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जावेद अनीस

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi arrives to address his supporters after the party's victory in both Haryana and Maharashtra Assembly polls, at BJP HQ, in New Delhi, Thursday, Oct 24, 2019. BJP President Amit Shah and BJP Working President JP Nadda are also seen (PTI Photo/Atul Yadav)(PTI10_24_2019_000306B)

महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में भाजपा को कड़ी मशक्कत से मिली जीत से क्या सबक मिलता है?

तमाम संसाधनों, समर्थक मीडिया और एकपक्षीय माहौल के बावजूद अगर महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों में इस तरह के नतीजे आए हैं तो इससे एक बार फिर यह बात साबित हुई है कि चुनाव केवल मैनेजमेंट और पैसे के बल पर नहीं जीता जा सकता है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

इस चुनाव में मुसलमानों के लिए क्या है?

आज भारतीय राजनीति एक ऐसे दौर में है जब कोई भी राजनीतिक पार्टी मुस्लिम समुदाय की बात नहीं करना चाहती. वे राजनीतिक रूप से अछूत बना दिए गए हैं. अब उनका इस्तेमाल बहुसंख्यक आबादी को वोट बैंक में तब्दील करने के लिए किया जा रहा है.

(फोटो: पीटीआई)

सरकारी स्कूल फेल नहीं हुए, इन्हें चलाने वाली सरकारें फेल हुई हैं

सरकारी स्कूलों को बहुत ही प्रायोजित तरीके से निशाना बनाया गया है. प्राइवेट स्कूलों की समर्थक लॉबी की तरफ से बहुत ही आक्रामक ढंग से इस बात का दुष्प्रचार किया गया है कि सरकारी स्कूलों से बेहतर निजी स्कूल होते हैं और सरकारी स्कूलों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है.

(फाइल फोटो: पीटीआई)

इतिहास को अपने अनुरूप गढ़ने और ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की कोशिशें तेज़ हुई हैं

मोदी सरकार आने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सावधानी के साथ उस विचारधारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, जिसका देश के स्वाभाविक मिज़ाज़ के साथ कोई मेल नहीं है.

Bhopal Jail Break Reuters File

एनकाउंटर का उत्सव और न्याय की हत्या

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एक जांच में भोपाल सेंट्रल जेल में सिमी से जुड़े विचाराधीन कैदियों से साथ उत्पीड़न की शिकायतों को सही पाया है और इसके लिये जेल स्टाफ के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्यवाही की अनुशंसा की है.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing a public meeting, at Kedarnath, in Uttarakhand on October 20, 2017.

हमारे मुल्क में ऐसे लोग सत्ता पर क़ाबिज़ हैं जो विज्ञान को आस्था का विषय मानते हैं

किसी भी देश या समाज का यह रवैया कि उसकी धार्मिक पुस्तक या मान्यताएं थियरी आॅफ एव्रीथिंग हैं और इनमें ही भूत, वर्तमान, भविष्य का सारा ज्ञान और विज्ञान निहित है, बहुत ही आत्मघाती है.

Habibganj

हबीबगंज स्टेशन का अनुभव बताता है कि रेलवे का निजीकरण करोड़ों यात्रियों के लिए घातक साबित होगा

बेस्ट ऑफ 2018: आधुनिकीकरण के नाम पर रेलवे स्टेशनों को निजी कंपनियों को सौंपने की पूरी तैयारी है, लेकिन देश के पहले तथाकथित मॉडल स्टेशन के शुरुआती अनुभव आम रेल यात्रियों के लिए डराने वाले हैं.

modi and rahul PTI

क्या भारत की राजनीति ने अपना धर्म चुन लिया है?

कभी हाशिये पर रही हिंदुत्व की राजनीति आज मुख्यधारा की राजनीति बन चुकी है. संघ के लिए इससे बड़ी सफलता भला और क्या हो सकती है कि देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां नरम/गरम हिंदुत्व के नाम पर प्रतिस्पर्धा करने लगें.