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कृष्ण प्रताप सिंह

Ramprasad Bismil (2)

रामप्रसाद बिस्मिल: जिन्होंने क्रांति के लिए हथियार अपनी लिखी किताबों से मिले रुपयों से ख़रीदे थे

जयंती विशेष: ‘बिस्मिल’ से मिलने गोरखपुर जेल पहुंचीं उनकी मां ने डबडबाई आंखें देखकर उनसे पूछा-तुझे रोकर ही फांसी चढ़ना था तो क्रांति की राह क्यों चुनी?

Shimla: People stand in a queue to collect water from a tanker, as the city faces acute shortage of drinking water, in Shimla on Tuesday, May 29, 2018. (PTI Photo) (PTI5_29_2018_000133B)

शिमला का संकट सिर्फ़ जल का नहीं है

पर्यावरण पर राजनीति, धर्म और उद्योग की मिलीभगत का ही नतीजा है कि आज भारत के बड़े शहर गंदगी में तो दुनिया में नाम कमा ही रहे हैं, शिमला जैसे पर्यटन स्थलों की छवि और पहचान भी बदल रहे हैं.

Hisar: Vegetables lie scattered on a road as farmer's protest enters third day, in Hisar, on Sunday, June 03, 2018. (PTI Photo) (PTI6_3_2018_000058B)

फसल काटते किसान की तस्वीर फांसी के फंदे पर लटकते किसान में क्यों बदल गई है?

किसान संगठनों ने जब ‘गांव बंद’ आंदोलन शुरू किया तो उन्हें उम्मीद थी कि चुनावी साल होने के कारण आमतौर पर ऊंचा सुनने वाली दिल्ली उन्हें सुनेगी लेकिन वे गलत सिद्ध हुए. सरकार उनका मज़ाक उड़ाने पर उतर आई है.

हिंदी का पहला अख़बार ‘उदंत मार्तंड’ 30 मई, 1826 को प्रकाशित हुआ था. ‘समाचार सुधावर्षण’ हिंदी का पहला दैनिक अख़बार है. (फोटो साभार: ट्विटर)

आज की हिंदी पत्रकारिता को याद भी नहीं कि वह प्रतिरोध की शानदार परंपरा की वारिस है

हिंदी पत्रकारिता दिवस: कोबरापोस्ट के हालिया स्टिंग ‘आपरेशन-136’ से यह साबित होता कि अब इस पत्रकारिता को न तो देश व देशवासियों के भविष्य-निर्माण में कोई दिलचस्पी है, न ही उनके विरुद्ध किसी साज़िश का अंग बनने को लेकर कोई हिचक.

भगवती चरण वोहरा. (जन्म: 04 जुलाई 1904 - अवसान: 28 मई 1930, फोटो साभार: शहीद कोश)

भगवतीचरण वोहरा: जिनके त्याग के आगे भगत सिंह को अपना बलिदान तुच्छ नज़र आता था

शहादत दिवस पर विशेष: क्रांतिकारी भगवतीचरण वोहरा के निधन पर भगत सिंह के शब्द थे, ‘हमारे तुच्छ बलिदान उस श्रृंखला की कड़ी मात्र होंगे, जिसका सौंदर्य कॉमरेड भगवतीचरण वोहरा के आत्मत्याग से निखर उठा है.’

Stockholm: Prime Minister Narendra Modi addresses the Indian Community in Stockholm, Sweden on Tuesday. PTI Photo / PIB(PTI4_18_2018_000045B)

मोदी सरकार: तिलिस्म टूटने और मायाजाल बिखरने के चार साल

देश को बदलते-बदलते प्रधानमंत्री ख़ुद बदलकर मौनमोदी हो गए हैं. कथित गोरक्षक किसी को मार डालें, कोई बच्ची बलात्कारियों की वहशत का शिकार हो जाए या डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी रिकॉर्ड तोड़ दे, वे अपना मौन तभी तोड़ते हैं, जब उन्हें अपने मन की बात कहनी होती है.

