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वासुदेवन मुकुंथ

क्या कोवैक्सीन को मिली मंज़ूरी पहले टीका लेने वालों के लिए इधर कुआं-उधर खाई वाली स्थिति है

कोवैक्सीन को लेकर जानकारियों/आंकड़ों पर गोपनीयता का पर्दा पड़ा हुआ है और हम एक ऐसी मुश्किल स्थिति में हैं, जिसमें कम से कम कुछ लोगों के पास वैक्सीन लेने के अलावा शायद और कोई विकल्प नहीं है, भले ही उनके मन में अपनी सलामती को लेकर कितना ही संदेह क्यों न हो.

कोरोना वैक्सीन को मंज़ूरी तो मिल गई, लेकिन सरकार का इन दस सवालों के जवाब देना बाक़ी है

बीते दिनों भारत के औषध महानियंत्रक यानी डीसीजीआई ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके कोविशील्ड और भारत बायोटेक के स्वदेश में विकसित टीके कोवैक्सीन के देश में सीमित आपात इस्तेमाल को मंज़ूरी दी है. हालांकि इनको लेकर उठे सवाल अब भी अनुत्तरित हैं.

कोरोना को लेकर भारत का रवैया दिखाता है कि ‘साइंस सुपरपावर’ बनने का सपना अभी बहुत दूर है

कैसे कोई देश एक ‘साइंस सुपरपावर’ हो सकता या ऐसा होने की इच्छा भी रख सकता है, अगर इसका राजनीतिक नेतृत्व पूरी तरह से और शायद जानबूझकर, यह न समझता हो कि विज्ञान किस शय का नाम है.

एक भारतीय ने विमान उड़ाने की ‘कोशिश’ की थी, आविष्कार नहीं

‘प्राचीन तकनीक’ को अगर पाठ्यक्रम में शामिल करना ही है, तो इसके पीछे मक़सद मेहनत की भावना को जगाना होना चाहिए. आज किसी शिवकर बापूजी तलपड़े को कोशिश करने और नाकाम होने की छूट होनी चाहिए.

डीडी कोसंबी: एक अनोखी प्रतिभा की ज़िद्दी धुन

डीडी कोसंबी हमारे सामने एक अनोखे रोल मॉडल के तौर पर सामने आते हैं, जिनकी गणितीय प्रतिभा उनके इतिहास ज्ञान और अटल राजनीतिक विचारों पर छा गई थी. प्रतिभाओं का ऐसा मिलान किसी सपने की तरह है.

हीलियम-3 के लिए चांद पर खनन करने नहीं जा रहा इसरो

कई मीडिया संस्थानों ने प्रसिद्ध अंतरिक्ष विज्ञानी शिवथानु पिल्लई की हीलियम-3 पर दी गई जानकारी को ठीक से समझे बिना ही प्रसारित किया. विज्ञान से जुड़ी कोई ख़बर देते समय तथ्यों को लेकर सतर्कता बरतना बेहद ज़रूरी है.

हमारी धरती से आगे जहां और भी हैं!

अभी तक हम दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं पर सिर्फ बात किया करते थे, लेकिन नासा की नई खोज में मिले आंकड़ों के आधार पर अब हम ठोस रूप से इस दिशा में आगे बढ़ सकते हैं. तारामंडल में छह या कहें सात ग्रहों की खोज एक बड़े बदलाव का संकेत है.