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अनंत मित्तल

शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ नीतीश कुमार (फोटो: पीटीआई)

भाजपा के सामने कमज़ोर पड़े नीतीश कुमार क्या फिर जनता का विश्वास पा सकेंगे?

जदयू को फिसलने से रोकने में नाकाम रहे नीतीश कुमार क्या इस बार अपने अधूरे वादे पूरे कर पाएंगे या फिर इस पारी में वे भाजपा के एजेंडा के आगे घुटने टेकने को मजबूर होंगे?

एक जनसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फोटो साभार: फेसबुक/जदयू)

नीतीश कुमार के बिहार विधानसभा चुनाव को अपना ‘अंतिम चुनाव’ बताने के क्या मायने हैं

नीतीश कुमार ने तीसरे चरण के चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन कहा कि यह उनका अंतिम चुनाव है. क्या यह मतदान से पहले सीमांचल के अल्पसंख्यकों समेत उनके पारंपरिक मतदाताओं की सहानुभूति लेने का कोई चुनावी हथकंडा है या इसका कोई गहरा सियासी अर्थ है?

एक चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

तेजस्वी को ‘जंगलराज का युवराज’ कहने के पीछे मोदी की क्या मंशा है

प्रधानमंत्री के गब्बर शैली के चुनावी डायलॉग्स में तेजस्वी यादव और महागठबंधन के लिए चेतावनी-सी छुपी लगती है. शायद वे अपने जुमलों के ज़रिये यह जता रहे हैं कि जनता उन्हें भले बहुमत देकर सत्ता सौंप दे, मगर मोदी सरकार उन्हें राज नहीं करने देगी.

नीतीश कुमार. (फोटो: पीटीआई)

बिहार चुनाव: क्या नीतीश को बलि का बकरा बनाने के लिए भाजपा ने उन्हें सीएम प्रत्याशी बनाया है?

नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनाने के बीजेपी की घोषणा के तीर का पहला लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित अजेय छवि को बरक़रार और हार का ठीकरा उनके सिर फोड़ना है. इसके अलावा चुनाव बाद स्पष्ट बहुमत न मिलने की दशा में नीतीश को किनारे कर एलजेपी के समर्थन और कांग्रेस तथा अन्य गठबंधनों से विधायक तोड़कर बीजेपी के नेतृत्व में अगली सरकार बनाना है.