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मनीषा पांडेय

(फोटो साभार: विकीमीडिया कॉमन्स)

आम महिलाओं की बढ़ती सियासी चेतना उनकी अपनी है या वे किसी एजेंडा की शिकार हैं?

सोसाइटी के वॉट्सऐप ग्रुप में वो महिलाएं अमूमन घर-गृहस्थी से जुड़े मसले साझा किया करती थीं. पता नहीं ये कब और कैसे हुआ कि अपनी ज़िंदगी की तमाम फ़िक्रें छोड़ बॉलीवुड के नेपोटिज़्म को ख़त्म करना, सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय मांगना और आलिया भट्ट को नेस्तनाबूद कर देना इन औरतों का मक़सद बन गया.