Raja Rammohan Roy Wiki copy

जब राममोहन राय को मुग़ल सम्राट की ओर से दी गई ‘राजा’ की उपाधि

जयंती विशेष: राममोहन ‘राजा’ शब्द के प्रचलित अर्थों में राजा नहीं थे. उनके नाम के साथ यह शब्द तब जुड़ा जब दिल्ली के तत्कालीन मुग़ल शासक बादशाह अकबर द्वितीय ने उन्हें राजा की उपाधि दी.

Janakpur: Prime Minister Narendra Modi with Nepal Prime Minister Khadga Prasad Oli, during the inauguration of Janakpur-Ayodhya direct bus service, in Janakpur, Nepal on Friday. (PTI Photo / PIB)(PTI5_11_2018_000063B)

अब 2014 की उतरन से काम क्यों चलाना चाह रहे विकास के महानायक?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी नेपाल यात्रा के दौरान दोनों देश के मध्य विश्वास को बढ़ाते नज़र नहीं आए. वे नेपालियों से ज़्यादा भारतवासियों, उनसे भी ज़्यादा कर्नाटक के मतदाताओं और सबसे ज़्यादा हिंदुओं को संबोधित करते दिखे.

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बहादुरशाह ज़फ़र: आज़ादी के सत्तर साल बाद भी दो गज़ ज़मीन न मिली कू-ए-यार में

विशेष: बहादुरशाह ज़फ़र हमारे उस स्वतंत्रता संग्राम के नायक हैं जिसमें हम हार भले ही गए थे पर हिंदुओं व मुसलमानों ने उसे एकजुट होकर लड़ा था और अपनी एकता की शक्ति प्रमाणित कर दी थी.

Mahaveer Prasad Dwivedi

जब महावीर प्रसाद द्विवेदी ने जनेऊ उतारकर सर्पदंश पीड़ित दलित महिला के पांव में बांध दिया

जयंती विशेष: द्विवेदी जी ऐसे कठिन समय में हिंदी के सेवक बने, जब हिंदी अपने कलात्मक विकास की सोचना तो दूर, विभिन्न प्रकार के अभावों से ऐसी बुरी तरह पीड़ित थी कि उसके लिए उनसे निपट पाना ही दूभर हो रहा था.

India's Prime Minister Narendra Modi attends the Vibrant Gujarat investor summit in Gandhinagar, India, January 10, 2017. REUTERS/Amit Dave

पता नहीं आधार कार्ड को लेकर इतनी हड़बड़ी में क्यों है सरकार

समझ में नहीं आता कि जब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संविधान पीठ को सौंपा हुआ है तो उसका फैसला आए बिना सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार की ऐसी अनिवार्यता थोपने का क्या तुक है.

Workers walk in front of the construction site of a commercial complex on the outskirts of the western Indian city of Ahmedabad, in this April 22, 2013 file picture. While India has long suffered from a dearth of workers with vocational skills like plumbers and electricians, efforts to alleviate poverty in poor, rural areas have helped stifle what was once a flood of cheap, unskilled labour from India's poorest states. Struggling to cope with soaring food prices, this dwindling supply of migrant workers are demanding - and increasingly getting - rapid increases in pay and benefits. To match story INDIA-ECONOMY/INFLATION      REUTERS/Amit Dave/Files (INDIA - Tags: BUSINESS CONSTRUCTION EMPLOYMENT TPX IMAGES OF THE DAY)

पूंजीवाद के इस दौर में मज़दूर आंदोलनों की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है

मज़दूर दिवस पर विशेष: कहां तो कार्ल मार्क्स ने ‘दुनिया के मज़दूरों एक हो’ का नारा दिया और कहा था कि उनके पास खोने को सिर्फ बेड़ियां हैं जबकि जीतने को सारी दुनिया और कहां उन्मत्त पूंजी दुनिया भर में उपलब्ध सस्ते श्रम के शोषण का नया इतिहास रचने पर आमादा है.

