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धीरज मिश्रा

Farmers-India-PTI featured

किसान आंदोलन के बीच वित्त मंत्रालय ने रखा था कृषि संबंधी योजनाओं के बजट में कटौती का प्रस्ताव

एक्सक्लूसिव: जिस समय किसान आंदोलन शुरू हुआ, तब वित्त मंत्रालय ने कृषि से जुड़ी खाद्य सुरक्षा मिशन, सिंचाई, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाओं के बजट घटाने को कहा था. व्यय विभाग ने राज्यों को दालें वितरित करने वाली योजना को कृषि मंत्रालय के बजट में शामिल करने पर सवाल उठाए थे.

Nagpur: A farmer ploughs his field at a cotton plantation, in Hingna village near Nagpur, Friday, July 5, 2019. (PTI Photo) (PTI7_5_2019_000147B)

फसल बीमा योजना की सफलता के गान के बीच निजी कंपनियों ने ख़ारिज किए 75 फीसदी दावे

विशेष रिपोर्ट: कृषि क़ानूनों के विरोध के बीच ख़ुद को ‘किसान हितैषी’ बताते हुए मोदी सरकार ने फसल बीमा योजना की सफलता के दावे किए हैं. हालांकि दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि इस बीच किसानों द्वारा दायर किए गए फसल बीमा दावों को ख़ारिज करने की संख्या में नौ गुना की बढ़ोतरी हुई है, जहां एचडीएफसी ने 86, टाटा ने 90 और रिलायंस ने 61 फीसदी दावों को ख़ारिज किया है.

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अडानी समूह के गोदाम में गेहूं न रखने से हुए नुकसान की कैग रिपोर्ट हटाने को प्रयासरत मोदी सरकार

एक्सक्लूसिव: साल 2018 में कैग ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि 2013-14 से 2015-16 के बीच एफसीआई ने हरियाणा के कैथल में अडानी समूह के गोदाम में इसकी क्षमता के अनुसार गेहूं नहीं रखा और खाली जगह का किराया भरते रहे. मोदी सरकार अब इस रिपोर्ट से यह बात हटवाने का प्रयास कर रही है.

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दिल्ली दंगा: मौजपुर के दुकानदारों द्वारा किए गए दावों से बहुत कम मिला मुआवज़ा

वीडियो: उत्तर पूर्वी दिल्ली के मौजपुर इलाके में पिछले साल हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान तमाम दुकानों को नुकसान पहुंचाया गया था. दुकानदारों का दावा है कि उन्होंने जितनी क्षतिपूर्ति का दावा किया था, उससे काफ़ी कम मुआवज़ा उन्हें प्रदान किया गया.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

दिल्ली दंगा: गंभीर रूप से घायल हुए पीड़ितों ने कहा- उचित मुआवज़ा नहीं मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: दिल्ली की केजरीवाल सरकार का दावा है कि पिछले साल फरवरी महीने में हुए सांप्रदायिक दंगे के पीड़ितों को उचित मुआवज़ा दिया है, हालांकि कई घायलों का कहना कि उन्हें गंभीर चोटें लगने के बावजूद कम मुआवज़ा दिया गया है.

फरवरी 2020 के दंगों में क्षतिग्रस्त दुकानें. (फाइल फोटो: पीटीआई)

दिल्ली दंगा: पीड़ितों द्वारा कुल दावे की तुलना में 10 फीसदी से भी कम मुआवज़ा मिला

ग्राउंड रिपोर्ट: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में प्रभावित मौजपुर, अशोक नगर जैसे इलाकों के 55 पीड़ित दुकानदारों ने क्षतिपूर्ति के लिए कुल 3.71 करोड़ रुपये का दावा किया था, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसमें से 36.82 लाख रुपये का ही भुगतान किया है. ये दावा की गई कुल राशि का 9.91 फीसदी ही है.

The Minister of State for Power, New & Renewable Energy (Independent Charge) and Skill Development & Entrepreneurship, Shri Raj Kumar Singh holding a Press Conference on “Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020” through video conferencing, in New Delhi on December 21, 2020.

आय प्रभावित होने के चलते पर्यावरणीय प्रवाह क़ानून कमज़ोर करने को प्रयासरत है विद्युत मंत्रालय

2018 में मोदी सरकार ने गंगा की ऊपरी धाराओं पर बनी पनबिजली परियोजनाओं के लिए 20-30 फीसदी पानी छोड़ना अनिवार्य बताया था. आधिकारिक दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि कमाई पर असर पड़ने के चलते विद्युत मंत्रालय ने मौजूदा व निर्माणाधीन परियोजनाओं में इसे लागू करने से छूट दिए जाने की बात कही थी.

