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मीनाक्षी तिवारी

नॉर्थ ईस्ट डायरी: हिमंता बिस्वा सरकार के सौ दिन और ‘नए असम’ का वादा

वीडियो: इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में असम में हिमंता बिस्वा शर्मा की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सौ दिनों और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के अरुणाचल प्रदेश से चकमा और हाजोंग समुदाय को हटाने संबंधी बयान पर द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.

पूर्व उग्रवादी की मौत पर मेघालय में क्यों मचा बवाल?

वीडियो: इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मेघालय में प्रतिबंधित अलगाववादी संगठन हैनियोट्रैप नेशनल लिबरेशन काउंसिल (एचएनएलसी) के पूर्व महासचिव चेस्टरफील्ड थांगखियु की कथित मुठभेड़ में मौत के बाद शिलॉन्ग में भड़की हिंसा, असम मवेशी संरक्षण विधेयक 2021 और असम-मिज़ोरम सीमा पर दोबारा हुई गोलीबारी को लेकर द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.

नॉर्थ ईस्ट डायरी: जासूसी की संभावित सूची में पूर्वोत्तर के नेताओं के नाम के क्या मायने हैं

वीडियो: इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में पेगासस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सामने आई संभावित सर्विलांस की लिस्ट में असम और नगालैंड के नेता तथा मणिपुर के लेखक का नंबर मिलने और असम-मिज़ोरम सीमा पर चल रहे तनाव को लेकर द वायर की नेशनल अफेयर्स एडिटर संगीता बरुआ पिशारोती से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.

Guwahati: People show their documents after arriving at a National Register of Citizens (NRC) Seva Kendra to check their names on the final draft, in Guwahati, Saturday, Aug 31, 2019. (PTI Photo) (PTI8_31_2019_000080B)

असम विधानसभा चुनाव के बीच एनआरसी का मुद्दा कहां है…

ऐसे राज्य में जहां एनआरसी के चलते 20 लाख के क़रीब आबादी ‘स्टेटलेस’ होने के ख़तरे के मुहाने पर खड़ी हो, वहां के सबसे महत्वपूर्ण चुनाव में इस बारे में विस्तृत चर्चा न होना सवाल खड़े करता है.

क्या भारतीय समाज के वर्गीय विभाजन ने फेमिनिज़्म को भी बांट दिया है

समाज की विभिन्न असमानताओं से घिरीं भारतीय क़स्बों-गांवों की औरतें अपनी परिस्थितियों को बदलने की जद्दोजहद में लगे हुए अपने स्तर पर किसी भी तरह अगर पितृसत्ता को चुनौती दे रहीं हैं, तो क्या वे महानगरों में फेमिनिज़्म की आवाज़ बुलंद कर रही महिलाओं से कहीं कमतर हैं?

बाबरी मस्जिद विध्वंस फ़ैसला और हिंदी अख़बारों के संपादकीय

बाबरी विध्वंस मामले को लेकर सीबीआई कोर्ट के फ़ैसले की आलोचना पर जहां अंग्रेज़ी अख़बारों के संपादकीय मुखर रहे, वहीं हिंदी अख़बारों के संपादकीय ‘बीती ताहि बिसार दे’ वाला रवैया अपनाते दिखे.

Morigaon: People stand in a queue to check their names on the final list of the National Register of Citizens (NRC) outside a Gaon Panchayat office in Pavakati village, Morigoan, Saturday, Aug 31, 2019. (PTI Photo) (PTI8_31_2019_000075B)

असम एनआरसी का एक साल: अंतिम सूची से बाहर रहे 19 लाख लोगों के साथ क्या हुआ

एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन के एक साल बाद भी इसमें शामिल नहीं हुए लोगों को आगे की कार्रवाई के लिए ज़रूरी रिजेक्शन स्लिप का इंतज़ार है. प्रक्रिया में हुई देरी के लिए तकनीकी गड़बड़ियों से लेकर कोरोना जैसे कई कारण दिए जा रहे हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो वजह केवल यही नहीं है.