Balkrishna Sharma Navin featured

बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’: कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाए

जीवन भर आर्थिक चुनौतियों से जूझने के बावजूद बालकृष्ण शर्मा के मन में इसे लेकर कोई ग्रंथि नहीं थी. कोई उनसे भविष्य के लिए कुछ बचाकर रखने की बात करता तो कहते, मेरा शरीर भिक्षा के अन्न से पोषित है इसलिए मुझे संग्रह करने का कोई अधिकार नहीं है.

Asaram Bhakt-Copy

जनता अपनी आस्था और बुद्धि क्यों आसाराम जैसों के पास गिरवी रख देती है?

उमा भारती ने मध्य प्रदेश में अपने मुख्यमंत्रीकाल में विधानसभा के अंदर आसाराम के प्रवचन कराए थे तो पूरे मंत्रिमंडल के साथ सत्ता पक्ष के सारे विधायकों के लिए उसे सुनना अनिवार्य कर दिया था.

Hyderabad: CPI(M) general secretary Sitaram Yechury with Prakash Karat & chief Minister Kerala and others during 22nd party congress in Hyderabad on Sunday. PTI Photo (PTI4_22_2018_000189B)

क्या देश में वामपंथी पालकी के कहार बन कर रह गए हैं?

वामपंथी दल आज़ादी के बाद विकसित अपनी वह छवि नहीं बचा पाए हैं, जिसमें उन्हें सत्ता का सबसे प्रतिबद्ध वैचारिक प्रतिपक्ष माना जाता था. वे परिस्थितियों के नाम पर कभी इस तो कभी उस बड़ी पार्टी की पालकी के कहार की भूमिका में दिखने लगे.

शलभ श्रीराम सिंह.

शलभ श्रीराम सिंह: प्रेम और प्रकृति का नहीं, बग़ावत का कवि

पुण्यतिथि विशेष: शलभ श्रीराम सिंह ने नकारात्मकता के बजाय संघर्ष या युद्ध को अपनी कविता का महत्वपूर्ण पक्ष बनाया.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the Indian Community, at the ‘Bharat Ki Baat, Sabke Saath’ programme, at Westminster, London on April 18, 2018.

कहीं प्रधानमंत्री मोदी ने ख़ुद को ही तो भारत नहीं मान लिया है?

लंदन में वेस्टमिंस्टर के सेंट्रल हाल में हुए दो घंटों से ज़्यादा के कार्यक्रम ‘भारत की बात, सबके साथ’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से लेकर अंत तक अपनी ही बात करते रह गए.

Allahabad: A man stand next to an out-of-service Automated Teller Machine (ATM) in Allahabad on Wednesday. PTI Photo (PTI4_18_2018_000120B)

नकदी संकट: आग लगी तो कुंओं की खुदाई शुरू की गई

नोटबंदी से पहले तक तो जनता ये कल्पना भी नहीं करती थी कि कभी उसे बैंकों में जमा अपना ही धन पाने में इतनी समस्याएं पेश आएंगी और सरकार के झूठे आश्वासन जले पर नमक छिड़कते नज़र आएंगे.

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (जन्म 15 अप्रैल 1865 - 16 मार्च 1947, फोटो: विकिपीडिया)

आपको पता है, ‘हरिऔध’ का घर और स्मृतियां दोनों खंडहर हो गई हैं

अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ के पट्टीदारों ने उनकी विरासत को लंबे अरसे तक झगड़े में फंसाकर उन्हें जैसी ‘श्रद्धांजलि’ दी, वैसी किसी दुश्मन को भी न मिले.

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जब चुनाव हार गए थे बाबा साहब भीमराव आंबेडकर

जन्मदिन विशेष: भारत के जिस संविधान का भीमराव आंबेडकर को निर्माता कहा जाता है उसके लागू होने के बाद 1952 में हुए देश के पहले लोकसभा चुनाव में वे बुरी तरह हार गए थे.

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आंबेडकर: संविधान अच्छे हाथों में रहा तो अच्छा, बुरे हाथों में गया तो ख़राब साबित होगा

जन्मदिन विशेष: आज हम अपनी राजनीति में नियमों, नीतियों, सिद्धांतों, नैतिकताओं, उसूलों व चरित्र के जिन संकटों से दो-चार हैं, उनके अंदेशे भीमराव आंबेडकर ने तभी भांप लिए थे.

