारूढ़ पीडीए ने नगा मुद्दे के शीघ्र समाधान की अपील की

इस बीच नगालैंड में सत्तारूढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) ने दशकों पुराने नगा मुद्दे को जल्द हल करने की अपनी अपील को बीते 28 अक्टूबर को एक बार फिर दोहराया.

उसने कहा कि इस मुद्दे का ऐसा समाधान होना चाहिए जो समावेशी, सम्मानजनक तथा लोगों को स्वीकार्य हो.

नगालैंड के 60 सदस्यीय सदन में पीडीए में नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के 21 विधायक, भाजपा के 12 और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं.

पीडीए ने यहां वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारियों के साथ अपने विधायकों की समन्वय बैठक के दौरान अपने रुख को दोहराया.

पीडीए के संयोजक चिंगवांग कोन्याक और सह-संयोजक तेमजेन इम्ना अलोंग ने कहा था, ‘पीडीए ने नगा राजनीतिक मुद्दे पर हमेशा अटल रुख अपनाया है और हम सामूहिक फैसलों तथा नीतियों पर कभी पीछे नहीं हटे.’

उन्होंने कहा कि पीडीए गठबंधन ने हमेशा लोगों की भावनाओं को समझा है और जिन लोगों का हम प्रतिनिधित्व करते हैं उनकी इच्छाओं का सम्मान करते रहेंगे.

नगालैंड और मणिपुर हाई अलर्ट पर

मालूम हो कि केंद्र के प्रतिनिधियों ने एनएससीएन-आईएम और सात संगठनों के शीर्ष संगठन के बीच चल रही बातचीत के मद्देनजर नगालैंड और मणिपुर को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक नगालैंड की राजधानी कोहिमा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार ने सभी जिलों के उप आयुक्तों और प्रशासनिक अधिकारियों को अगले आदेश तक अपने अधिकार क्षेत्र में तैनात रहने को कहा है.

नगालैंड पुलिस मुख्यालय ने सभी अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं और मेडिकल लीव के अलावा छुट्टी पर गए अन्य अधिकारियों को वापस लौटने का आदेश जारी किया है.

वहीं पड़ोसी राज्य मणिपुर में भी सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. यहां भी नगा समुदाय के लोगों की अच्छी खासी आबादी निवास करती है. एक अधिकारी ने बताया कि राजधानी इंफाल में राजभवन के अलावा शहर के महत्वपूर्ण इलाकों में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)