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दामिनी यादव

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आत्मसम्मान की कीमत पर आसमान नहीं छूती हैं महिलाएं

वीडियो: पत्रकार प्रिया रमानी द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगाए जाने के बाद अकबर ने उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मान​हानि का मुक़दमा दर्ज कराया था. इस मामले में प्रिया रमानी को बरी कर दिया गया है.

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प्यार के नाम पर हाथों में पत्थर नहीं, फूल थामो

वीडियो: हवाओं में नफ़रत इतनी घुल गई है कि ज़बानों पर ही नहीं सोच तक में ज़हर उतर आया है और हम दुनिया को मोहब्बत का पाठ पढ़ाने का दावा करने वाले ख़ुद मोहब्बत के सबक भूलते जा रहे हैं. आज प्यार के नाम पर हमारे हाथों में फूल नहीं होते, बल्कि पत्थर होते हैं, जो किसी के सिर का ज़ख़्म बनने को बेताब रहते हैं.

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आंचल संभालते हाथों में थमी वीरता की कटार का नाम है सुभद्रा कुमारी चौहान

वीडियो: 16 अगस्त, 1904 को इलाहाबाद के निकट निहालपुर गांव में जन्मीं सुभद्रा कुमारी चौहान ने महज़ नौ साल की उम्र में अपनी पहली प्रकाशित कविता लिखी थी. वह स्वतंत्रता आंदोलन में भी शामिल रही हैं. स्वतंत्रता से पूर्व स्त्री अधिकारों पर लिखने वाली वह देश की पहली महिला लेखक थीं.

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सावित्रीबाई फुले, मंटो और कैफ़ी आज़मी, तीन आवाज़ों की सदा एक-सी

वीडियो: महिलाओं के लिए शिक्षा की लौ जलाने वाली सावित्रीबाई फुले, अफ़सानानिगार सआदत हसन मंटो और शायर कैफ़ी आज़मी पर दामिनी यादव का नज़रिया.

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भावनाओं के तांडव पर इतनी महाभारत क्यों?

वीडियो: हाल में रिलीज़ हुईं कुछ वेब सीरीज़- तांडव, अ सूटेबल बॉय, पाताल लोक, आश्रम वगैरह को लेकर हुए विवाद से लगता है कि कलाएं, जिन्हें अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है, उनकी किसी भी बात को आधार बनाकर विवाद खड़ा कर देना सबसे आसान है.

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मंगलेश डबराल का जाना और पहाड़ों पर कविता की लालटेन बुझ जाना

वीडियो: हिंदी की बिंदी में आज हम जिस कवि को याद कर रहे हैं, वे हैं मंगलेश डबराल, जिन्होंने हाल ही में इस दुनिया को अलविदा कह दिया है.

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मैं सेंसरिंग का विरोधी हूं, आख़िर सेंसर करने वाले को कौन सेंसर करेगा: प्रकाश झा

वीडियो: स्वयंभू बाबाओं पर आधारित वेब सीरीज़ आश्रम का दूसरा संस्करण ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लेयर पर रिलीज़ हो चुका है. इसके निर्देशक प्रकाश झा से दामिनी यादव की बातचीत.

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अ सूटेबल बॉय: मुहब्बत और बदलते वक़्त की सुरीली दास्तान

वीडियो: हाल ही में नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हुई ‘अ सूटेबल बॉय’ छह एपिसोड की एक बीबीसी टेलीविज़न ड्रामा मिनिसीरिज़ है, जिसे मीरा नायर ने डायरेक्ट किया है. ये वेब सीरिज़ इसी नाम से 1993 में आए विक्रम सेठ के उपन्यास पर आधारित है.

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सौ साल बाद भी महिला लेखन की चुनौतियां क्या हैं

वीडियो: जब कभी कोई पुरुष कलम उठाता है तो मान लिया जाता है कि उस कलम से जो भी लिखेगा, वह साहित्य समाज का दर्पण कहलाएगा, लेकिन जब कोई महिला कलम उठाती है, तब ऐसा नहीं होता. महिला लेखन की चुनौतियों पर प्रकाशक मीरा जौहरी और कथाकार गीताश्री से दामिनी यादव की बातचीत.

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साहिर लुधियानवी की याद, गौहर रज़ा के साथ

वीडियो: मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी की पुण्यतिथि पर जाने-माने वैज्ञानिक, कलमकार, फिल्म निर्माता गौहर रज़ा से दामिनी यादव की बातचीत.

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शोषण का पूर्वाभ्यास

वीडियो: निर्भया कांड जैसे वीभत्स हादसे के बाद इसका दोहराव न होने की दुआ सभी ने की थी, लेकिन अब हाथरस कांड हमारे सामने है. क्या ये महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा का अंत है? इस बारे में दामिनी यादव के विचार.

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प्रेमचंद हैं आज भी प्रासंगिक

वीडियो: साहित्यकार प्रेमंचद ने हिंदी साहित्य को ज़मीन पर पांव टिकाना सिखाया और कड़वी ज़मीनी सच्चाई से रूबरू करवाया. 1918 से 1936 के कालखंड को ‘प्रेमचंद युग’ कहा जाता है लेकिन यदि उनके समय और आज के समाज की समानताएं देखी जाएं तो लगता है कि प्रेमचंद युग अभी समाप्त ही नहीं हुआ है.

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गांधी जयंती विशेष: कलम के सिपाही गांधी

वीडियो: महात्मा गांधी की किताबों के पन्ने पीले ज़रूर पड़ गए हैं, पर उनके सबक आज भी साफ़-साफ़ दिखते हैं. गांधी जी अपने जीवन का आधार किताबों को मानते थे, शायद यही वजह है कि एक तरफ़ वे ऊंचे दर्जे के पाठक थे तो दूसरी ओर उनकी कलम का भी विस्तार पटल बेहद व्यापक है. उन्होंने अनेक किताबें लिखी हैं, अनुवाद किए हैं, संपादन किया है और एक कलम के सिपाही की तरह भी सक्रिय रहे हैं.

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भगत सिंह, दिनकर और पाश: सितंबर के तीन जांबाज़

वीडियो: सितंबर शहीद भगत सिंह, कवि रामधारी सिंह दिनकर और कवि अवतार सिंह संधू ‘पाश’ के जन्म का महीना है. इन तीनों शख़्सियतों को याद कर रही हैं द वायर की दामि​नी यादव.

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इब्राहिम अलकाज़ी, रंगमंच और अभिनय की बात, राजेंद्र गुप्ता के साथ

वीडियो: कुछ ही समय पहले भारतीय रंगमंच ने अपने शिखर व्यक्तित्वों में से एक इब्राहिम अलकाज़ी को खो दिया. वह रंगमंच की दुनिया में कलाकारों की एक ऐसी पीढ़ी तैयार कर गए हैं, जिन्हें अपने-आप में अभिनय का स्कूल कहा जाता है. रंगमंच, टेलीविज़न और फिल्मों में अपनी छाप छोड़ने वाले राजेंद्र गुप्ता से द वायर की दामिनी यादव की बातचीत.