Ghaziabad: A bike set on fire by a group of protesters during 'Bharat Bandh' call given by Dalit organisations against the alleged dilution of Scheduled Castes / Scheduled Tribes Act, in Ghaziabad on Monday. PTI Photo (PTI4_2_2018_000026B)

सरकार! दलितों में अंदेशे तो आपने ही पैदा किए

दलितों का ग़ुस्सा इस बिना पर है कि वे समझते हैं कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें जो संवैधानिक व क़ानूनी अधिकार मिले हैं, सत्तारूढ़ भाजपा व उसका मातृसंगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें छीनना चाहते हैं.

(फोटो साभार: विकिमीडिया कॉमन्स)

सत्यभक्त: हिंदी नवजागरण के अलबेले सेनानी

जन्मदिन विशेष: डाॅ. रामविलास शर्मा ने लिखा है कि अगर भारत में किसी एक व्यक्ति को कम्युनिस्ट पार्टी का संस्थापक होने का श्रेय दिया जा सकता है तो वह सत्यभक्त ही हैं.

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बद्री विशाल पित्ती: हैदराबाद की पांचवीं मीनार

जन्मदिन विशेष: कार्ल मार्क्स और मार्क्सवाद के संदर्भ में जो महत्व फ्रेडरिक एंगेल्स का है, डाॅ. राममनोहर लोहिया और समाजवाद के लिए वही महत्व बद्री विशाल पित्ती का है.

डॉ. राम मनोहर लोहिया. (जन्म: 23 मार्च 1910 - अवसान: 12 अक्टूबर 1967)

राम मनोहर लोहिया: सच्चे लोकतंत्र की शक्ति सरकारों के उलट-पुलट में बसती है

लोहिया कहते थे कि किसी शख़्सियत का जन्मदिन मनाने या उसकी मूर्ति लगाने से, उसके निधन के 300 साल बाद तक परहेज रखना चाहिए ताकि इतिहास निरपेक्ष होकर यह फैसला कर पाए कि वह इसकी हक़दार थी या नहीं.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi interacting with the Beti Bachao Beti Padhao beneficiaries, in Jhunjhunu, Rajasthan on March 08, 2018.

प्रधानमंत्री जी! आपकी सरकार पितृसत्ता का ज़हर क्यों फैला रही है?

राजस्थान के झुंझुनू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेटियों को लेकर जो कुछ भी कहा, उससे कई सवाल खड़े होते हैं.

India-Left Wikimedia Commons

वामपंथ से इतनी घृणा क्यों?

सुब्रमण्यम स्वामी ने पूछा कि ‘विदेशी आतंकवादी’ लेनिन की मूर्ति देश में कहीं भी क्यों होनी चाहिए? काश कोई उन्हें बताता कि लेनिन तब से भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की प्रेरणा हैं, जब स्वामी की पार्टी के पुरखे अंग्रेज़ों का हुक्का भरने में मगन थे.

नज़ीर अकबराबादी.

नज़ीर अकबराबादी: होली की बहारों का बेनज़ीर शायर

फिराक़ गोरखपुरी लिखते हैं कि नज़ीर दुनिया के रंग में रंगे हुए महाकवि थे. वे दुनिया में और दुनिया उनमें रहती थी, जो उनकी कविताओं में हंसती-बोलती, जीती-जागती त्योहार मनाती नज़र आती है.

चंद्रशेखर आज़ाद. (फोटो साभार: www.hindgrapha.com)

आज़ाद के शहीद हो जाने के बाद भी उनकी मां को उनके लौट आने का विश्वास था

शहादत दिवस पर विशेष: चंद्रशेखर आज़ाद की मां ने मन्नत मानकर दो उंगलियों में धागा बांध रखा था. कहती थीं कि आज़ाद के आने के बाद ही धागा खोलेंगी.