उत्तराखंड के चमोली जिले में आए आपदा के बाद तपोवन बैराज में बचाव अभियान. (फोटो: पीटीआई)

2019 में केंद्र की समिति ने बताया था कि फायदे के लिए पनबिजली प्रोजेक्ट गंगा में पानी नहीं छोड़ते

विशेष रिपोर्ट: मोदी सरकार ने अक्टूबर 2018 में एक नोटिफिकेशन जारी किया था कि गंगा की ऊपरी धाराओं यानी कि देवप्रयाग से हरिद्वार तक बनी सभी पनबिजली परियोजनाओं को अलग-अलग सीजन में 20 से 30 फीसदी पानी छोड़ना होगा. आरोप है कि ऐसी परियोजनाएं बहुत कम मात्रा में पानी छोड़ते हैं, जिससे नदी के स्वास्थ्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है.

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ में क्षतिग्रस्त ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना. (फोटो: पीटीआई)

उत्तराखंड सरकार ने पनबिजली परियोजनाओं द्वारा कम पानी छोड़ने की वकालत की थी

विशेष रिपोर्ट: उत्तराखंड में आई भीषण तबाही के बाद राज्य की भाजपा सरकार ने दावा किया है कि वह समस्या का समाधान करने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठा रहे हैं. हालांकि आधिकारिक दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा था कि पनबिजली परियोजनाओं द्वारा पानी छोड़ने के प्रावधान में ढील दी जानी चाहिए.

Allahabad: Workers construct a pontoon bridge over River Ganga for the upcoming Kumbh Mela 2019, in Allahabad, Friday, Nov. 30, 2018. (PTI Photo) (PTI11_30_2018_000045)

गंगा की अविरलता के लिए घोषित पर्यावरण प्रवाह पर पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं हुआ: दस्तावेज़

2018 में मोदी सरकार द्वारा लाए एक क़ानून के तहत गंगा पर बनी जलविद्युत परियोजनाओं को अलग-अलग सीज़न में 20 से 30 फीसदी पानी छोड़ने की बात कही गई थी. दस्तावेज़ दिखाते हैं कि जिस समिति ने ज़्यादा पानी छोड़ने की सिफारिश की थी, उसकी रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री की सहमति के बावजूद लागू नहीं की गई.

(फोटो: जाह्नवी सेन/द वायर)

बजट 2021: मैला ढोने वालों के पुनर्वास फंड में 73 फीसदी की कटौती

मैला ढोने वालों के पुनर्वास के लिए पिछले साल 110 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ था, लेकिन अब इसे कम करके 30 करोड़ रुपये कर दिया गया है. केंद्र ने ये कदम ऐसे समय पर उठाया है जब मैला ढोने वालों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है.

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वित्त वर्ष 2020-21 के लिए स्वच्छ भारत अभियान के बजट में सीधे 43 फ़ीसदी की कटौती

वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में स्वच्छ भारत अभियान के लिए उतनी ही राशि आवंटित की गई है, जितनी पिछले साल की गई थी. स्वच्छ भारत अभियान- शहरी के तहत 2,300 करोड़ रुपये और ग्रामीण के तहत 9,994 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह बीते तीन साल के बजट की तुलना में सबसे कम है.

Ranchi: Political activists demonstrate during a protest in support of the nationwide strike, called by agitating farmers to press for repeal of the Centres agri laws, in Ranchi, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo)(PTI08-12-2020 000050B)

बजट 2021: एमएसपी दिलाने वाली दो प्रमुख योजनाओं के फंड में बड़ी कटौती

कृषि क़ानूनों पर किसानों के विरोध के बीच मोदी सरकार ने बार-बार दावा किया है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी व्यवस्था ख़त्म नहीं होगी, पर आम बजट में इसे दिलाने वाली योजनाओं के फंड में बड़ी कटौती की गई है, जिसके चलते किसानों को उतनी एमएसपी भी नहीं मिलेगी, जितनी सरकार तय करती है.

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कैसे ग़ाज़ीपुर में पुनर्जीवित हुआ किसान आंदोलन

वीडियो: बीते 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली के बाद उत्तर प्रदेश प्रशासन ने ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने का आदेश दिया था. हालांकि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की अपील के बाद, यहां किसानों का हुजूम उमड़ पड़ा है.

Members of farmer unions stage a protest against Centre's farm reform during 'Kisan Sansad' at Guru Tegh Bahadur Memorial in New Delhi Saturday Jan. 23 2021. (Photo | PTI)

किसान आंदोलन: ‘मन की बात तो ठीक है, लेकिन क़ानून बनाने में मनमानी नहीं चलेगी’

केंद्र के विवादित तीन कृषि क़ानूनों के प्रभाव की जानकारी देने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का क़ानून बनवाने की मांग को लेकर बीते 23 और 24 जनवरी को दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर स्थित गुरु तेग बहादुर मेमोरियल में किसान संसद का आयोजन किया गया था.