कोरोना संकट के बीच उचित इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज़

विशेष रिपोर्ट: देश भर के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में अधिकतर संसाधन कोविड-19 से निपटने में लगे हैं. कई जगहों पर ओपीडी और गंभीर बीमारियों से संबंधित विभाग बंद हैं और इमरजेंसी में पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं. ऐसे में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे मरीज़ और उनके परिजनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं.

लॉकडाउन डायरी: यह मानवीय क्षुद्रताओं का दौर है…

लॉकडाउन शुरू होने के कुछ रोज़ में ही एक मैसेज मिला, ‘लगता है कलयुग समाप्त हो गया, सतयुग आ गया है, प्रदूषण रहित वातावरण, कोई नौकर नहीं, घर में सब मिलकर काम कर रहे हैं, उपवास-कीर्तन हो रहा है.’ ठीक इन्हीं दिनों हज़ारों कामगारों का हुजूम भूखे-प्यासे एक बीमारी और अनिश्चित भविष्य के डर से महानगरों की सड़कों पर अपनी टूटी चप्पल और फटा बैग संभाले निकल रहा था.

‘हम उस भारत के निर्माण का हिस्सा बनना चाहते हैं, जो बिस्मिल और अशफ़ाक़ बनाना चाहते थे’

उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर के रोशन बाग़ में नागरिकता संशोधन क़ानून, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ बीते 12 जनवरी से लगातार धरना प्रदर्शन चल रहा है, जिसमें महिलाएं बड़ी संख्या में भाग ले रही हैं.

Guwahati: Members of Assam Public Works (APW) sit in protest after declaration of final draft of National Register of Citizens (NRC), in Guwahati, Saturday, Aug 31, 2019,. (PTI Photo) (PTI8_31_2019_000121B)

नॉर्थ ईस्ट डायरी: एनआरसी की सूची से क्यों नाख़ुश हैं मूल याचिकाकर्ता

असम से विदेशियों को निकालने के लिए 2009 में असम पब्लिक वर्क्स (एपीडब्ल्यू) नाम के गैर-सरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. 31 अगस्त को आई एनआरसी की अंतिम सूची से संगठन असंतुष्ट है और इसके 100 फीसदी रीवेरीफिकेशन की मांग कर रहा है. एपीडब्ल्यू के अध्यक्ष अभिजीत शर्मा से मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.

Baska: Villagers of Gorbheter and Bherveri, whose names are missing in the final list of National Register of Citizenship (NRC), stage a protest over non-inclusion of their names, at Gorbeter in Baska district of Assam, Monday, September 2, 2019. (PTI Photo) (PTI9_2_2019_000101B)

‘दस्तावेज़ होते हुए भी हमें एनआरसी में शामिल नहीं किया गया’

वीडियो: असम में जारी हुई एनआरसी के विरोध में नई दिल्ली के जंतर मंतर पर ऑल बंगाली यूथ एंड स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के बैनर तले विभिन्न बंगाली हिंदू संगठनों का प्रदर्शन.

क्या है असम में एनआरसी की कहानी

असम में एनआरसी का प्रकाशन बीते कुछ समय से राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है. एक बड़ा तबका इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार को ज़िम्मेदार मानता है, लेकिन यह सच नहीं है.

असम: एनआरसी को लेकर भाजपा के सुर क्यों बदल गए हैं?

विशेष रिपोर्ट: एनआरसी का पहला मसौदा जारी होने के बाद से अमित शाह समेत कई भाजपा नेता ‘घुसपैठियों’ को निकालने के लिए पूरे देश में एनआरसी लाने की पैरवी कर रहे थे. अब असम में एनआरसी के प्रकाशन से पहले भाजपा ने इसके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है.

जम्मू कश्मीर: सरकार के निर्णय पर जनता को प्रतिक्रिया देने का अधिकार है

वीडियो: केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश के बाद लगी पाबंदियों पर सवाल उठाते हुए आईएएस अधिकारी कन्नन गोपीनाथन ने इस्तीफ़ा दे दिया है. उनसे मीनाक्षी तिवारी की बातचीत.