Narendra Modi Reuters

सब कुछ बदलने का वादा करके आए मोदी ने भ्रष्ट आर्थिक नीतियों को ही आगे बढ़ाया

आज जब दुनिया में नाना प्रकार के खोट उजागर होने के बाद भूमंडलीकरण की ख़राब ​नीतियों पर पुनर्विचार किया जा रहा है, हमारे यहां उन्हीं को गले लगाए रखकर सौ-सौ जूते खाने और तमाशा देखने पर ज़ोर है.

नरेंद्र मोदी. (फोटो: पीटीआई)

‘एक देश, एक चुनाव’ लोकतंत्र का गला घोंट देगा

आज चुनावों के विकास में बाधक होने का तर्क स्वीकार कर लिया गया तो क्या कल समूचे लोकतंत्र को ही विकास विरोधी ठहराने वाले आगे नहीं आ जाएंगे!

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

क्यों कश्मीर में सेना और नागरिकों को आमने-सामने खड़ा किया जा रहा है?

कश्मीर के हालात अब न सैनिकों के लिए अच्छे रह गए हैं, न वहां की जनता के लिए. दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति संदेह का पहाड़ खड़ाकर कर दिया गया है जो रास्ता छोड़ने को तैयार नहीं.

New Delhi: Union Finance Minister Arun Jaitley along with MoS Finance ministers Shiv Pratap Shukla, P Radhakrishnan and Economic Affairs Secretary Shaktikanta Das leaves the North Block to present the Union Budget at Parliament, in New Delhi on Thursday.  Finance Secretary Hasmukh Adhia and Chief Economic Advisor Arvind Subramanian are also seen. PTI Photo by Manvender Vashist (PTI2_1_2018_000009B)

आम बजट: बड़े-बड़े बदलावों के वादे अंततः वादे ही क्यों रह गए?

प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि यह किसानों, गरीबों व वंचितों का बजट है तो उन्हें याद दिलाना होगा कि उन्होंने पिछले बजट को ‘सबके सपनों का बजट’ बताया था.

Sant Ravidas Wikipedia

‘जब सभ कर दोउ हाथ पग दोउ नैन दोउ कान, रविदास पृथक कइसे भये हिंदू औ मूसलमान’

संत कवियों की लंबी परंपरा में एक रविदास ही ऐसे हैं जो श्रम को ईश्वर बताकर ऐसे राज्य की कल्पना करते हैं, जो भारतीय संविधान के समता, स्वतंत्रता, न्याय व बंधुत्व पर आधारित अवधारणा के अनुरूप है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

अब तो अटल बिहारी जैसा कोई प्रधानमंत्री भी नहीं है, जो योगी को राजधर्म की याद दिलाए

कासगंज में जिन अल्पसंख्यकों ने तिरंगा फहराने के लिए सड़क पर कुर्सियां बिछा रखी थीं, वे अचानक वंदे मातरम् का विरोध और पाकिस्तान का समर्थन क्यों करने लगेंगे?

Mahatma-Gandhi-HD-Wallpapers

बापू ने अयोध्या में कहा था, हिंसा कायरता का लक्षण और तलवारें कमज़ोरों का हथियार हैं

साल 1921 में गांधीजी ने फ़ैज़ाबाद में निकले जुलूस में देखा कि ख़िलाफ़त आंदोलन के अनुयायी हाथों में नंगी तलवारें लिए उनके स्वागत में खड़े हैं. जिसकी उन्होंने सार्वजनिक तौर पर आलोचना की थी.

Doodh-Nath-Singh

‘कहानी लेखन में गिरावट का दौर है, अच्छा साहित्य आंदोलनों से निकलकर सामने आता है’

शुक्रवार 12 जनवरी को हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार दूधनाथ सिंह का निधन हो गया. जीवन और साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर उनसे हुई एक पुरानी बातचीत.

(फोटो: पीटीआई)

जीएसटी व नोटबंदी के दुष्प्रभावों को नकारना नुकसानदेह साबित होगा

उत्तराखंड सरकार के कृषि मंत्री सुबोध उनियाल के ‘जनता दरबार’ मेें नोटबंदी व जीएसटी के कहर से पीड़ित एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ने ज़हर खाकर आत्महत्या कर ली.