Author Archives

मीना कोटवाल

हाथरस गैंगरेप पीड़िता का अंतिम संस्कार करते पुलिसकर्मी. (फोटो: पीटीआई)

हाथरस पीड़िता के नाम ख़त: अच्छा किया तुम चली गईं क्योंकि इस देश में कुछ नहीं बदलने वाला…

आज फिर एक लड़की के साथ वही हुआ, जो तुम्हारे साथ हुआ, शायद उससे भी भयावह. ऐसा लगातार इसलिए हो रहा है क्योंकि गैंगरेप करने वालों को किसी भी क़ानून, किसी भी सरकार या किसी भी प्रशासन का डर नहीं रह गया है.

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

कंगना रनौत को फेमिनिज़्म के बारे में अभी बहुत कुछ सीखने की ज़रूरत है

कंगना रनौत का एक साथी महिला कलाकार के काम को नकारते हुए उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास और घर गिराए जाने की तुलना बलात्कार से करना दिखाता है कि फेमिनिज़्म को लेकर उनकी समझ बहुत खोखली है.

डॉ. कफ़ील ख़ान और प्रशांत कनौजिया. (फोटो साभार: फेसबुक)

बहुजनों और मुस्लिमों के लिए इंसाफ की राह मुश्किल क्यों है

एनसीआरबी की एक रिपोर्ट के अनुसार जेलों में बंद दलित, आदिवासी और मुस्लिमों की संख्या देश में उनकी आबादी के अनुपात से अधिक है, साथ ही दोषी क़ैदियों से ज़्यादा संख्या इन वर्गों के विचाराधीन बंदियों की है. सरकार का डॉ. कफ़ील और प्रशांत कनौजिया को बार-बार जेल भेजना ऐसे आंकड़ों की तस्दीक करता है.

अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती. (फोटो: पीटीआई)

सुशांत मामला: मीडिया की मर्दवादी सोच के साथ कोर्टरूम में बदलते न्यूज़रूम

अगर आने वाले समय में रिया बेक़सूर साबित हो गईं, तब क्या मीडिया उनका खोया हुआ सम्मान और मानसिक शांति उन्हें वापस दे पाएगा?

कंगना रनौत. (फोटो साभार: फेसबुक/@TeamKanganaRanautOfficial)

अगर मॉडर्न इंडिया ने जातिवाद को नकार दिया है, तो ऊंचे पदों पर दलित क्यों नहीं हैं

बीते रविवार को अभिनेत्री कंगना रनौत ने ट्विटर पर भारत में जाति-व्यवस्था, आरक्षण और भेदभाव को लेकर टिप्पणियां की थीं.